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Kullu News: सब्जी उत्पादन के नहीं मिल रहे किसानों का अच्छे दाम
Wed, 25 Jun 2025 11:09 PM IST
शिमला ब्यूरो
संवाद न्यूज एजेंसी, कुल्लू
संवाद न्यूज एजेंसी, कुल्लू
Updated Wed, 25 Jun 2025 11:09 PM IST
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लाहौल घाटी में खेती पर निर्भर करते हैं 90 फीसदी किसान
पिछले वर्ष की तुलना में काफी गिरे सब्जियों के दाम, चिंता में किसान
दिनेश जस्पा
उदयपुर (लाहौल-स्पीति)। लाहौल घाटी में विदेशी सब्जियों को उत्पादकों की कड़ी मेहनत के बाद उचित दाम नहीं मिल रहे हैं। इससे किसान परेशान है। शुरुआती दिनों घाटी में लिफी 100 रुपये प्रति किलो बिक रही थी।
अब सीजन पर होने से लिफी के दाम घट कर 20 से 30 रुपये प्रतिकिलो पहुंच गए हैं। आइसबर्ग 10 से 15 और हरा मटर मटर 50 से 60 रुपये किलो बिक रहा है। सब्जियों के बेहतर दाम न मिलने से किसान मायूस हैं। किसानों का कहना है कि सालभर में एक बार ही बार फसल का उत्पादन करते हैं। ऐसे में इसी पर बच्चों की पढ़ाई, परिवार का लालन-पालन भी निर्भर करता है। ऐसे में उन्हें चिंता सताने लगी है। घाटी की 90 फीसदी आबादी कृषि एवं बागवानी पर निर्भर है।
जनजातीय क्षेत्र लाहौल घाटी के किसानों को बीते वर्ष के मुकाबले इस बार उनके नगदी फसलों का बेहतर दाम नहीं मिल पा रहा है। घाटी के किसानों का कहना है कि पिछले साल शुरुआती दिनों में किसानों को लिफी का दाम 250 से लेकर 300 और आइसबर्ग 100, हरा मटर 120 रुपये प्रति किलो मिला था। घाटी में महज 954 हेक्टेयर में मटर की पैदावार है, लेकिन मटर की फसल ने भी उनकी उम्मीदों पर पानी फेर दिया है। किसान वीर सिंह और रमेश लाल ने बताया कि घाटी में व्यापारी अलग-अलग हिस्सों में अलग-अलग दाम पर सब्जियों के खरीदारी कर रहे हैं। सब जगह एक समान फसलों के दाम नहीं है। जिला कृषि अधिकारी डाॅ. मुंशी राम ठाकुर ने कहा कि गुणवत्ता के लिहाज से घाटी के किसानों को उनके फसलों का अच्छा दाम मिलना चाहिए। संवाद
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पिछले वर्ष की तुलना में काफी गिरे सब्जियों के दाम, चिंता में किसान
दिनेश जस्पा
उदयपुर (लाहौल-स्पीति)। लाहौल घाटी में विदेशी सब्जियों को उत्पादकों की कड़ी मेहनत के बाद उचित दाम नहीं मिल रहे हैं। इससे किसान परेशान है। शुरुआती दिनों घाटी में लिफी 100 रुपये प्रति किलो बिक रही थी।
अब सीजन पर होने से लिफी के दाम घट कर 20 से 30 रुपये प्रतिकिलो पहुंच गए हैं। आइसबर्ग 10 से 15 और हरा मटर मटर 50 से 60 रुपये किलो बिक रहा है। सब्जियों के बेहतर दाम न मिलने से किसान मायूस हैं। किसानों का कहना है कि सालभर में एक बार ही बार फसल का उत्पादन करते हैं। ऐसे में इसी पर बच्चों की पढ़ाई, परिवार का लालन-पालन भी निर्भर करता है। ऐसे में उन्हें चिंता सताने लगी है। घाटी की 90 फीसदी आबादी कृषि एवं बागवानी पर निर्भर है।
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जनजातीय क्षेत्र लाहौल घाटी के किसानों को बीते वर्ष के मुकाबले इस बार उनके नगदी फसलों का बेहतर दाम नहीं मिल पा रहा है। घाटी के किसानों का कहना है कि पिछले साल शुरुआती दिनों में किसानों को लिफी का दाम 250 से लेकर 300 और आइसबर्ग 100, हरा मटर 120 रुपये प्रति किलो मिला था। घाटी में महज 954 हेक्टेयर में मटर की पैदावार है, लेकिन मटर की फसल ने भी उनकी उम्मीदों पर पानी फेर दिया है। किसान वीर सिंह और रमेश लाल ने बताया कि घाटी में व्यापारी अलग-अलग हिस्सों में अलग-अलग दाम पर सब्जियों के खरीदारी कर रहे हैं। सब जगह एक समान फसलों के दाम नहीं है। जिला कृषि अधिकारी डाॅ. मुंशी राम ठाकुर ने कहा कि गुणवत्ता के लिहाज से घाटी के किसानों को उनके फसलों का अच्छा दाम मिलना चाहिए। संवाद
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