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पैंतीस वर्ष बाद भी सिंचाई नहर अधूरी
Kullu
Updated Tue, 28 Oct 2014 05:33 AM IST
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उदयपुर (लाहौल-स्पीति)। ओथंग-यंगथंग गांव के लोगाें के सपने आखिर कब साकार होंगे? पांच सौ हेक्टेयर जमीन को सिंचित करने वाली नहर पैंतीस वर्ष बाद भी धरातल पर नहीं उतरी है। सरकारी धन इस पर पानी की तरह बह गया, लेकिन वहां के किसान-बागवानों को आईपीएच के अधीन ओथंग-यंगथंग नहर से पानी नसीब नहीं हो रहा है। लाहौल की जाहलमा पंचायत के तहत ओथंग-यंगथंग नहर स्थानीय लोगों का सपना बनकर रह गई है। इस नहर का निर्माण कार्य वर्ष 1979 में शुरू हुआ था। करीब सात किलोमीटर लंबी इस नहर के बनने से ओथंग-यंगथंग सहित लोमच तथा पिवोक गांवों की पांच सौ हेक्टेयर जमीन सिंचित होगी। ग्रामीणों के मुताबिक इस क्षेत्र के लोगों के पास सिंचाई के लिए पर्याप्त पानी उपलब्ध नहीं है। नहर बनने से आलू, मटर, गोभी, कुठ, मनु, और तिहलन दालों को भरपूर पानी उपलब्ध हो सकेगा। ग्रामीण राजेंद्र कुमार, टशी फुचोग और सुनील कुमार का कहना है कि इस नहर का लाभ लेने के लिए ग्रामीण आईपीएच विभाग के चक्कर काटते रहे। मामला सीएम तक भी पहुंचा। उन्होंने कहा कि करोड़ों रुपये फूंकने के बाद पांच छह वर्ष पूर्व कुछ समय के लिए पानी तो चालू किया गया था, लेकिन कुछ समय बाद ही नहर में दिक्कत आने से पानी की सप्लाई बंद कर दी गई। जाहलमा पंचायत के पूर्व उप प्रधान वीर सिंह ने कहा कि 35 वर्ष बाद भी इतना धन खर्च करने के बाद इन गांवों के लिए सिंचाई को पानी उपलब्ध न करवा पाना हैरत भरा है। उधर, आईपीएच के अधिशासी अभियंता एसके जसवाल ने कहा कि नहर की मरम्मत के लिए 70 लाख की राशि मंजूर है। टेंडर कॉल किए जा रहे हैं तथा आगामी वर्ष तक नहर की रिपेयरिंग का कार्य युद्ध स्तर पर शुरू कर दिया जाएगा।
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