कुल्लू में सूखे से सेब फसल पर संकट
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कुल्लू जिला में पर्याप्त मानसून नहीं पहुंचने के कारण तमाम फसलों को नुकसान हो रहा है। हालांकि अन्य जिलों में बारिश कुल्लू की तुलना में काफी ज्यादा हो चुकी है। वहीं जिले में बारिश नहीं होने से अब नकदी फसलों के अलावा सेब की फसल पर भी प्रतिकूल असर होने लगा है। जुलाई माह भी आधा बीतने लगा है। वहीं बारिश अभी पर्याप्त ही हुई है। ऐसे में बगीचों में नमी के अभाव के चलते सेब के आकार, रंग और गुणवत्ता पर नकारात्मक प्रभाव पड़ने लगा है। इस सप्ताह भी बारिश नहीं हुई तो नुकसान और ज्यादा होने की आशंका जाहिर की जा रही है। बागवानों का कहना है कि पहले ही ओलावृष्टि के कारण फसल को नुकसान हो चुका हैै।
अब सूखे के चलते सेब फसल को नुकसान होने लगा है। घाटी के बागवान अमित, सुरेश, अशोक ठाकुर, सुनू राम, अखिल राणा, चमन, युवराज, चुनी लाल, महेश शर्मा, कैलाश ठाकुर, नीतिश, बुुद्धि प्रकाश, देवराज और ज्ञान ठाकुर आदि ने कहा कि तीन माह से बारिश पर्याप्त नहीं हुई है। हालांकि बूंदाबांदी तो हुई है लेकिन बगीचों में नमी बनाने में कामयाब नहीं हो सकी है। ऐसे में बगीचों में नमी न होने से सेब के आकार रंग और गुणवत्ता पर प्रतिकूल असर होने लगा है। गत वर्ष मानसून समय पर पहुंचने से तमाम फसलों को लाभ हुआ था। किसान सभा के उपाध्यक्ष देवराज ने नेगी ने सरकार से सूखे से हुए नुकसान का मुआवजा देने की मांग की है।
उन्होंने कहा कि अब तक नकदी फसल टमाटर को 35 फीसदी का नुकसान हो चुका है। अब सेब फसल पर भी इसका असर होना शुरू हो गया है। इस संबंध में बागवानी अनुसंधान केंद्र बजौरा के सह निदेशक डॉ. जयंत कुमार के अनुसार सूखे के कारण सेब की फसल को नुकसान होने लगा है। समय रहते बारिश नहीं हुई तो आकार, रंग और गुणवत्ता पर प्रतिकूल प्रभाव हो सकता है। लिहाजा बागवानों को जिन क्षेत्र में सिंचाई की व्यवस्था है, सिंचाई करनी चाहिए।