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चालीस लाख डकारने वाली संस्था पर हो सकता है केस
Kullu
Updated Sat, 18 Oct 2014 05:33 AM IST
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पतलीकूहल (कुल्लू)। विश्व-विख्यात पर्यटन नगरी मनाली के प्रमुख दर्शनीय स्थल नग्गर में ईको टूरिज्म के नाम पर साठ लाख का गोलमाल एक संस्था को भारी पड़ सकता है। इस संस्था के खिलाफ डीआरडीए ने शिकंजा कसने की तैयारी कर ली है। संस्था द्वारा किए गए इस बड़े गड़बड़झाले को सरकारी धन के गबन के रूप में देखा जा रहा है।
इस संस्था के खिलाफ ग्रामीणों की ओर से की गई शिकायतों पर सिलसिलेवार गौर किया जा रहा है। डीआरडीए के प्रोजेक्ट ऑफिसर की मानें तो संस्था पर जल्द शिकंजा कस सकता है। विभाग भी हैरान है कि आखिर उक्त संस्था ने धरोहर गांव नग्गर में ईको टूरिज्म विकसित करने को साठ लाख रुपये की राशि से ऐसा कौन सा बड़ा तीर मारा है। प्रोजेक्टर ऑफिसर अंकुश शर्मा का कहना है कि वह डीसी के अधीन काम करते हैं। लिहाजा, डीसी के आदेशों का इंतजार किया जा रहा है। आदेश मिलते ही इस केस में नियमानुसार कानूनी कार्रवाई अमल में लाई जाएगी। वहीं, बीडीओ नग्गर ने कहा कि डीआरडीए के कहने पर ही उन्होंने उक्त संस्था का सोशल ऑडिट किया था, लेकिन तीन बार मौका देने के बावजूद संस्था द्वारा ईको टूरिज्म के नाम पर किए गए विकास का लिखित हिसाब-किताब नहीं दिया गया। लिहाजा, संस्था के संदिग्ध क्रियाकलापों के चलते ही उन्होंने संस्था के बकाया बचे बीस लाख रुपये सरकारी खजाने में जमा कराने की शिफारिश की थी। एक संस्था ने नग्गर में ईको टूरिज्म विकसित करने को 2005 में साठ लाख का काम लिया। इसकी एवज में चालीस लाख रुपये डीआरडीए से ऐंठ लिए, लेकिन काम आधा अधूरा ही किया। बाद में ग्रामीणों की शिकायत के बावजूद संस्था बचे हुए बीस लाख मांगने लगी, लेकिन इसका लिखित हिसाब नहीं दे पाई।
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इस संस्था के खिलाफ ग्रामीणों की ओर से की गई शिकायतों पर सिलसिलेवार गौर किया जा रहा है। डीआरडीए के प्रोजेक्ट ऑफिसर की मानें तो संस्था पर जल्द शिकंजा कस सकता है। विभाग भी हैरान है कि आखिर उक्त संस्था ने धरोहर गांव नग्गर में ईको टूरिज्म विकसित करने को साठ लाख रुपये की राशि से ऐसा कौन सा बड़ा तीर मारा है। प्रोजेक्टर ऑफिसर अंकुश शर्मा का कहना है कि वह डीसी के अधीन काम करते हैं। लिहाजा, डीसी के आदेशों का इंतजार किया जा रहा है। आदेश मिलते ही इस केस में नियमानुसार कानूनी कार्रवाई अमल में लाई जाएगी। वहीं, बीडीओ नग्गर ने कहा कि डीआरडीए के कहने पर ही उन्होंने उक्त संस्था का सोशल ऑडिट किया था, लेकिन तीन बार मौका देने के बावजूद संस्था द्वारा ईको टूरिज्म के नाम पर किए गए विकास का लिखित हिसाब-किताब नहीं दिया गया। लिहाजा, संस्था के संदिग्ध क्रियाकलापों के चलते ही उन्होंने संस्था के बकाया बचे बीस लाख रुपये सरकारी खजाने में जमा कराने की शिफारिश की थी। एक संस्था ने नग्गर में ईको टूरिज्म विकसित करने को 2005 में साठ लाख का काम लिया। इसकी एवज में चालीस लाख रुपये डीआरडीए से ऐंठ लिए, लेकिन काम आधा अधूरा ही किया। बाद में ग्रामीणों की शिकायत के बावजूद संस्था बचे हुए बीस लाख मांगने लगी, लेकिन इसका लिखित हिसाब नहीं दे पाई।
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