खेतों में ही बरबाद हो गई 40 फीसदी टमाटर फसल
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मौसम की बेरूखी के चलते 40 फीसदी टमाटर फसल खेतों में ही बर्बाद हो गई है। मानसून की दस्तक के बावजूद भी बरसात न होने के कारण खरीफ फसलों को सूखे ने काफी नुकसान पहुंचाया है। नकदी फसलों के अलावा परंपरागत फसलें भी सूखे के कारण मुरझाने लगी है। हालत यह है कि कई किसानों ने तो मक्की और दलहनी फसल की बीजाई तक नहीं की है सूखे का प्रभाव टमाटर और गोभी की खेती पर सबसे ज्यादा दिख रहा है। इसके चलते किसान को खासा आर्थिक नुकसान उठाना पड़ रहा है। सूखे के कहर से पौधों पर कई बीमारियों ने हमला बोल दिया है। माइट और काला धब्बा रोग ने पांव पसारने शुरू कर दिए है।
जिला में करीब ढाई माह से चल रहे सूखे के कारण तमाम फसलें सूखने लगी है। प्राकृतिक पानी के जलस्रोत भी सूखने लगे हैं। किसानों के खेतों तक सिंचाई के लिए भरपूर पानी उपलब्ध नहीं हो रहा है। किसानों के पास सिंचाई की सुविधा भी नहीं है। प्रगतिशील किसान अमित, रामू, सेस राम, सतीश ठाकुर, गिरधारी लाल, चमन, वीर सिंह, कर्म चंद, ज्ञान ठाकुर, मोहर सिंह, सुशील, राजीव शर्मा, गुमत राम, डॉ. रमेश ठाकुर, दिले राम, हौतम सौंखला, राकेश चंद, हेम राज, केहर सिंह तथा देवेंद्र का कहना है कि सूखे के कारण टमाटर के अलावा अन्य फसलों को भी नुकसान हो रहा है।
अब तक टमाटर 40 फीसदी का नुकसान हो चुका है। कई बीमारियां ने फसल को अपनी चपेट में लिया है। किसान सभा के उपाध्यक्ष देवराज नेगी ने सरकार से नुकसान का उचित मुआवजा देने की मांग की है। उधर, कृषि विभाग के कृषि प्रसार अधिकारी अनिल कुमार ने कहा कि माइट रोग के निदान के लिए मजैस्टिक दवा 50 मिली दो सौ लीटर पानी में मिलाकर छिड़काव करें। जबकि काला धब्बा रोग की रोकथाम के लिए ब्लाईटॉक्स तीन सौ ग्राम दवा को 100 लीटर पानी में मिलाकर स्प्रे कर इसे नियंत्रण हो जाएगा। वहीं, कृषि उप निदेशक कुल्लू राजेंद्र वर्मा ने बताया कि सूखे के कारण यह स्थिति पैदा हो गई है। उन्होंने किसानों को सलाह दी है कि जिन स्थानों पर सिंचाई की व्यवस्था है, वहां पर किसान सिंचाई करें।