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Kullu News: कृषि उन्नयन में पशुपालन की भूमिका पर जोर
Wed, 04 Jun 2025 04:54 AM IST
शिमला ब्यूरो
संवाद न्यूज एजेंसी, कुल्लू
संवाद न्यूज एजेंसी, कुल्लू
Updated Wed, 04 Jun 2025 04:54 AM IST
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लाहौल की पंचायतों में विकसित कृषि संकल्प अभियान जारी
थिरोट, सिंदवारी, मूरिंग, कामरिंग और शेलिंग गांवों में जागरूकता कार्यक्रमों का आयोजन
संवाद न्यूज एजेंसी
केलांग (लाहौल-स्पीति)। लाहौल घाटी के विभिन्न गांवों में विकसित कृषि संकल्प अभियान के तहत जागरूकता कार्यक्रमों का अभियान जारी है। अभियान का उद्देश्य किसानों को आधुनिक कृषि, बागवानी और पशु पालन की तकनीकों से जोड़कर उनकी आय और जीवन स्तर में सुधार लाना है।
इसी कड़ी में थिरोट, सिंदवारी, मूरिंग, कामरिंग और शेलिंग जैसे दुर्गम गांवों में कार्यक्रमों का आयोजन कर विशेषज्ञों ने खेती और पशुपालन के आपसी संबंध पर विस्तार से चर्चा की। विशेष रूप से पशुपालन की भूमिका को कृषि के संवर्धन में महत्वपूर्ण बताया गया।
कार्यक्रम में डॉ. अनुराग शर्मा, पशु चिकित्साधिकारी, किरतिंग लाहौल-स्पीति ने किसानों को संबोधित करते हुए कहा कि पशुपालन सिर्फ दुग्ध उत्पादन का माध्यम नहीं है, बल्कि यह जैविक खाद, खेत की उत्पादकता में वृद्धि और फसल विविधिकरण में भी सहायक है। यदि कृषि और पशुपालन को एकीकृत रूप में अपनाया जाए, तो यह किसानों की आमदनी को कई गुना बढ़ा सकता है। अभियान में कृषि विभाग, बागवानी विभाग, आत्मा परियोजना और हिमाचल प्रदेश कृषि विश्वविद्यालय पालमपुर के प्रतिनिधियों ने भी भाग लिया। उन्होंने प्राकृतिक खेती, जलवायु आधारित कृषि तकनीकों, फल-सब्जी उत्पादन और पशु पोषण जैसे विषयों पर उपयोगी जानकारी प्रदान की।-संवाद
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थिरोट, सिंदवारी, मूरिंग, कामरिंग और शेलिंग गांवों में जागरूकता कार्यक्रमों का आयोजन
संवाद न्यूज एजेंसी
केलांग (लाहौल-स्पीति)। लाहौल घाटी के विभिन्न गांवों में विकसित कृषि संकल्प अभियान के तहत जागरूकता कार्यक्रमों का अभियान जारी है। अभियान का उद्देश्य किसानों को आधुनिक कृषि, बागवानी और पशु पालन की तकनीकों से जोड़कर उनकी आय और जीवन स्तर में सुधार लाना है।
इसी कड़ी में थिरोट, सिंदवारी, मूरिंग, कामरिंग और शेलिंग जैसे दुर्गम गांवों में कार्यक्रमों का आयोजन कर विशेषज्ञों ने खेती और पशुपालन के आपसी संबंध पर विस्तार से चर्चा की। विशेष रूप से पशुपालन की भूमिका को कृषि के संवर्धन में महत्वपूर्ण बताया गया।
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कार्यक्रम में डॉ. अनुराग शर्मा, पशु चिकित्साधिकारी, किरतिंग लाहौल-स्पीति ने किसानों को संबोधित करते हुए कहा कि पशुपालन सिर्फ दुग्ध उत्पादन का माध्यम नहीं है, बल्कि यह जैविक खाद, खेत की उत्पादकता में वृद्धि और फसल विविधिकरण में भी सहायक है। यदि कृषि और पशुपालन को एकीकृत रूप में अपनाया जाए, तो यह किसानों की आमदनी को कई गुना बढ़ा सकता है। अभियान में कृषि विभाग, बागवानी विभाग, आत्मा परियोजना और हिमाचल प्रदेश कृषि विश्वविद्यालय पालमपुर के प्रतिनिधियों ने भी भाग लिया। उन्होंने प्राकृतिक खेती, जलवायु आधारित कृषि तकनीकों, फल-सब्जी उत्पादन और पशु पोषण जैसे विषयों पर उपयोगी जानकारी प्रदान की।-संवाद
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