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Kullu News: जापानी फल की बहार...बगीचों तक पहुंचा कारोबार

Sun, 13 Sep 2026 05:27 AM IST
Shimla Bureau शिमला ब्यूरो
Updated Sun, 13 Sep 2026 05:27 AM IST
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A bountiful season for Japanese fruit... the trade has reached the orchards.
कुल्लू घाटी में नेट से ढ़का जापानी फल का पेड़। संवाद
खराहल (कुल्लू)। जापानी फल दूसरे राज्यों के व्यापारियों को खूब पसंद आ रहा है। जापानी फल तैयार हो गया है और कुछ क्षेत्रों से मंडियों में भी पहुंचना शुरू हो गया है। वहीं, जिले के विभिन्न इलाकों में करीब 50 फीसदी जापानी फल का सौदा व्यापारियों ने बगीचे में ही कर दिया है। यूपी, पंजाब और स्थानीय व्यापारी बागवानों के घर-द्वार पहुंच कर जापानी फल के बगीचे खरीद रहे हैं। बागवानों को भी अच्छे दाम मिल रहे हैं।
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जिला कुल्लू के निचले क्षेत्रों में पिछले सात सालों से जापानी फल भी बड़े स्तर पैदा हो रहा है। जिले में करीब 216 हेक्टेयर भूमि पर जापानी फल का उत्पादन हो रहा है। कुलमिलाकर इसकी पैदावार करीब 702 टन है। बताया जा रहा है कि व्यापारी सबसे ज्यादा फूयू किस्म के फल को खरीदने में तरजीह दे रहे हैं। इस वैरायटी के फल के दाम सब्जी मंडियों में बेहतर मिल रहे हैं। व्यापारी सनी, राज भटिया और दिलीप ठाकुर ने बताया कि उन्होंने जिले के विभिन्न इलाकों में जापानी फल के कई बगीचे खरीदे हैं। इसके अलावा दूसरे राज्यों के कई व्यापारियों ने भी जापानी फल की खरीद बगीचों में ही की है।
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बागवानों अनूप भंडारी, राम नाथ, केहर सिंह, अनिश ठाकुर और मुनीष ने कहा कि यूपी, बिहार और पंजाब सहित लोकल व्यापारियों ने यहां दस्तक दी है और जापानी फलों को खरीद कर रहे हैं। इससे बागवानों को अच्छे दाम घर-द्धार पर मिल रहे हैं। कई सीधे बगीचों की बोली लगा रहे हैं तो कई 1200 से 1500 रुपये के हिसाब से क्रेट की खरीद कर रहे हैं।
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जिला कुल्लू की आवोहवा जापानी फल के लिए उपयुक्त है। जापानी फल समुद्र तल से 1000 से 1650 मीटर तक की ऊंचाई पर आसानी से उगाया जा सकता है। जापानी फल की फूयू, हैचिया, हयाक्यूम और कंडाघाट आदि किस्में हैं लेकिन फूयू किस्म की बाजार में अधिक मांग रहती है। लिहाजा, बागवान इसका अधिक उत्पादन कर रहे है। ---डॉं. भूपेंद्र ठाकुर, सहनिदेशक बागवानी अनुसंधान केंद्र बजौरा
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