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गर्भधारण के बाद समय-समय पर करवाएं अल्ट्रासाउंड : डाॅ. पदम

Mon, 02 Sep 2024 04:57 PM IST
Shimla Bureau शिमला ब्यूरो
Updated Mon, 02 Sep 2024 04:57 PM IST
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Get ultrasound done from time to time after pregnancy: Dr. padam
शिशु स्वस्थ या नहीं, लेवल-2 अल्ट्रासाउंड में मिलती है सटीक जानकारी
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संवाद न्यूज एजेंसी
कुल्लू। गर्भ में पल रहा नवजात शिशु स्वस्थ है या नहीं, इसकी सटीक जानकारी लेवल-2 अल्ट्रासाउंड में मिल जाती है। गर्भवती महिलाएं जानकारी के अभाव में उस समय तक अस्पताल नहीं आती, जिस समय लेवल-2 अल्ट्रासाउंड होना है। लेवल-2 अल्ट्रासाउंड शिशु के शारीरिक विकास के साथ उसके शारीरिक विकारों का पता लगाने का एक माध्यम है। इससे समय पर विकारों का पता लगाकर उनके लक्षणों को कम या ठीक किया जा सकता है। इसके लिए लेवल-2 अल्ट्रासाउंड गर्भधारण के 17 से 20 सप्ताह (पांचवें माह) होना अनिवार्य है। यह बात रेडियोलॉजिस्ट डॉ. पदम नेगी ने कही।
उन्होंने कहा कि साधारण परिस्थितियों में गर्भवती महिला को नौ माह के बीच नियमित अंतराल में चार बार अल्ट्रासाउंड करवाना अनिवार्य रहता है। इनमें सबसे अधिक आवश्यक लेवल-2 अल्ट्रासाउंड है, जो पांचवें माह में होता है। महिला को छह से आठ सप्ताह (डेढ़ से दो माह) में पहला, 11 से 14 सप्ताह (ढाई से साढ़े तीन माह) में दूसरा, 17 से 20 सप्ताह (पांचवां माह) और अंतिम अल्ट्रासाउंड 29 से 32 सप्ताह (आठवां माह) में करवाना होता है। पहले अल्ट्रासाउंड में गर्भ में कितने शिशु हैं, शिशु ठीक है या नहीं, बच्चेदानी से बाहर तो नहीं आदि का पता चलता है। दूसरे अल्ट्रासाउंड में चिकित्सक शिशु में विकृति का पता लगानेे का प्रयास करते हैं, तीसरा अल्ट्रासाउंड जो सबसे महत्वपूर्ण है। इसमें शिशु के हर एक अंग का दिखना शुरू हो जाता है, जिससे उसके शारीरिक विकास और अन्य विकारों का पता लगाया जाता है। चिकित्सक सुनिश्चित करते हैं कि शिशु स्वस्थ है या नहीं, जबकि अंतिम और चौथे अल्ट्रासाउंड में शिशु का विकास देखा जाता है।
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आशा कार्यकर्ता करेंगी महिलाओं को जागरूक
गायनी ओपीडी में देखने को मिल रहा है कि गर्भवती महिलाएं समय पर उपचार के लिए नहीं पहुंच रही हैं, जो एक बड़ी समस्या बन रही है। शिशु के विकास का पता लगाने के लिए अल्ट्रासाउंड का होना जरूरी है। अल्ट्रासाउंड से ही चिकित्सक शिशु की सेहत का पता लगा पाते हैं। ऐसे में अब गर्भवती महिलाओं और उनके परिजनों को आशा कार्यकर्ता जागरूक करेंगी।
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- डॉ. एनआर पवार, मुख्य चिकित्सा अधिकारी कुल्लू
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