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Kullu News: कंढी फागली उत्सव में दिखी पुरातन संस्कृति की झलक
Thu, 15 Jan 2026 10:15 PM IST
शिमला ब्यूरो
संवाद न्यूज एजेंसी, कुल्लू
संवाद न्यूज एजेंसी, कुल्लू
Updated Thu, 15 Jan 2026 10:15 PM IST
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मुखौटाधारियों ने नचाया किया परंपरागत नृत्य
संवाद न्यूज एजेंसी
बंजार (कुल्लू)। पलदी घाटी के कंढी गांव में मनाए गए फागी उत्सव में पुरातन संस्कृति की झलक देखने को मिली। इस दौरान देव समाज से जुड़े लोगों ने मुखौटा नृत्य किया। देव और दैत्य के बीच युद्ध का प्रदर्शन भी किया।
दरअसल, मकर संक्रांति के दूसरे दिन सराज घाटी के कंढी गांव में एक भव्य आयोजन हुआ। इसमें आसपास के गांवों से देव-दैत्य के प्रतीक मुखौटे पहुंचाए गए। देवता करथा नाग के प्रांगण में सैकड़ों मुखौटा धारियों ने एकसाथ नृत्य कर वातावरण को रोमांचित कर दिया। ढोल-नगाड़ों की थाप पर मुखौटा धारियों का यह नृत्य देखने के लिए दूर-दूर से श्रद्धालु पहुंचे। इस दौरान मुखौटा धारियों के साथ लोग भी झूमते नजर आए। कार्यक्रम के अंत में परंपरा के अनुसार देव और दैत्यों के मिलन व आपसी समझौते का दृश्य प्रस्तुत किया गया। यह आपसी सौहार्द, सह-अस्तित्व और संतुलन का प्रतीक माना जाता है। देव बड़ा छमाहूं के पुजारी धनेश गौतम ने बताया कि सराज घाटी का फागली उत्सव देव-दैत्य युद्ध से जुड़ा है। मान्यता के अनुसार प्राचीन काल में देवताओं और दैत्यों के बीच भीषण युद्ध हुआ था। इसमें दैत्यों को पराजित किया गया था। इसे स्मृतियों में जिंदा रखने के लिए इस दृश्य को फागली उत्सव के दौरान दोहराया जाता है।
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संवाद न्यूज एजेंसी
बंजार (कुल्लू)। पलदी घाटी के कंढी गांव में मनाए गए फागी उत्सव में पुरातन संस्कृति की झलक देखने को मिली। इस दौरान देव समाज से जुड़े लोगों ने मुखौटा नृत्य किया। देव और दैत्य के बीच युद्ध का प्रदर्शन भी किया।
दरअसल, मकर संक्रांति के दूसरे दिन सराज घाटी के कंढी गांव में एक भव्य आयोजन हुआ। इसमें आसपास के गांवों से देव-दैत्य के प्रतीक मुखौटे पहुंचाए गए। देवता करथा नाग के प्रांगण में सैकड़ों मुखौटा धारियों ने एकसाथ नृत्य कर वातावरण को रोमांचित कर दिया। ढोल-नगाड़ों की थाप पर मुखौटा धारियों का यह नृत्य देखने के लिए दूर-दूर से श्रद्धालु पहुंचे। इस दौरान मुखौटा धारियों के साथ लोग भी झूमते नजर आए। कार्यक्रम के अंत में परंपरा के अनुसार देव और दैत्यों के मिलन व आपसी समझौते का दृश्य प्रस्तुत किया गया। यह आपसी सौहार्द, सह-अस्तित्व और संतुलन का प्रतीक माना जाता है। देव बड़ा छमाहूं के पुजारी धनेश गौतम ने बताया कि सराज घाटी का फागली उत्सव देव-दैत्य युद्ध से जुड़ा है। मान्यता के अनुसार प्राचीन काल में देवताओं और दैत्यों के बीच भीषण युद्ध हुआ था। इसमें दैत्यों को पराजित किया गया था। इसे स्मृतियों में जिंदा रखने के लिए इस दृश्य को फागली उत्सव के दौरान दोहराया जाता है।
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