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देव दर्शन के लिए मंदिरों में उमड़ी भीड़
ब्यूरो/अमर उजाला, कुल्लू
Updated Thu, 17 Sep 2015 11:03 PM IST
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सायर संक्रांति के मौके पर सैंज घाटी के देवालयों में खूब भीड़ उमड़ी। इस
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दौरान घाटी के विभिन्न मंदिरों में देवी-देवताओं के रथों को बाहर निकाला
गया। वहीं, मंदिरों में विभिन्न अनुष्ठान भी किए गए। सायर पर्व के अवसर पर
शाक्टी में देवता वशिष्ठ ऋषि की शोभायात्रा निकाली गई। वाद्ययंत्रों की थाप
पर देवता ने गांव की परिक्रमा की।
शोभायात्रा में सैकड़ों लोग शामिल हुए। वहीं, लपाह गांव में देवी ऊषा ने भी भक्तों को आशीर्वाद दिया। उधर, शांघड़ में भी आराध्य देवता शंगचूल महादेव की विधि के मुताबिक पूजा-अर्चना की गई। देवता कमेटी के कारदार गिरधारी लाल शर्मा तथा प्रमुख पालसरा टेक सिंह ने बताया कि देवता के सभी मुख्य कारकूनों ने पिछले सात दिन से उपवास रखा हुआ था। देवता के पुजारी जगदीश शर्मा तथा दविंद्र शर्मा ने बताया कि शरद संक्रांति को देवता का प्रमुख महोत्सव मानाया जाता है। इस दिन घाटी के दूरदराज से लोग देवता के दर्शन के लिए आते हैं।
देवता के इस खास त्योहार में वाद्ययंत्र बजाने वाले बजंतरियों का भी विशेष महत्व रहता है जिनमें सूरत राम, जीत राम, रूपणू, डाबे राम तथा सरन प्रमुख हैं। देवस्थान पटाहरा में देवपरंपरा निभाने के पश्चात देवता की भव्य शोभायात्रा निकाली जाती है। इसके अलावा घाटी के अन्य क्षेत्रों में भी पर्व को लेकर विभिन्न कार्यक्रम आयोजित किए गए। क्षेत्र के अन्य मंदिरों में भी दिन भर श्रद्धालुओं का तांता लगा रहा।
शोभायात्रा में सैकड़ों लोग शामिल हुए। वहीं, लपाह गांव में देवी ऊषा ने भी भक्तों को आशीर्वाद दिया। उधर, शांघड़ में भी आराध्य देवता शंगचूल महादेव की विधि के मुताबिक पूजा-अर्चना की गई। देवता कमेटी के कारदार गिरधारी लाल शर्मा तथा प्रमुख पालसरा टेक सिंह ने बताया कि देवता के सभी मुख्य कारकूनों ने पिछले सात दिन से उपवास रखा हुआ था। देवता के पुजारी जगदीश शर्मा तथा दविंद्र शर्मा ने बताया कि शरद संक्रांति को देवता का प्रमुख महोत्सव मानाया जाता है। इस दिन घाटी के दूरदराज से लोग देवता के दर्शन के लिए आते हैं।
देवता के इस खास त्योहार में वाद्ययंत्र बजाने वाले बजंतरियों का भी विशेष महत्व रहता है जिनमें सूरत राम, जीत राम, रूपणू, डाबे राम तथा सरन प्रमुख हैं। देवस्थान पटाहरा में देवपरंपरा निभाने के पश्चात देवता की भव्य शोभायात्रा निकाली जाती है। इसके अलावा घाटी के अन्य क्षेत्रों में भी पर्व को लेकर विभिन्न कार्यक्रम आयोजित किए गए। क्षेत्र के अन्य मंदिरों में भी दिन भर श्रद्धालुओं का तांता लगा रहा।