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Kullu News: बंपर पैदावार, गिरे सेब के दाम, नहीं मिल रहा मेहनत का इनाम
Sat, 23 Aug 2025 10:50 PM IST
शिमला ब्यूरो
संवाद न्यूज एजेंसी, कुल्लू
संवाद न्यूज एजेंसी, कुल्लू
Updated Sat, 23 Aug 2025 10:50 PM IST
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सेब के दामों में आई 30 फीसदी तक गिरावट, बागवानों के चेहरों पर छाई मायूसी
व्यापारियों की कमी, सड़क पर जाम और घटती मांग ने और बिगाड़ दिए हालात
सेब का रंग भी पड़ने लगा काला, समय पर तुड़ान न होने से हो रही ड्रॉपिंग
संवाद न्यूज एजेंसी
मनाली। इस बार बंपर फसल ने राहत नहीं, बल्कि चिंता बढ़ा दी है। ऊझी घाटी और आसपास के इलाकों में सेब की पैदावार तो खूब हुई लेकिन दामों में जबरदस्त गिरावट ने बागवानों की उम्मीदों पर पानी फेर दिया है।
व्यापारियों की कमी, सड़क पर लगातार लग रहे जाम और घटती मांग ने हालात और बिगाड़ दिए हैं। नतीजतन, घाटी के बागवान बैकफुट पर आ गए हैं और उनकी मेहनत के अच्छे दाम मिलना मुश्किल हो गया है।
पिछले साल की तुलना में इस बार सेब के दामों में 20 से 30 प्रतिशत की कमी देखी जा रही है। कुल्लू-मंडी सड़क पर जाम से स्थानीय मंडियों में व्यापारियों की संख्या कम है। बंपर फसल होने से सेब के दामों में उछाल नहीं आ रहा है।
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अत्यधिक बारिश के कारण सेब की गुणवत्ता भी प्रभावित हुई है। सेब काला पड़ गया है। समय पर तुड़ान न होने से ड्रॉपिंग भी होने लगी है। उस पर देश और प्रदेश की मंडियों में सेब के दामों में उछाल नहीं आ रहा। पिछले साल दिल्ली और गुजरात की मंडियों में 10 से 12 किलो की पैकिंग वाले कार्टन के दाम 900 से 1,100 मिले थे। इस साल 20 से 25 किलो की पैकिंग 1,000 से 1,200 रुपये में ही बिक रही है।
स्थानीय मंडियों में भी यही हाल है। पिछले साल स्थानीय मंडियों में सेब की कीमत 70 से 80 रुपये थी। इस साल सेब 50 से 55 रुपये किलो बिक रहा है। आढ़तियों का कहना है कि मंडी से कुल्लू तक सड़क की हालत से बागवान परेशान है।
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देश की मंडियों में घटी मांग : कुंज लाल
आढ़ती एसोसिएशन के प्रधान कुंज लाल ने बताया कि देश की मंडियों में सेब की मांग कम है। जाम लगने से समय पर सेब मंडियों तक नहीं पहुंच रहा। इससे दाम नहीं बढ़ पा रहे हैं। बागवान आकाश ने बताया कि पिछले साल की तुलना इस बार सेब की कीमत में भारी कमी आई है। उनका अधिकतर सेब दिल्ली और गुजरात जाता है। 20 से 25 किलो की पैकिंग का कार्टन 1,000 रुपये तक बिक रहा है। पिछले साल इसके दाम 1,500 से 1,800 रुपये मिले थे।
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व्यापारियों की कमी, सड़क पर जाम और घटती मांग ने और बिगाड़ दिए हालात
सेब का रंग भी पड़ने लगा काला, समय पर तुड़ान न होने से हो रही ड्रॉपिंग
संवाद न्यूज एजेंसी
मनाली। इस बार बंपर फसल ने राहत नहीं, बल्कि चिंता बढ़ा दी है। ऊझी घाटी और आसपास के इलाकों में सेब की पैदावार तो खूब हुई लेकिन दामों में जबरदस्त गिरावट ने बागवानों की उम्मीदों पर पानी फेर दिया है।
व्यापारियों की कमी, सड़क पर लगातार लग रहे जाम और घटती मांग ने हालात और बिगाड़ दिए हैं। नतीजतन, घाटी के बागवान बैकफुट पर आ गए हैं और उनकी मेहनत के अच्छे दाम मिलना मुश्किल हो गया है।
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पिछले साल की तुलना में इस बार सेब के दामों में 20 से 30 प्रतिशत की कमी देखी जा रही है। कुल्लू-मंडी सड़क पर जाम से स्थानीय मंडियों में व्यापारियों की संख्या कम है। बंपर फसल होने से सेब के दामों में उछाल नहीं आ रहा है।
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अत्यधिक बारिश के कारण सेब की गुणवत्ता भी प्रभावित हुई है। सेब काला पड़ गया है। समय पर तुड़ान न होने से ड्रॉपिंग भी होने लगी है। उस पर देश और प्रदेश की मंडियों में सेब के दामों में उछाल नहीं आ रहा। पिछले साल दिल्ली और गुजरात की मंडियों में 10 से 12 किलो की पैकिंग वाले कार्टन के दाम 900 से 1,100 मिले थे। इस साल 20 से 25 किलो की पैकिंग 1,000 से 1,200 रुपये में ही बिक रही है।
स्थानीय मंडियों में भी यही हाल है। पिछले साल स्थानीय मंडियों में सेब की कीमत 70 से 80 रुपये थी। इस साल सेब 50 से 55 रुपये किलो बिक रहा है। आढ़तियों का कहना है कि मंडी से कुल्लू तक सड़क की हालत से बागवान परेशान है।
देश की मंडियों में घटी मांग : कुंज लाल
आढ़ती एसोसिएशन के प्रधान कुंज लाल ने बताया कि देश की मंडियों में सेब की मांग कम है। जाम लगने से समय पर सेब मंडियों तक नहीं पहुंच रहा। इससे दाम नहीं बढ़ पा रहे हैं। बागवान आकाश ने बताया कि पिछले साल की तुलना इस बार सेब की कीमत में भारी कमी आई है। उनका अधिकतर सेब दिल्ली और गुजरात जाता है। 20 से 25 किलो की पैकिंग का कार्टन 1,000 रुपये तक बिक रहा है। पिछले साल इसके दाम 1,500 से 1,800 रुपये मिले थे।