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जिले में गोसदन बने न गो सेवा आयोग का गठन
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कुल्लू/खराहल। जिला कुल्लू की सड़कों पर घूम रहे लावारिस पशु सरकार के गो संरक्षण के दावों की पोल खोल रहे हैं। लावारिस मवेशियों को राहत देने के लिए सरकार सिर्फ गोसदन निर्माण की कोरी घोषणा करती है। घोषणा के बाद काम हुआ या नहीं इस पर फिर कोई ध्यान नहीं देता।
प्रदेश में सरकार ने सत्ता संभालते ही गो सेवा आयोग बनाने का दावा किया था। इसमें कहा गया था कि लावारिस पशुओं के लिए गोशालाएं और काउ सेंक्चुरी बनेंगी। लेकिन अभी तक जमीन पर कुछ नजर नहीं आ रहा है। इसका उदाहरण हजारों भटकते लावारिस पशु हैं। उच्च न्यायालय ने वर्ष 2015 में प्रत्येक पंचायत में गोसदन खोलने के लिए सूबे की सरकार को आदेश दिए थे। लेकिन अभी तक इस पर सरकार ने कुछ नहीं किया। सरकार के तमाम दावों के बावजूद सड़कों पर लावारिस पशुओं की संख्या बढ़ रही है। इन पशुओं की संख्या बढ़ने से सड़क पर दुर्घटना का अंदेशा भी बना रहता है। इतना ही नहीं चालकों को वाहन चलाते समय उनको बचाने के लिए कई बार खुद दुर्घटना का शिकार होना पड़ता है। सत्तासीन सरकारें लावारिस पशुओं की समस्या के स्थायी समाधान के लिए कुछ नहीं करतीं हैं। हालत यह है कि जिला कुल्लू में करीब छह हजार गोवंश की संख्या है। सूबे में करीब 24 हजार लावारिस पशु सड़कों पर है। कंपकंपाती ठंड में इनकी हालत काफी खराब है। कई पशु ठंड और भूख के कारण बेमौत मर भी रहे हैं। लेकिन सरकार और प्रशासन को इनकी हालत नहीं दिखाई देती। भूख मिटाने के लिए कई बार लावारिस पशु लोगों के खेतों में घुस रहे हैं। किसान और बागवान भी इन पशुओं के उत्पात से काफी परेशान हैं। जिला कुल्लू के बिजली महादेव में भी दो दर्जन से अधिक लावारिस पशु है। जिला कुल्लू के शहर और गांवों में गोवंश लोगों के लिए मुसीबत बने हुए हैं।
सालभर की मेहतन पल भर में बरबाद
घाटी के अमित, चमन, राजकुमार, रमेश, अशोक ठाकुर, रितेश, नवीन, कर्म चंद, ज्ञान ठाकुर, अनूप, सुशील और देवराज नेगी आदि का कहना है कि सरकार के दावे खोखले ही साबित हो रहे हैं। लावारिस गोवंश के लिए ठोस नीति नहीं बनाई गई है। इस समस्या के समाधान के लिए चुने हुए नुमाइंदे भी चुप्पी साधे हुए हैं। किसानों का कहना है कि साल भर फसल पर की गई मेहनत चंद पलों में मिट्टी में मिल रही है। लोगों ने सरकार से मांग की है कि जल्द जिले में भी काउ सेंक्चुरी और गो सदन बनाए जाए। अन्यथा किसान विवश होकर सड़कों पर उतरेंगे।
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यह है पशु पालन मंत्री का तर्क
पशु पालन मंत्री वीरेंद्र कंवर ने कहा कि गो सेवा आयोग का गठन किया जा रहा है। प्रदेश के कुछ जिलों में सेंक्चुरी और गो सदन भी बनाए हैं। दो वर्षों में सूबे में करीब चार हजार से ज्यादा लावारिस पशुओं को काउ सेंक्चुरी और गोशालाओं में पहुंचा दिया है।
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प्रदेश में सरकार ने सत्ता संभालते ही गो सेवा आयोग बनाने का दावा किया था। इसमें कहा गया था कि लावारिस पशुओं के लिए गोशालाएं और काउ सेंक्चुरी बनेंगी। लेकिन अभी तक जमीन पर कुछ नजर नहीं आ रहा है। इसका उदाहरण हजारों भटकते लावारिस पशु हैं। उच्च न्यायालय ने वर्ष 2015 में प्रत्येक पंचायत में गोसदन खोलने के लिए सूबे की सरकार को आदेश दिए थे। लेकिन अभी तक इस पर सरकार ने कुछ नहीं किया। सरकार के तमाम दावों के बावजूद सड़कों पर लावारिस पशुओं की संख्या बढ़ रही है। इन पशुओं की संख्या बढ़ने से सड़क पर दुर्घटना का अंदेशा भी बना रहता है। इतना ही नहीं चालकों को वाहन चलाते समय उनको बचाने के लिए कई बार खुद दुर्घटना का शिकार होना पड़ता है। सत्तासीन सरकारें लावारिस पशुओं की समस्या के स्थायी समाधान के लिए कुछ नहीं करतीं हैं। हालत यह है कि जिला कुल्लू में करीब छह हजार गोवंश की संख्या है। सूबे में करीब 24 हजार लावारिस पशु सड़कों पर है। कंपकंपाती ठंड में इनकी हालत काफी खराब है। कई पशु ठंड और भूख के कारण बेमौत मर भी रहे हैं। लेकिन सरकार और प्रशासन को इनकी हालत नहीं दिखाई देती। भूख मिटाने के लिए कई बार लावारिस पशु लोगों के खेतों में घुस रहे हैं। किसान और बागवान भी इन पशुओं के उत्पात से काफी परेशान हैं। जिला कुल्लू के बिजली महादेव में भी दो दर्जन से अधिक लावारिस पशु है। जिला कुल्लू के शहर और गांवों में गोवंश लोगों के लिए मुसीबत बने हुए हैं।
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सालभर की मेहतन पल भर में बरबाद
घाटी के अमित, चमन, राजकुमार, रमेश, अशोक ठाकुर, रितेश, नवीन, कर्म चंद, ज्ञान ठाकुर, अनूप, सुशील और देवराज नेगी आदि का कहना है कि सरकार के दावे खोखले ही साबित हो रहे हैं। लावारिस गोवंश के लिए ठोस नीति नहीं बनाई गई है। इस समस्या के समाधान के लिए चुने हुए नुमाइंदे भी चुप्पी साधे हुए हैं। किसानों का कहना है कि साल भर फसल पर की गई मेहनत चंद पलों में मिट्टी में मिल रही है। लोगों ने सरकार से मांग की है कि जल्द जिले में भी काउ सेंक्चुरी और गो सदन बनाए जाए। अन्यथा किसान विवश होकर सड़कों पर उतरेंगे।
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यह है पशु पालन मंत्री का तर्क
पशु पालन मंत्री वीरेंद्र कंवर ने कहा कि गो सेवा आयोग का गठन किया जा रहा है। प्रदेश के कुछ जिलों में सेंक्चुरी और गो सदन भी बनाए हैं। दो वर्षों में सूबे में करीब चार हजार से ज्यादा लावारिस पशुओं को काउ सेंक्चुरी और गोशालाओं में पहुंचा दिया है।