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देव आदेश पर कृषि कार्यों से प्रतिबंध खत्म

Tue, 20 Aug 2013 05:34 AM IST
Kullu
Kullu Updated Tue, 20 Aug 2013 05:34 AM IST
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खराहल (कुल्लू)। जिला कुल्लू की खराहल घाटी के सात गांवों में पांच दिन तक खेत खलियानों में हल चलाने और लोहे के औजार से कार्य करने पर प्रतिबंध सोमवार सुबह हट गया। ऐसा बारिश या अन्य कारणों से नहीं बल्कि ज्वाणी महादेव के आदेशों पर हुआ।
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ज्वाणी महादेव मंदिर में श्रावण माह के अंतिम दिन हर साल सतयुगी मोहरों को शिवलिंग पर सुशोभित किया जाता है। शिवलिंग पर मोहरा सुशोभित होते ही थरमाण, ब्राधा, न्यूली, ज्वाणी, जगोट, शांकरबाग और प्रेमगढ़ गांवों में कृषि कार्य करना वर्जित माना जाता है। ग्रामीण इस परंपरा का आज भी देव आज्ञा मानकर पूरा निर्वहन करते हैं। देवता के पुजारी भूपेंद्र ठाकुर ने कहा कि सतयुगी मोहरा पांच दिन तक श्रद्धालुओं के दर्शन के लिए शिवलिंग पर सुशोभित होता है।
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मोहरे के भंडारण के बाद घाटी में सोमवार से फिर कृषि कार्य भी शुरू हो गए। दो दिवसीय श्रावण मेला भी न्यूली गांव में ज्वाणी महादेव के मंदिर में शुरू हो गया है। मेले में माता ओढ़ी अरछंडी और गौहरी देवता शिरकत कर रहे हैं। मेला कमेटी के सलाहकार निशू महंत ने कहा कि मेले में सांस्कृतिक कार्यक्रम और खेलकूद मुख्य आकर्षण होंगे। ज्वाणी महादेव के कारदार ओम प्रकाश महंत कहते हैं कि ऐसा सदियों से हो रहा है। सतयुगी मोहरा शुशोभित होते ही घाटी के हरियान कृषि के कार्य नहीं करते। ऐसा करना देव नियमों के खिलाफ माना जाता है।
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