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Kullu News: पहले तय करें लक्ष्य, फिर हासिल करने के लिए मेहनत
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कुल्लू। बेटी होना कोई अपराध नहीं है। समाज में बेटियों के प्रति मानसिकता में बदलाव जरूरी है। बेटियां पढ़ लिख कर आत्मनिर्भर बनें, तभी समाज से इस धारणा को बदला जा सकता है। जिला पर्यटन विकास अधिकारी सुनयना शर्मा ने अमर उजाला फाउंडेशन के अपराजिता 100 मिलियन स्माइल्स कार्यक्रम में यह बात कही।
शनिवार को राजकीय बहुतकनीकी शिक्षण संस्थान सेउबाग में आयोजित कार्यक्रम में प्रशिक्षु छात्राओं से कहा कि पहले लक्ष्य तय करें। उसके बाद उसे हासिल करने के लिए कड़ी मेहनत करें। बेटी बचाओ और बेटी पढ़ाओ की बात हर जगह सुनने को मिलती है। अब बेटी को पढ़ाने के साथ उसे अपने पैरों पर खड़ा करना भी जरूरी है।
जीवन में चुनौतियां आती हैं लेकिन उनका डटकर मुकाबला करना है। प्रतियोगी परीक्षाओं के लिए किताबों के साथ-साथ अखबार रोजाना पढ़ें। संस्थान के प्राचार्य नीरज उप्पल ने कहा कि प्रशिक्षु छात्राओं को अपराजिता कार्यक्रम में महत्वपूर्ण जानकारी हासिल हुई है।
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एचएएस कैसे बनते हैं, इसकी परीक्षा कितने चरणों में होती है। यह सब जानकारी जिला पर्यटन विकास अधिकारी से कार्यक्रम से माध्यम से मिली है। इसके लिए किस तरह की तैयारी की जानी चाहिए। एचएएस बनने के लिए प्रेरित हुई हूं।
-मोनिका रावत, प्रशिक्षु छात्रा, बहुतकनीकी संस्थान
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बेटा-बेटी में किसी तरह का भेदभाव नहीं किया जाना चाहिए। दोनों को बराबर समझा जाना चाहिए। दोनों को आगे बढ़ने के लिए एक समान अवसर दिए जाने चाहिए। इससे बेटियां भी आगे बढ़कर अपना नाम कमाएं।
-अर्पिता ठाकुर, प्रशिक्षु छात्रा, बहुतकनीकी संस्थान
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महिला होना कोई छोटी बात नहीं है। एक महिला जो काम कर सकती है वह अन्य नहीं कर सकते हैं। इसलिए हमें महिला होने पर गर्व करना चाहिए। कार्यक्रम से यह सीख मिली है। बेटी होकर भी अपने माता-पिता के सपनों को साकार करूंगी।
-- आयुषी, प्रशिक्षु छात्रा बहुतकनीकी संस्थान
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अमर उजाला का अपराजिता कार्यक्रम महिला सशक्तीकरण की दिशा में सराहनीय कदम है। इससे छात्राओं और महिलाओं का मनोबल बढ़ेगा। कार्यक्रम से मिली जानकारी अपने तक सीमित न रखकर दूसरों से भी साझा करूंगी।
-- तनीशा प्रशिक्षु छात्रा बहुतकनीकी संस्थान
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शनिवार को राजकीय बहुतकनीकी शिक्षण संस्थान सेउबाग में आयोजित कार्यक्रम में प्रशिक्षु छात्राओं से कहा कि पहले लक्ष्य तय करें। उसके बाद उसे हासिल करने के लिए कड़ी मेहनत करें। बेटी बचाओ और बेटी पढ़ाओ की बात हर जगह सुनने को मिलती है। अब बेटी को पढ़ाने के साथ उसे अपने पैरों पर खड़ा करना भी जरूरी है।
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जीवन में चुनौतियां आती हैं लेकिन उनका डटकर मुकाबला करना है। प्रतियोगी परीक्षाओं के लिए किताबों के साथ-साथ अखबार रोजाना पढ़ें। संस्थान के प्राचार्य नीरज उप्पल ने कहा कि प्रशिक्षु छात्राओं को अपराजिता कार्यक्रम में महत्वपूर्ण जानकारी हासिल हुई है।
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एचएएस कैसे बनते हैं, इसकी परीक्षा कितने चरणों में होती है। यह सब जानकारी जिला पर्यटन विकास अधिकारी से कार्यक्रम से माध्यम से मिली है। इसके लिए किस तरह की तैयारी की जानी चाहिए। एचएएस बनने के लिए प्रेरित हुई हूं।
-मोनिका रावत, प्रशिक्षु छात्रा, बहुतकनीकी संस्थान
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बेटा-बेटी में किसी तरह का भेदभाव नहीं किया जाना चाहिए। दोनों को बराबर समझा जाना चाहिए। दोनों को आगे बढ़ने के लिए एक समान अवसर दिए जाने चाहिए। इससे बेटियां भी आगे बढ़कर अपना नाम कमाएं।
-अर्पिता ठाकुर, प्रशिक्षु छात्रा, बहुतकनीकी संस्थान
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महिला होना कोई छोटी बात नहीं है। एक महिला जो काम कर सकती है वह अन्य नहीं कर सकते हैं। इसलिए हमें महिला होने पर गर्व करना चाहिए। कार्यक्रम से यह सीख मिली है। बेटी होकर भी अपने माता-पिता के सपनों को साकार करूंगी।
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अमर उजाला का अपराजिता कार्यक्रम महिला सशक्तीकरण की दिशा में सराहनीय कदम है। इससे छात्राओं और महिलाओं का मनोबल बढ़ेगा। कार्यक्रम से मिली जानकारी अपने तक सीमित न रखकर दूसरों से भी साझा करूंगी।
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