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Kullu News: 50 सालों बाद दशहरा में पहुंचे खूरजकोट महादेव
Fri, 03 Oct 2025 10:57 PM IST
शिमला ब्यूरो
संवाद न्यूज एजेंसी, कुल्लू
संवाद न्यूज एजेंसी, कुल्लू
Updated Fri, 03 Oct 2025 10:57 PM IST
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अस्थायी शिविर में पधरू गांव के देवता खूरजकोट महादेव। संवाद
अपने क्षेत्र में फसलों की रक्षा करते हैं देवता
ढालपुर स्थित अस्थायी शिविर में जमाया डेरा
संवाद न्यूज एजेंसी
कुल्लू। कराड़सू पंचायत के तहत आने वालेे गांव पधरू के देवता खूरजकोट महादेव दशहरा में 50 सालों के बाद शामिल हुए हैं। दशहरा में शामिल होने के देवता खूरजकोट महादेव ने ढालपुर स्थित अस्थायी शिविर में डेरा जमा लिया है। देवता कुल्लू दशहरा में करीब 50 सालों पहले आखिरी बार शामिल हुए थे।
उस समय देवता को दशहरा में आने का बाकायदा निमंत्रण भी मिला था। इसके बाद देवता दशहरा में शामिल नहीं हुए। देवता ने इस दशहरा में शामिल होने की इच्छा जताई थी। देवलू देवता खूरजकोट महादेव के साथ रघुनाथपुर पहुंचे। यहां भगवान रघुनाथ के साथ देवमिलन के बाद देवता अस्थायी शिविर में विराजमान। मान्यता है कि देवता महादेव का रूप हैं। अपने क्षेत्र में फसलों की रक्षा करते हैं। लोगाें में देवता के प्रति काफी अधिक मान्यता है। देवता खूरजकोट महादेव के साल में दो मुख्य पर्व होते हैं। कौना विरशु बैसाख माह की एक और दो प्रविष्टे को होता है। इसमें देव परंपरा का निर्वहन करते हैं। शाउण मेला भी सावन माह की एक और दो प्रविष्टे को होता है। शिवरात्रि और खीर भी देवता के मुख्य आयोजन है। देवता खूरजकोट महादेव के कारदार तुले राम ने कहा कि देवता की काफी अधिक मान्यता है। देवता के दशहरा में शामिल होने को लेकर हारियानों में खुशी का माहौल है। देवता सात दिनों तक अस्थायी शिविर में रहकर देव परंपरा का निर्वहन करेंगे। लंका दहन के दिन देवता देवलुओं के साथ अपने देवालय लौट जाएंगे।
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ढालपुर स्थित अस्थायी शिविर में जमाया डेरा
संवाद न्यूज एजेंसी
कुल्लू। कराड़सू पंचायत के तहत आने वालेे गांव पधरू के देवता खूरजकोट महादेव दशहरा में 50 सालों के बाद शामिल हुए हैं। दशहरा में शामिल होने के देवता खूरजकोट महादेव ने ढालपुर स्थित अस्थायी शिविर में डेरा जमा लिया है। देवता कुल्लू दशहरा में करीब 50 सालों पहले आखिरी बार शामिल हुए थे।
उस समय देवता को दशहरा में आने का बाकायदा निमंत्रण भी मिला था। इसके बाद देवता दशहरा में शामिल नहीं हुए। देवता ने इस दशहरा में शामिल होने की इच्छा जताई थी। देवलू देवता खूरजकोट महादेव के साथ रघुनाथपुर पहुंचे। यहां भगवान रघुनाथ के साथ देवमिलन के बाद देवता अस्थायी शिविर में विराजमान। मान्यता है कि देवता महादेव का रूप हैं। अपने क्षेत्र में फसलों की रक्षा करते हैं। लोगाें में देवता के प्रति काफी अधिक मान्यता है। देवता खूरजकोट महादेव के साल में दो मुख्य पर्व होते हैं। कौना विरशु बैसाख माह की एक और दो प्रविष्टे को होता है। इसमें देव परंपरा का निर्वहन करते हैं। शाउण मेला भी सावन माह की एक और दो प्रविष्टे को होता है। शिवरात्रि और खीर भी देवता के मुख्य आयोजन है। देवता खूरजकोट महादेव के कारदार तुले राम ने कहा कि देवता की काफी अधिक मान्यता है। देवता के दशहरा में शामिल होने को लेकर हारियानों में खुशी का माहौल है। देवता सात दिनों तक अस्थायी शिविर में रहकर देव परंपरा का निर्वहन करेंगे। लंका दहन के दिन देवता देवलुओं के साथ अपने देवालय लौट जाएंगे।
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