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माहुंटी नाग के मंदिर कोट में फागली उत्सव
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कुल्लू के खराहल घाटी के माहुंटी नाग।
- फोटो : Kullu
कुल्लू/खराहल। आराध्य देवता माहुंटी नाग के मंदिर कोट में शनिवार को आस्था का सैलाब उमड़ा। मंदिर में सैकड़ों श्रद्धालुओं, हारियानों ने शीश नवाया और आशीर्वाद लिया। उत्सव का शुभारंभ देवालय में सुबह विशेष पूजा-अर्चना से हुआ।
पुजारी की ओर से चारों दिशा में तीर छोडे़ गए। इसे पकड़ने के लिए जद्दोजहद हुई। पहला तीर पकड़ने में घराकड़ के निवासी शान ठाकुर सफल रहे। फागली उत्सव में देवता के गूर ने देव नृत्य करते हुए बर्फ के गोले चारों दिशा में फेंके। देवता के पुजारी ने पारंपरिक तरकश से तीर निकालकर चारों दिशा में छोड़े। मान्यता है कि जो पुजारी की ओर से छोड़े गए तीर को सबसे पहले पकड़ने में सफल होगा, उसकी मनोकामना पूरी हो जाती है। गूर की ओर से फेंके गए बर्फ के गोले का भी अपना महत्व है। देव कारकूनों का कहना है कि देव खेल के दौरान गूर जिस दिशा में अधिक बर्फ फेंकते है, उस दिशा में ओलावृष्टि से फसल को भारी नुकसान होने की संभावना रहती है। उत्तर दिशा में अधिक बर्फ गिरी। फागली उत्सव में सदियों से चली आ रही देव परंपरा का निर्वहन किया गया। देवता की ओर से छोड़े गए पहले तीर के लिए सैकड़ों लोगों के बीच कशमकश का नजारा देखने को मिला। घाटी के चुनी लाल, अशोक ठाकुर, अखिल ठाकुर, नवीन आदि ने बताया कि मंदिर के प्रांगण में देव परंपरा के मुताबिक फागली उत्सव मनाया गया। इस मौके पर भारी संख्या में लोगों ने शीश नवाया।
बारिश का देवता मांहुटी नाग: कारदार
कुल्लू। देवता के कारदार लाल चंद ठाकुर ने बताया कि माहुंटी नाग अपने हारियानों और भक्तों की हर मुसीबत दूर करते हैं। देवता सूखे में बारिश भी करवाते हैं। बारिश के लिए देवता से प्रार्थना की है। फागली उत्सव में श्रद्धालुओं और हारियानों को देव भोज भी वितरित किया गया। इस साल भारी संख्या में लोगों ने देवता से आशीर्वाद लिया।
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पुजारी की ओर से चारों दिशा में तीर छोडे़ गए। इसे पकड़ने के लिए जद्दोजहद हुई। पहला तीर पकड़ने में घराकड़ के निवासी शान ठाकुर सफल रहे। फागली उत्सव में देवता के गूर ने देव नृत्य करते हुए बर्फ के गोले चारों दिशा में फेंके। देवता के पुजारी ने पारंपरिक तरकश से तीर निकालकर चारों दिशा में छोड़े। मान्यता है कि जो पुजारी की ओर से छोड़े गए तीर को सबसे पहले पकड़ने में सफल होगा, उसकी मनोकामना पूरी हो जाती है। गूर की ओर से फेंके गए बर्फ के गोले का भी अपना महत्व है। देव कारकूनों का कहना है कि देव खेल के दौरान गूर जिस दिशा में अधिक बर्फ फेंकते है, उस दिशा में ओलावृष्टि से फसल को भारी नुकसान होने की संभावना रहती है। उत्तर दिशा में अधिक बर्फ गिरी। फागली उत्सव में सदियों से चली आ रही देव परंपरा का निर्वहन किया गया। देवता की ओर से छोड़े गए पहले तीर के लिए सैकड़ों लोगों के बीच कशमकश का नजारा देखने को मिला। घाटी के चुनी लाल, अशोक ठाकुर, अखिल ठाकुर, नवीन आदि ने बताया कि मंदिर के प्रांगण में देव परंपरा के मुताबिक फागली उत्सव मनाया गया। इस मौके पर भारी संख्या में लोगों ने शीश नवाया।
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बारिश का देवता मांहुटी नाग: कारदार
कुल्लू। देवता के कारदार लाल चंद ठाकुर ने बताया कि माहुंटी नाग अपने हारियानों और भक्तों की हर मुसीबत दूर करते हैं। देवता सूखे में बारिश भी करवाते हैं। बारिश के लिए देवता से प्रार्थना की है। फागली उत्सव में श्रद्धालुओं और हारियानों को देव भोज भी वितरित किया गया। इस साल भारी संख्या में लोगों ने देवता से आशीर्वाद लिया।
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