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चेतन के बांसुरी वादन ने किया मंत्र मुग्ध
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कुल्लू के देवसदन में श्याम संगीत सम्मेलन में प्रस्तुति देते कलाकार।
- फोटो : Kullu
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कुल्लू। संगीत शिरोमणि प्रोफेसर श्याम लाल ठाकुर की 91वीं जयंती पर उत्तर क्षेत्र सांस्कृतिक केंद्र पटियाला और श्याम संगीत सम्मेलन समिति कुल्लू ने देव सदन में शास्त्रीय संगीत संध्या का आयोजन किया। इसमें दिल्ली से आए बांसुरी वादक चेतन जोशी के बांसुरी वादन ने सभी को मंत्रमुग्ध कर दिया।
चेतन जोशी के वादन से ऐसा लगा जैसे वृंदावन की कुंज गालियों में कृष्ण की बांसुरी सुन रहे हों। उन्होंने असम के ताल वाद्य खोल की संगत के साथ राग जोग में वादन आरंभ किया। उसके बाद रूपक ताल और तीन ताल वादन करते हुए दर्शकों को झूमने पर विवश किया। उनके साथ खोल पर मनोज कुमार दास और तबले पर धृति कुमार दत्ता ने संगत की। रामपुर घराने की सुप्रसिद्ध शास्त्रीय गायिका डॉ. सरिता पाठक चतुर्वेदी ने मंच संभाला। उन्होंने राग मारुबिहाग गाकर सब को भावविभोर कर दिया। खुली और मधुर आवाज की मल्लिका सरिता पाठक ने श्कोयलिया बोले बैरन मोरी पदरचना को एक ताल में विलंबित लय से शुरू कर उत्तराखंड के प्रसिद्ध चैती गीत शआयो चैत महीनों गाकर दिल जीता। उनके साथ तबले पर सुधीर पांडे, सारंगी पर घनश्याम सिसोदिया और हारमोनियम पर उमेश साहू ने संगत की। गायन के बीच सुधीर पांडे और घनश्याम की जुगलबंदी दर्शकों को तालियां बजाने पर विवश करती रही। बिलासपुर के युवा गायक प्रत्युष और उत्कर्ष की जुगल बंदी ने भी प्रभावित किया। भास्कर संगीत महाविद्यालय की छात्रा श्वेता ने राग पुरिया कल्याण, पायल ठाकुर ने राग शुद्ध कल्याण गाया और अक्षिता ने तीन ताल बजा कर अपनी उंगलियों का कमाल दिखाया। कार्यक्रम की मुख्य अतिथि समाजसेवी इंदिरा शर्मा ने कहा कि इस तरह के आयोजनों से मन को सुकून मिलता है। सरकार को स्कूलों, कॉलेजों में संगीत विषय को अनिवार्य करना चाहिए। श्याम संगीत सम्मेलन समिति के अध्यक्ष डॉ. सूरत ठाकुर ने बताया कि संस्था पिछले 18 वर्षों से लगातार शास्त्रीय संगीत संध्या का आयोजन करती आ रही है। इसमें देश के ख्यातिप्राप्त कलाकार अपनी प्रस्तुतियां दे चुके हैं। कार्यक्रम का आगाज सरस्वती वंदना से हुआ और मंच संचालन महेश शर्मा ने किया।इस अवसर पर अनुराग पराशर, दिनेश सेन, जितेंद्र ठाकुर, राजिंद्र सूद, रणधीर सलहुरिया, डॉ. निरंजन देव शर्मा, गणेश भारद्वाज, एकादशी महंत, विद्या सागर, रेणुका आचार्य, अच्छर सिंह, डॉ. राजेश, कैलाश गौतम, सोमदेव कश्यप, विजय सेन, संगीता आचार्य, कल्पना ठाकुर, मंजू बाला आदि संगीत रसिक भी उपस्थित रहे।
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चेतन जोशी के वादन से ऐसा लगा जैसे वृंदावन की कुंज गालियों में कृष्ण की बांसुरी सुन रहे हों। उन्होंने असम के ताल वाद्य खोल की संगत के साथ राग जोग में वादन आरंभ किया। उसके बाद रूपक ताल और तीन ताल वादन करते हुए दर्शकों को झूमने पर विवश किया। उनके साथ खोल पर मनोज कुमार दास और तबले पर धृति कुमार दत्ता ने संगत की। रामपुर घराने की सुप्रसिद्ध शास्त्रीय गायिका डॉ. सरिता पाठक चतुर्वेदी ने मंच संभाला। उन्होंने राग मारुबिहाग गाकर सब को भावविभोर कर दिया। खुली और मधुर आवाज की मल्लिका सरिता पाठक ने श्कोयलिया बोले बैरन मोरी पदरचना को एक ताल में विलंबित लय से शुरू कर उत्तराखंड के प्रसिद्ध चैती गीत शआयो चैत महीनों गाकर दिल जीता। उनके साथ तबले पर सुधीर पांडे, सारंगी पर घनश्याम सिसोदिया और हारमोनियम पर उमेश साहू ने संगत की। गायन के बीच सुधीर पांडे और घनश्याम की जुगलबंदी दर्शकों को तालियां बजाने पर विवश करती रही। बिलासपुर के युवा गायक प्रत्युष और उत्कर्ष की जुगल बंदी ने भी प्रभावित किया। भास्कर संगीत महाविद्यालय की छात्रा श्वेता ने राग पुरिया कल्याण, पायल ठाकुर ने राग शुद्ध कल्याण गाया और अक्षिता ने तीन ताल बजा कर अपनी उंगलियों का कमाल दिखाया। कार्यक्रम की मुख्य अतिथि समाजसेवी इंदिरा शर्मा ने कहा कि इस तरह के आयोजनों से मन को सुकून मिलता है। सरकार को स्कूलों, कॉलेजों में संगीत विषय को अनिवार्य करना चाहिए। श्याम संगीत सम्मेलन समिति के अध्यक्ष डॉ. सूरत ठाकुर ने बताया कि संस्था पिछले 18 वर्षों से लगातार शास्त्रीय संगीत संध्या का आयोजन करती आ रही है। इसमें देश के ख्यातिप्राप्त कलाकार अपनी प्रस्तुतियां दे चुके हैं। कार्यक्रम का आगाज सरस्वती वंदना से हुआ और मंच संचालन महेश शर्मा ने किया।इस अवसर पर अनुराग पराशर, दिनेश सेन, जितेंद्र ठाकुर, राजिंद्र सूद, रणधीर सलहुरिया, डॉ. निरंजन देव शर्मा, गणेश भारद्वाज, एकादशी महंत, विद्या सागर, रेणुका आचार्य, अच्छर सिंह, डॉ. राजेश, कैलाश गौतम, सोमदेव कश्यप, विजय सेन, संगीता आचार्य, कल्पना ठाकुर, मंजू बाला आदि संगीत रसिक भी उपस्थित रहे।
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