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पांच रैपिड रिस्पांस टीमें करेंगी पक्षियों की निगरानी
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राजीव नैय्यर
कुल्लू। जिला कुल्लू में बर्ड फ्लू के खतरे से निपटने के लिए पांच रिस्पांस टीमों का गठन किया गया है। हर विकास खंड में एक-एक टीम लोकल और विदेशी पक्षियों की गतिविधियों पर नजर रखेंगी। इसके अलावा जिले के हर एक पशु चिकित्सालय में क्यूआरटी टीम भी तैनात रहेगी।
हालांकि, प्रदेश समेत जिले में अभी बर्ड फ्लू का कोई मामला नहीं है। फ्लू के खतरे को देखते हुए विभाग ने सभी तैयारियां पूरी कर ली हैं। पक्षियों की शहर से लेकर ग्रामीण स्तर तक व्यापक रूप से निगरानी की जाएगी। इसके लिए पशुपालन विभाग वन्य प्राणी विभाग से पक्षियों की प्रजातियों की जानकारी ले रहा है। दोनों विभाग मिलकर बर्ड फ्लू की रोकथाम के लिए कार्य करेंगे।
पशुपालन विभाग के अधिकारियों का कहना है कि हर वर्ष नवंबर से पहले ही मुर्गी पालकों को चूजे वितरित किए जाते हैं। नवंबर के बाद बाहरी राज्यों से मुर्गियों चूजे न लाए जाने से फ्लू का खतरा काफी हद तक कम हो जाता है। बावजूद इसके विभाग ने खंड विकास कुल्लू, नग्गर, बंजार, आनी और निरमंड में एक-एक रैपिड रिस्पांस टीम का गठन कर लिया है।
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क्यूआरटी टीमें भी पक्षियों के मृत मिलने की सूचना पर कार्रवाई करेंगी। उधर, पशुपालन विभाग कुल्लू के उपनिदेशक डॉ. विशाल ने कहा कि विभाग बर्ड फ्लू से निपटने को तैयार है। जिले में खंड स्तर पर पांच रैपिड रिस्पांस टीमें तथा हर अस्पताल में क्यूआटी टीम बनाई गई हैं। संवाद
जनवरी में मृत मिले थे आठ प्रजातियों के पक्षी
इसी साल जनवरी में बर्ड फ्लू के कारण कुल्लू में आठ प्रजातियों के 11 पक्षी मृत पाए गए थे। हालांकि, फ्लू से बचने की विभाग ने पूरी तैयारी कर रखी थी। बावजूद इसके कुल्लू में पक्षियों की फ्लू से मौत हुई। ऐसे में बर्ड फ्लू से बचाव के लिए मुर्गी पालक फार्म और बाड़े में जाने के लिए अलग कपड़े तथा जूतों का इस्तेमाल, फार्म के फुटपाथ पर कीटाणुनाशक घोल का प्रयोग, साबुन से हाथ धोने, बाड़े के चारों तरफ चुने का छिड़काव करें।
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कुल्लू। जिला कुल्लू में बर्ड फ्लू के खतरे से निपटने के लिए पांच रिस्पांस टीमों का गठन किया गया है। हर विकास खंड में एक-एक टीम लोकल और विदेशी पक्षियों की गतिविधियों पर नजर रखेंगी। इसके अलावा जिले के हर एक पशु चिकित्सालय में क्यूआरटी टीम भी तैनात रहेगी।
हालांकि, प्रदेश समेत जिले में अभी बर्ड फ्लू का कोई मामला नहीं है। फ्लू के खतरे को देखते हुए विभाग ने सभी तैयारियां पूरी कर ली हैं। पक्षियों की शहर से लेकर ग्रामीण स्तर तक व्यापक रूप से निगरानी की जाएगी। इसके लिए पशुपालन विभाग वन्य प्राणी विभाग से पक्षियों की प्रजातियों की जानकारी ले रहा है। दोनों विभाग मिलकर बर्ड फ्लू की रोकथाम के लिए कार्य करेंगे।
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पशुपालन विभाग के अधिकारियों का कहना है कि हर वर्ष नवंबर से पहले ही मुर्गी पालकों को चूजे वितरित किए जाते हैं। नवंबर के बाद बाहरी राज्यों से मुर्गियों चूजे न लाए जाने से फ्लू का खतरा काफी हद तक कम हो जाता है। बावजूद इसके विभाग ने खंड विकास कुल्लू, नग्गर, बंजार, आनी और निरमंड में एक-एक रैपिड रिस्पांस टीम का गठन कर लिया है।
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क्यूआरटी टीमें भी पक्षियों के मृत मिलने की सूचना पर कार्रवाई करेंगी। उधर, पशुपालन विभाग कुल्लू के उपनिदेशक डॉ. विशाल ने कहा कि विभाग बर्ड फ्लू से निपटने को तैयार है। जिले में खंड स्तर पर पांच रैपिड रिस्पांस टीमें तथा हर अस्पताल में क्यूआटी टीम बनाई गई हैं। संवाद
जनवरी में मृत मिले थे आठ प्रजातियों के पक्षी
इसी साल जनवरी में बर्ड फ्लू के कारण कुल्लू में आठ प्रजातियों के 11 पक्षी मृत पाए गए थे। हालांकि, फ्लू से बचने की विभाग ने पूरी तैयारी कर रखी थी। बावजूद इसके कुल्लू में पक्षियों की फ्लू से मौत हुई। ऐसे में बर्ड फ्लू से बचाव के लिए मुर्गी पालक फार्म और बाड़े में जाने के लिए अलग कपड़े तथा जूतों का इस्तेमाल, फार्म के फुटपाथ पर कीटाणुनाशक घोल का प्रयोग, साबुन से हाथ धोने, बाड़े के चारों तरफ चुने का छिड़काव करें।