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साहित्य समझने के लिए संवाद जरूरी : डॉ. सरस्वती

Sun, 22 Sep 2024 11:56 PM IST
Shimla Bureau शिमला ब्यूरो
Updated Sun, 22 Sep 2024 11:56 PM IST
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Dialogue is necessary to understand literature: Dr. Saraswati
कुल्लू। साहित्य को समझने के लिए संवाद स्थापित करना आवश्यक रहता है। जितना संवाद स्थापित होगा साहित्य और संस्कृति की समझ और उपयोगिता उतनी अधिक सरलता से समझ आएगी। यह बात हिमाचल प्रदेश विश्वविद्यालय शिमला की पूर्व प्रोफेसर डॉ. सरस्वती भल्ला ने कही। जिला मुख्यालय कुल्लू में रविवार को जिला परिषद भवन में बहु-विषयक अंतरराष्ट्रीय संगोष्ठी का शुभारंभ डॉ. सरस्वती भल्ला ने किया। इस तीन दिवसीय संगोष्ठी के पहले दिन डॉ. टेकचंद भल्ला, रोरिक आर्ट मेमोरियल ट्रस्ट नग्गर की रशियन क्यूरेटर लारिसा सुरगीना विशेष अतिथि रहे। अंतरराष्ट्रीय संगोष्ठी का आयोजन रूपी सराज कला मंच साधना स्थली कुल्लू एवं भाषा एवं संस्कृति विभाग के संयुक्त तत्वावधान में किया जा रहा है।
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संगोष्ठी में 12 ज्वलंत विषयों पर आमंत्रित विद्वानों एवं साहित्यकारों की ओर से शोधपत्र पढ़े जाएंगे। पहले सत्र में शुभारंभ के उपरांत राजकीय महाविद्यालय कुल्लू के पूर्व प्राचार्य प्रो. वाईपी महंत, आयुष विभाग के दवा निरीक्षक एवं डॉ. मनीष सूद ने अपना व्याख्यान दिया। इसके बाद दूसरे सत्र में सुल्तानपुर कुल्लू के प्रो. राजेंद्र शर्मा, राजकीय महाविद्यालय पनारसा की प्राचार्य डॉ. उरसेम लता ने व्याख्यान दिया। आमंत्रित शिक्षकों तथा प्रतिभागियों ने अपने शोधपत्र पढ़े। रूपी सराज कला मंच साधना स्थली कुल्लू के सचिव डॉ. दयानंद गौतम ने कहा कि संगोष्ठी में करीब 40 शिक्षक और प्रतिभागी ऑफलाइन और एक दिन ऑनलाइन माध्यम से संगोष्ठी में हिस्सा लेंगे। कहा कि इस संगोष्ठी में संवाद, मानव मूल्यों, भाईचारा, संवेदना, मानव के रिश्तों पर चर्चा की जाएगी। संवाद
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