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पॉवर टिलर पर 80 लाख का अनुदान लटका
Kullu
Updated Mon, 20 Oct 2014 05:32 AM IST
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उदयपुर (लाहौल स्पीति)। लाहौल घाटी के किसानों और बागवानों के हाईटेक बनने की योजना पर सब्सिडी भारी पड़ रही है। आधुनिक कृषि यंत्र की खरीद पर उन्हें अनुदान के लिए सरकारी कार्यालय के चक्कर काटने पड़ रहे हैं। अनुदान के लिए बजट का प्रावधान नहीं होने से सैकड़ों किसानों और बागवानों को मिलने वाला अनुदान फाइलों में भी धूल फांक रहा है।
पिछले कुछ सालों से किसान आधुनिक कृषि यंत्र पॉवर टिलर से खेती करने लगे हैं, जिस पर सरकार ने 50 फीसदी अनुदान का प्रावधान किया है। लेकिन, वर्ष 2014-2015 में 190 किसानों और बागवानों ने पॉवर टिलर तो ले लिया, लेकिन अनुदान राशि के लिए अब कार्यालय के चक्कर काटने को मजबूर हैं। विभागीय अधिकारियों के मुताबिक 190 किसानों के पॉवर टिलर के लिए 80 लाख का अनुदान लटका पड़ा है। सरकार ने पॉवर स्प्रे मशीन आदि पर मिलने वाली राशि को ही खत्म कर दिया है, जिससे किसानों को झटका लगा है। किसान देवी सिंह, राम चंद, विशन दास, भाग सिंह और रामानंद का कहना है कि लाहौल घाटी के लोगों का जीवन खेती पर ही निर्भर है। समय की बचत को देखते हुए आधुनिक यंत्र पॉवर टिलर खरीदने के बाद भी लोगों को अनुदान नहीं मिल रहा है।
बागवानी विभाग की उपनिदेशक डॉ. सुमन ने 190 किसानों के पॉवर टिलर पर 80 लाख रुपयों की अनुदान राशि लटकने की पुष्टि की है। उन्होंने कहा कि इस संबंध में विभाग के उच्च अधिकारियों को अवगत करवा दिया गया है।
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पिछले कुछ सालों से किसान आधुनिक कृषि यंत्र पॉवर टिलर से खेती करने लगे हैं, जिस पर सरकार ने 50 फीसदी अनुदान का प्रावधान किया है। लेकिन, वर्ष 2014-2015 में 190 किसानों और बागवानों ने पॉवर टिलर तो ले लिया, लेकिन अनुदान राशि के लिए अब कार्यालय के चक्कर काटने को मजबूर हैं। विभागीय अधिकारियों के मुताबिक 190 किसानों के पॉवर टिलर के लिए 80 लाख का अनुदान लटका पड़ा है। सरकार ने पॉवर स्प्रे मशीन आदि पर मिलने वाली राशि को ही खत्म कर दिया है, जिससे किसानों को झटका लगा है। किसान देवी सिंह, राम चंद, विशन दास, भाग सिंह और रामानंद का कहना है कि लाहौल घाटी के लोगों का जीवन खेती पर ही निर्भर है। समय की बचत को देखते हुए आधुनिक यंत्र पॉवर टिलर खरीदने के बाद भी लोगों को अनुदान नहीं मिल रहा है।
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बागवानी विभाग की उपनिदेशक डॉ. सुमन ने 190 किसानों के पॉवर टिलर पर 80 लाख रुपयों की अनुदान राशि लटकने की पुष्टि की है। उन्होंने कहा कि इस संबंध में विभाग के उच्च अधिकारियों को अवगत करवा दिया गया है।
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