500 बीघा भूमि बंजर होने की कगार पर
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बंजार उपमंडल की सैंज घाटी के शैंशर और देउरीधार पंचायत की करीब 500 बीघा भूमि बंजर होने को है। सात किलोमीटर लंबी चोटाला से जाड़ा सिंचाई कूहल की हालत बेहद खस्ता है। करीब दो किलोमीटर तक कूहल का नामोंनिशान मिट सा गया है। ऐसे मेें कूहल में बीते दस साल से खेत खलियान बारिश पर ही निर्भर हैं। इन दिनों जिला कुल्लू में भारी सूखा पड़ने से घाटी में 50 फीसदी जौ व गेहूं की बिजाई नहीं हो पा रही है। इसका असर सैंज की शैंशर और देउरीधार पंचायतों में भी पड़ा है और घाटी में सूखे से लहसुन की निराई का काम भी ठप पड़ गया है। वहीं, बागवान सेब के बगीचों में तौलियां भी नहीं बना पा रहे हैं।
घाटीवासी राम लाल, मीराबाई, लता देवी, मालती देवी, शेर सिंह, गिरधारी लाल, आलम चंद, ध्यान सिंह ठाकुर, छापे राम, राज कुमार, पूर्व बीडीसी प्रेम सोनी, पवन कुमार और केशव राम ने कहा कि दस सालों से इस कूहल पर पानी की एक भी बूंद नहीं आ रही है। सात किलोमीटर बनी इस सिंचाई कूहल का करीब दो किलोमीटर भाग पूरी तरह से क्षतिग्रस्त हो गया है। भूस्खलन से जगह-जगह से कूहल खराब हालत में है। इस साल पड़े भारी सूखे से वह रबी की फसल व नकदी फसलों की पैदावार को लेकर चिंतित हैं। कूहल की हालात ठीक होती तो किसान-बागवानों को सूखे की मार नहीं झेलनी पड़ती। शैंशर पंचायत के प्रधान नरेश कुमार तथा तुलसी राम ने कहा कि कूहल की मरम्मत के लिए पंचायत की ओर से प्रस्ताव भी भेजा गया है। लेकिन कोई भी सुनवाई नहीं हो रही है। उधर, आईपीएच भुंतर के अधिशाषी अभियंता बीके गुप्ता ने कहा कि सिंचाई कूहलों की मरम्मत कृषि विकास मंच करता है।