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Kullu News: मकराहड़ में देवता मार्कंडेय ऋषि ने किया स्नान
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ढोल, नगाड़ों और नरसिंगों की स्वरलहरियों के साथ निभाई गई रस्म
संवाद न्यूज एजेंसी
कुल्लू। जिले की गड़सा घाटी के मकराहड़ में ब्यास के किनारे संगम स्थल पर देवता मार्कंडेय ऋषि ने शाही स्नान किया। बैसाख संक्रांति को देवता के साथ श्रद्धालुओं ने भी डुबकी लगाई। ढोल, नगाड़ों और नरसिंगों की स्वरलहरियों के बाद देवता ने यह रस्म पूरी की। शनिवार सुबह देवता पूरे लाव लश्कर के साथ देवालय से बाहर निकले और लोगों को दर्शन देकर आशीर्वाद दिया।
इसके बाद देवता का रथ देवालय से शाही स्नान के लिए रवाना हुआ। करीब 11:45 बजे इस परंपरा को निभाया गया। स्नान के बाद पूजा-अर्चना कर देवता अपने मूल स्थान पर पहुंचे। यहां पर देवता ने धरती माता के दूध पीने की रस्म को निभाया। बताया जाता है कि जिस जगह पर देवता मार्कंडेय ऋषि प्रकट हुए थे, देवता उस स्थान की जगह को अपनी माता मानते हैं। दूध पीने की परंपरा निभाने के दौरान देवता मार्कंडेय ऋषि का रथ पूरी तरह से जमीन से लग जाता है।
इस नजारे को देखने के लिए लोगों की भारी भीड़ उमड़ती है। देवता मार्कंडेय ऋषि के कारदार जीवन प्रकाश शर्मा ने कहा कि इस परंपरा को सदियों से निभाया जा रहा है। बैसाख संक्रांति पर देवता मकराहड़ में शाही स्नान के लिए जाते हैं और देवता की ओर से धरती माता के दूध पीने की रस्म को निभाते हैं। इस मौके पर पृथी पाल सिंह, बालमकुंद नेगी, इंद्रपाल, रविंद्र रब्बू सहित देवता के कारकून मौजूद रहे। संवाद
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संवाद न्यूज एजेंसी
कुल्लू। जिले की गड़सा घाटी के मकराहड़ में ब्यास के किनारे संगम स्थल पर देवता मार्कंडेय ऋषि ने शाही स्नान किया। बैसाख संक्रांति को देवता के साथ श्रद्धालुओं ने भी डुबकी लगाई। ढोल, नगाड़ों और नरसिंगों की स्वरलहरियों के बाद देवता ने यह रस्म पूरी की। शनिवार सुबह देवता पूरे लाव लश्कर के साथ देवालय से बाहर निकले और लोगों को दर्शन देकर आशीर्वाद दिया।
इसके बाद देवता का रथ देवालय से शाही स्नान के लिए रवाना हुआ। करीब 11:45 बजे इस परंपरा को निभाया गया। स्नान के बाद पूजा-अर्चना कर देवता अपने मूल स्थान पर पहुंचे। यहां पर देवता ने धरती माता के दूध पीने की रस्म को निभाया। बताया जाता है कि जिस जगह पर देवता मार्कंडेय ऋषि प्रकट हुए थे, देवता उस स्थान की जगह को अपनी माता मानते हैं। दूध पीने की परंपरा निभाने के दौरान देवता मार्कंडेय ऋषि का रथ पूरी तरह से जमीन से लग जाता है।
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इस नजारे को देखने के लिए लोगों की भारी भीड़ उमड़ती है। देवता मार्कंडेय ऋषि के कारदार जीवन प्रकाश शर्मा ने कहा कि इस परंपरा को सदियों से निभाया जा रहा है। बैसाख संक्रांति पर देवता मकराहड़ में शाही स्नान के लिए जाते हैं और देवता की ओर से धरती माता के दूध पीने की रस्म को निभाते हैं। इस मौके पर पृथी पाल सिंह, बालमकुंद नेगी, इंद्रपाल, रविंद्र रब्बू सहित देवता के कारकून मौजूद रहे। संवाद
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