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वूली एफिड रोग की चपेट में सेब पौधे
Updated Thu, 05 Jul 2018 10:12 PM IST
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सेब के पौधे वूली एफिड रोग की चपेट में
तीर्थन घाटी में सूखने की कगार पर सेब की टहनियां
बागवान पौधों की बीमारी को लेकर चिंतित
अमर उजाला ब्यूरो
गुशैणी (कुल्लू)। सूखे की मार से निजात मिलने के बावजूद बागवानों की मुश्किलें कम होती नजर नहीं आ रही हैं। बंजार उपमंडल की तीर्थन घाटी में सेब के पौधे अब वूली एफिड रोग की चपेट में आ रहे हैं। सेब पौधों की टहनियों में रूई जैसी लगने के कारण सेब टहनियां सूखने की कगार पर है। वूली एफिड रोग को लेकर बागवान चितिंत हैं।
इससे पहले ही सूखे के कारण बागवानों को काफी नुकसान उठाना पड़ा है। सूखे के कारण कई सेब पौधे कैंकर रोग के चलते सूख गए हैं। हालांकि वूली एफिड रोग का कहर सिर्फ तीर्थन घाटी में ही देखने को मिला है, जबकि अन्य क्षेत्रों से इस बीमारी के फैलने का अभी तक कोई मामला सामने नहीं आया है। बागवान रमेश चंद, कुंदन लाल, देवराज और कर्मचंद ने कहा कि बीमारी के प्रकोप के चलते बागवान परेशान हो गए हैं। उन्होंने कहा कि सेब सीजन शुरू होने में अब कुछ ही समय बचा है। इसके बाद सीजन शुरू हो जाएगा। ऐसे में वूली एफिड रोग के चलते बागवानों को नुकसान पड़ सकता है। इस रोग से टहनियों के सूखने का डर बना हुआ है। उन्होंने कहा कि बागवानी विभाग के विशेषज्ञों को मौके पर आकर बागवानों को रोग के प्रति जागरूक करना चाहिए। वहीं बीमारी के बचाव के लिए उचित दवाइयों के छिड़काव की सलाह भी देनी चाहिए। इस संबंध में बागवानी विभाग के सहायक विकास अधिकारी ज्ञान चंद ने कहा कि रोग की रोकथाम के लिए बागवानों को क्लोरो पारीफास 200 लीटर पानी में 400 ग्राम मिलाकर स्प्रे करें। इससे वूली एफिड रोग पर नियंत्रण होगा।
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तीर्थन घाटी में सूखने की कगार पर सेब की टहनियां
बागवान पौधों की बीमारी को लेकर चिंतित
अमर उजाला ब्यूरो
गुशैणी (कुल्लू)। सूखे की मार से निजात मिलने के बावजूद बागवानों की मुश्किलें कम होती नजर नहीं आ रही हैं। बंजार उपमंडल की तीर्थन घाटी में सेब के पौधे अब वूली एफिड रोग की चपेट में आ रहे हैं। सेब पौधों की टहनियों में रूई जैसी लगने के कारण सेब टहनियां सूखने की कगार पर है। वूली एफिड रोग को लेकर बागवान चितिंत हैं।
इससे पहले ही सूखे के कारण बागवानों को काफी नुकसान उठाना पड़ा है। सूखे के कारण कई सेब पौधे कैंकर रोग के चलते सूख गए हैं। हालांकि वूली एफिड रोग का कहर सिर्फ तीर्थन घाटी में ही देखने को मिला है, जबकि अन्य क्षेत्रों से इस बीमारी के फैलने का अभी तक कोई मामला सामने नहीं आया है। बागवान रमेश चंद, कुंदन लाल, देवराज और कर्मचंद ने कहा कि बीमारी के प्रकोप के चलते बागवान परेशान हो गए हैं। उन्होंने कहा कि सेब सीजन शुरू होने में अब कुछ ही समय बचा है। इसके बाद सीजन शुरू हो जाएगा। ऐसे में वूली एफिड रोग के चलते बागवानों को नुकसान पड़ सकता है। इस रोग से टहनियों के सूखने का डर बना हुआ है। उन्होंने कहा कि बागवानी विभाग के विशेषज्ञों को मौके पर आकर बागवानों को रोग के प्रति जागरूक करना चाहिए। वहीं बीमारी के बचाव के लिए उचित दवाइयों के छिड़काव की सलाह भी देनी चाहिए। इस संबंध में बागवानी विभाग के सहायक विकास अधिकारी ज्ञान चंद ने कहा कि रोग की रोकथाम के लिए बागवानों को क्लोरो पारीफास 200 लीटर पानी में 400 ग्राम मिलाकर स्प्रे करें। इससे वूली एफिड रोग पर नियंत्रण होगा।
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