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Kullu News: रात भर उठती रहीं आग की लपटें, लाखों की वन संपदा जलकर राख

Fri, 20 Feb 2026 10:16 PM IST
शिमला ब्यूरो संवाद न्यूज एजेंसी, कुल्लू
संवाद न्यूज एजेंसी, कुल्लू Updated Fri, 20 Feb 2026 10:16 PM IST
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Flames continued to rise throughout the night, burning forest wealth worth lakhs to ashes.
कुल्लू के बिजली महादेव की पहाड़ी पर जंगल में लगी आग पुरी रात सुलगती रही।-संवाद
बिजली महादेव की पहाड़ी पर भड़की चिंगारी ने काफी बड़ा क्षेत्र लिया चपेट में
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बीते फायर सीजन में जिले में 635 हेक्टेयर वन भूमि में आग से हुआ था नुकसान

संवाद न्यूज एजेंसी
कुल्लू। जिला मुख्यालय के साथ लगते लगती बिजली महादेव की पहाड़ी में रात भर आग की लपटें उठती रहीं। आग को जिया गांंव की तरफ नीचे की ओर को बुझा लिया गया लेकिन ऊपर की तरफ पहाड़ी में आग सुलगती रही। आग से लाखों की वन संपदा जलकर राख हो गई है।
इससे पहले वीरवार को जिया के ठीक सामने बिजली महादेव की पहाड़ी पर भड़की आग ने काफी बड़े क्षेत्र को अपनी चपेट में ले लिया। बताया जा रहा है कि अंधेरा होने के बाद यह आग शरारती तत्वों की ओर से लगाई गई थी। बिजली महादेव की इस पहाड़ी में अधिकतर घासनी है। पहाड़ी में आग लगने पर इसमें नियंत्रित करना मुश्किल हो जाता है। आग की सूचना जिया पंचायत के वार्ड नंबर चार के एक युवक ने वन विभाग को दी। इसके बाद वन विभाग के अधिकारियों ने स्थानीय लोगों के साथ मिलकर आग पर काबू पाने का प्रयास किया। कड़ी मेहनत से एक छोर पर आग पर काबू पाया गया। आग लगने की घटना के बाद लोगों में काफी रोष नजर आया। हालांकि बीते फायर सीजन में भी कुल्लू जिले में आग से 635 हेक्टेयर का क्षेत्र प्रभावित हुआ है। वन विभाग के आंकड़ों 635 हेक्टेयर में 607 हेक्टेयर में घासनियाें का क्षेत्र जबकि 28 हेक्टेयर में प्लांटेशन एरिया जला है। अब तक करीब चार से साढ़े लाख का नुकसान हुआ है। 21 मामलों में 16 पार्वती डिविजन, चार कुल्लू और एक लाहौल डिविजन का है। हालांकि बरसात सीजन के दौरान सही नुकसान का आकलन होगा, उसके बाद ही पता चलेगा कि कितना नुकसान है।
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कुल्लू में आग का समय प्रदेश के अन्य जिलों के मुकाबले अलग रहता है। कुल्लू में घासनियां अधिक हैं। आग पर काबू पाने के लिए कुछ प्रयास किए गए हैं। अलग-अलग टीम बनाई गई हैं। डिविजन स्तर पर टीम बनाई गई हैं। आग बुझाने के लिए स्थानीय लोगों की सहायता ली जाती है। कुछ गलत अवधारणा के चलते घासनियों में आग लगाई जाती है। जंगल हमारी बहुमूल्य संपदा है, इसे बचाने में विभाग का सहयोग करें। - संदीप शर्मा, मुख्य अरण्यपाल
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