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अब आ गई बूढ़ी नागिन के दर्शन की घड़ी
कुल्लू/ब्यूरो
Updated Mon, 08 Apr 2013 01:38 PM IST
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जलोड़ी दर्रे के दोनों ओर फैली सराज घाटी के हजारों लोगों की अधिष्ठात्री माता बूढ़ी नागिन जल्द ही अपने भक्तों को दर्शन देने वाली हैं। अपनी अधिष्ठात्री के दर्शन को आतुर भक्तों का पांच माह का लंबा इंतजार वैशाख संक्रांति यानि 14 अप्रैल को खत्म हो जाएगा।
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लगभग ग्यारह हजार फुट की ऊंचाई पर सरयोलसर झील के किनारे स्थित माता बूढ़ी नागिन मंदिर के कपाट 14 अप्रैल को देव विधि से खोले जाएंगे। इसी के साथ यह मंदिर आम लोगों के लिए खुल जाएगा।
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पिछले वर्ष 15 नवंबर को बंद हुए माता बूढ़ी नागिन मंदिर के कपाटों को खोलने के लिए मंदिर कमेटी ने तैयारियां शुरू कर दी हैं। अब माता के भक्त 15 नवंबर तक दर्शन कर सकेंगे।
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मंदिर कमेटी के प्रधान एवं माता के कारदार भागे राम राणा ने इसकी पुष्टि की है। उन्होंने बताया कि माता की पवित्र एवं धार्मिक स्थली सरयोलसर में बर्फ अब लगभग पूरी तरह से पिघल गई है। ऐसे में माता के देवालय को लोगों के दर्शनार्थ के लिए खोलने का निर्णय लिया गया है।
माता की पूजा-अर्चना भी नियमित रूप से होगी। जिले के इस ऐतिहासिक धार्मिक स्थल पर माता के दर्शन के लिए सालाना हजारों की संख्या में भक्त आते हैं।
खास है कि भक्तों द्वारा माता को रखी मन्नत के पूरा होने पर श्रद्धालु माता की पवित्र झील के चारों ओर देसी घी की धार से फेरी देते हैं। यहां पर वैशाख, ज्येष्ठ तथा आषाढ़ संक्रांति में दूर दराज से हजारों की संख्या में भक्त आकर शाही स्नान कर पुण्य कमाते हैं।
माता के कारदार भागे राम राणा ने बताया कि सर्दियों के दिनों 10-15 फुट बर्फ गिरती आई है और ऐसे में खतरा के चलते मंदिर कमेटी हर साल 15 नवंबर से अप्रैल तक माता के कपाट को बंद करती है।
माता बूढ़ी नागिन सरयोलसर आनी के कारदार भागे राम राणा ने कहा कि माता की स्थली सरयोलसर में बर्फ पिघल गई है। माता के कपाट को बैसाख संक्रांति के मौके पर आम लोगों के दर्शन के लिए खोला जाएगा। माता की पूर्जा-अर्चना भी अब नियमित रूप से चलेगी।