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Kullu News: शास्त्री भर्ती के नए नियमों के खिलाफ 22 को रोष रैली
Sun, 18 Feb 2024 04:22 PM IST
शिमला ब्यूरो
संवाद न्यूज एजेंसी, कुल्लू
संवाद न्यूज एजेंसी, कुल्लू
Updated Sun, 18 Feb 2024 04:22 PM IST
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संस्कृत परिषद और संघ ने कहा, निरस्त किए जाएं नए नियम
संवाद न्यूज एजेंसी
कुल्लू। प्रदेश सरकार की ओर से शास्त्री भर्ती में लागू किए गए नए नियमों के खिलाफ जिला संस्कृत परिषद और संस्कृत एवं संस्कृति संरक्षण संघ सड़कों पर उतरेगा। नए नियमों के विरोध में 22 फरवरी को कुल्लू में परिषद की ओर से रोष रैली निकाली जाएगी। नेहरू पार्क सरवरी से उपायुक्त कार्यालय ढालपुर तक होने वाली रोष रैली में काफी अधिक संख्या में बेरोजगार शास्त्री अभ्यर्थी शामिल होंगे।
संस्कृत एवं संस्कृति संरक्षण संघ के अध्यक्ष डॉ. पुरषोत्तम लाल ठाकुर ने कहा कि शास्त्री भर्ती के लिए सरकार ने नए नियम लागू किए हैं। इन नियमों के कारण प्रदेश के हजारों बेरोजगार शास्त्री प्रभावित हुए हैं। इन नियमों को तत्काल निरस्त करके पुराने नियमानुसार ही शास्त्री की भर्ती की जाए। अगर पारंपरिक पद्धति से पांच वर्षों तक संस्कृत महाविद्यालय में पढ़े हुए शास्त्री विद्यार्थी ही शास्त्री की भर्तियों से बाहर होंगे तो यह चिंता का विषय है।
सरकार की इस गलती से संस्कृत महाविद्यालय भी बंद हो जाएंगे। इससे संस्कृत तो प्रभावित होगी ही, साथ में संस्कृत में छिपा हुआ अमूल्य ज्ञान भी पतन की ओर जाएगा। संघ और परिषद ने अब इसके खिलाफ संघर्ष का रास्ता अपनाया है। उन्होंने कहा कि रोष रैली के बाद भी अगर सरकार उनकी मांगों को नहीं सुनती है तो आगामी रणनीति तैयार की जाएगी। संवाद
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संवाद न्यूज एजेंसी
कुल्लू। प्रदेश सरकार की ओर से शास्त्री भर्ती में लागू किए गए नए नियमों के खिलाफ जिला संस्कृत परिषद और संस्कृत एवं संस्कृति संरक्षण संघ सड़कों पर उतरेगा। नए नियमों के विरोध में 22 फरवरी को कुल्लू में परिषद की ओर से रोष रैली निकाली जाएगी। नेहरू पार्क सरवरी से उपायुक्त कार्यालय ढालपुर तक होने वाली रोष रैली में काफी अधिक संख्या में बेरोजगार शास्त्री अभ्यर्थी शामिल होंगे।
संस्कृत एवं संस्कृति संरक्षण संघ के अध्यक्ष डॉ. पुरषोत्तम लाल ठाकुर ने कहा कि शास्त्री भर्ती के लिए सरकार ने नए नियम लागू किए हैं। इन नियमों के कारण प्रदेश के हजारों बेरोजगार शास्त्री प्रभावित हुए हैं। इन नियमों को तत्काल निरस्त करके पुराने नियमानुसार ही शास्त्री की भर्ती की जाए। अगर पारंपरिक पद्धति से पांच वर्षों तक संस्कृत महाविद्यालय में पढ़े हुए शास्त्री विद्यार्थी ही शास्त्री की भर्तियों से बाहर होंगे तो यह चिंता का विषय है।
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सरकार की इस गलती से संस्कृत महाविद्यालय भी बंद हो जाएंगे। इससे संस्कृत तो प्रभावित होगी ही, साथ में संस्कृत में छिपा हुआ अमूल्य ज्ञान भी पतन की ओर जाएगा। संघ और परिषद ने अब इसके खिलाफ संघर्ष का रास्ता अपनाया है। उन्होंने कहा कि रोष रैली के बाद भी अगर सरकार उनकी मांगों को नहीं सुनती है तो आगामी रणनीति तैयार की जाएगी। संवाद
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