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हल-बैल छोड़ पावर टिलर से खेती कर रहे कुल्लू के किसान
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कुल्लू में पावर टिलर से खेती करता किसान।
- फोटो : Kullu
कुल्लू। जिला कुल्लू के किसान अब हाइटेक हो गए हैं। किसानों ने खेती का पारंपरिक तरीकों को छोड़ आधुनिक तकनीक से कृषि करना शुरू कर दिया है। खेतों में जोताई के लिए काम आने वाले बैल अब सड़कों पर घूमते नजर आ रहे हैं, जबकि खेतों में जोताई के लिए बैलों की जगह पावर टिलर ने ले ली है। कुल्लू में अब पावर टिलर से खेती की जा रही है।
पावर टिलर का क्रेज लोगों में ऐसा है कि देखादेखी में लोग इसे धड़ाधड़ खरीद रहे हैं। ग्रामीण इलाकों में करीब 50 फीसदी लोगों ने अब खेती के लिए पावर टिलर खरीद लिए हैं। जिनके पास पावर टिलर नहीं है वे दिहाड़ी के हिसाब इसे अपने खेतों में इस्तेमाल कर रहे हैं। करीब एक दशक पहले तक खेतों में मक्की, गेहूं और नगदी फसलों की बिजाई बैलों के द्वारा की जाती है। लेकिन बदलते समय ने कुल्लू के किसानों को भी बदलकर रख दिया है। किसानों ने अब बैलों से किनारा कर लिया है।
किसान दौलत सिंह, बेलू राम, आनंद और वीरू राम ने कहा कि रबी फसल की बिजाई किसान पावर टिलर से कर रहे हैं। पावर टिलर की तरफ किसानों का रूझान बढ़ा है। इससे किसानों का समय बचने के साथ मेहनत भी कम लग रही है। पारंपरिक कृषि के लिए इस्तेमाल होने वाले औजार भी अब मिलना मुश्किल है, लेकिन पावर टिलर के कारण बैलों की उपयोगिता जरूर कम हुई है।
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फल एवं सब्जी उत्पादक संगठन के महासचिव सुनील राणा ने कहा कि किसानों अब पावर टिलर से खेती करने को तरजीह दे रहे हैं। इसके कारण पहले खेतों में जोताई में नजर आने वाले बैल अब सड़कों पर नजर आने लगे हैं।
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पावर टिलर का क्रेज लोगों में ऐसा है कि देखादेखी में लोग इसे धड़ाधड़ खरीद रहे हैं। ग्रामीण इलाकों में करीब 50 फीसदी लोगों ने अब खेती के लिए पावर टिलर खरीद लिए हैं। जिनके पास पावर टिलर नहीं है वे दिहाड़ी के हिसाब इसे अपने खेतों में इस्तेमाल कर रहे हैं। करीब एक दशक पहले तक खेतों में मक्की, गेहूं और नगदी फसलों की बिजाई बैलों के द्वारा की जाती है। लेकिन बदलते समय ने कुल्लू के किसानों को भी बदलकर रख दिया है। किसानों ने अब बैलों से किनारा कर लिया है।
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किसान दौलत सिंह, बेलू राम, आनंद और वीरू राम ने कहा कि रबी फसल की बिजाई किसान पावर टिलर से कर रहे हैं। पावर टिलर की तरफ किसानों का रूझान बढ़ा है। इससे किसानों का समय बचने के साथ मेहनत भी कम लग रही है। पारंपरिक कृषि के लिए इस्तेमाल होने वाले औजार भी अब मिलना मुश्किल है, लेकिन पावर टिलर के कारण बैलों की उपयोगिता जरूर कम हुई है।
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फल एवं सब्जी उत्पादक संगठन के महासचिव सुनील राणा ने कहा कि किसानों अब पावर टिलर से खेती करने को तरजीह दे रहे हैं। इसके कारण पहले खेतों में जोताई में नजर आने वाले बैल अब सड़कों पर नजर आने लगे हैं।