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Kullu News: ओलावृष्टि के साथ सेब फसल को पहुंचेगा नुकसान
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फाल्गुन संक्रांति में देवता खुडीजल के देव तुआर में देव परंपरा को निभाते कारकून। स्त्रोत देवलू।
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कुल्लू। फाल्गुन संक्रांति को लेकर जिला कुल्लू का माहौल देवमयी रहा। देवालयों में धार्मिक आयोजन हुए। जिलेभर के देवी-देवताओं के मंदिरों में श्रद्धालुओं की भीड़ उमड़ी। मंगलवार को देवता खुडीजल के देवालय देहुरी में भी देव परंपराओं को निभाया गया।
फाल्गुन संक्रांति में देव तुआर पर्व मनाया गया। देवता खुडीजल में अपने देवालय में सालभर की भविष्यवाणी की। इसे सुनने के लिए रघुपुरघाटी के साथ-साथ लगते मंडी जिले के लोग भी शामिल हुए। देवता ने गूर के माध्यम से भविष्यवाणी की कि 2024 में ओलावृष्टि अधिक होगी और नदी-नालों में बाढ़ जैसे हालात रहेंगे।
इसका असर सेब के साथ अन्य फलों और रबी की फसल पर पड़ेगा। इसके अलावा देश और प्रदेश में राजनीति भी गर्माएगी और कई तरह की बीमारियों का प्रकोप रहेगा।
देवता के कारदार शेर सिंह, गूर चमन लाल शर्मा और पुजारी रूप लाल शर्मा ने कहा कि देवता खुडीजल का देव तुआर पर्व फाल्गुन संक्रांति को मनाया जाता है। इससे पहले ढोल नगाड़ों, नरसिंगों और करनाल की स्वरलहरियों से पूरी रघुपुरघाटी गूंज उठी। देवता के मंदिर के साथ लगते बरहाबील नामक जगह पर धार्मिक परंपराओं का निर्वहन किया गया।
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स्वर्ग प्रवास से लौटे 200 देवी-देवता
कुल्लू। पौष एवं माघ माह में स्वर्ग प्रवास पर गए जिले के करीब 200 देवी-देवता फाल्गुन संक्रांति को लौट आए हैं। इस दौरान देवी-देवताओं के कपाट भी खोले गए। अपने आराध्य देवता के स्वर्ग प्रवास से लौटने तथा कपाट खुलने पर कई जगह देवी-देवताओं के रथ को देवालय से बाहर निकाला गया।
जिला देवी-देवता कारदार संघ के अध्यक्ष दोत राम ठाकुर ने कहा कि स्वर्ग प्रवास पर गए जिले के करीब 200 देवी-देवता लौट आए हैं। अब देव कारज के साथ मेलों का भी आयोजन होगा।
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फाल्गुन संक्रांति में देव तुआर पर्व मनाया गया। देवता खुडीजल में अपने देवालय में सालभर की भविष्यवाणी की। इसे सुनने के लिए रघुपुरघाटी के साथ-साथ लगते मंडी जिले के लोग भी शामिल हुए। देवता ने गूर के माध्यम से भविष्यवाणी की कि 2024 में ओलावृष्टि अधिक होगी और नदी-नालों में बाढ़ जैसे हालात रहेंगे।
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इसका असर सेब के साथ अन्य फलों और रबी की फसल पर पड़ेगा। इसके अलावा देश और प्रदेश में राजनीति भी गर्माएगी और कई तरह की बीमारियों का प्रकोप रहेगा।
देवता के कारदार शेर सिंह, गूर चमन लाल शर्मा और पुजारी रूप लाल शर्मा ने कहा कि देवता खुडीजल का देव तुआर पर्व फाल्गुन संक्रांति को मनाया जाता है। इससे पहले ढोल नगाड़ों, नरसिंगों और करनाल की स्वरलहरियों से पूरी रघुपुरघाटी गूंज उठी। देवता के मंदिर के साथ लगते बरहाबील नामक जगह पर धार्मिक परंपराओं का निर्वहन किया गया।
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स्वर्ग प्रवास से लौटे 200 देवी-देवता
कुल्लू। पौष एवं माघ माह में स्वर्ग प्रवास पर गए जिले के करीब 200 देवी-देवता फाल्गुन संक्रांति को लौट आए हैं। इस दौरान देवी-देवताओं के कपाट भी खोले गए। अपने आराध्य देवता के स्वर्ग प्रवास से लौटने तथा कपाट खुलने पर कई जगह देवी-देवताओं के रथ को देवालय से बाहर निकाला गया।
जिला देवी-देवता कारदार संघ के अध्यक्ष दोत राम ठाकुर ने कहा कि स्वर्ग प्रवास पर गए जिले के करीब 200 देवी-देवता लौट आए हैं। अब देव कारज के साथ मेलों का भी आयोजन होगा।