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वेतन वृद्धि की मांग पर आंगनबाड़ी वर्कर लामबंद
Updated Mon, 15 Jan 2018 07:25 PM IST
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200 रुपये का नोट
- फोटो : RBI
खराहल (कुल्लू)। आंगनबाड़ी कार्यकर्ता और हेल्पर केंद्र सरकारी की गलत नीतियां के विरोध में 17 जनवरी को जिला मुख्यालय में अपने हक के लिए प्रदर्शन करेंगी। इस दौरान उपायुक्त के माध्यम से सरकार को मांग पत्र भी प्रेषित करेंगी। प्रदेश में 38 हजार आंगनबाड़ी कर्मचारी सेवा दे रही है। सरकार ने प्रदेश में 1975 में आंगनबाड़ी वर्करों की तैनाती की हैं। यूनियन का कहना है कि पिछले 38 वर्षों से सांसद और विधायक के वेतन में न जाने केंद्र और प्रदेश सरकार ने कितनी बार बढ़ोतरी की है, लेकिन उन्हें बार आश्वासन के सिवाय कुछ नसीब नहीं हुआ है। जबकि इन कर्मियों को न्यूनतम दिहाड़ी से भी वंचित रखा है। मौजूदा समय केंद्र की 16 योजनाओं का कार्य इन से करवाया जा रहा है। पड़ोसी राज्यों में प्रदेश के मानदेय से डेढ़ गुना मिल रहा है।
प्रदेश आंगनबाड़ी कार्यकर्ता और हेल्पर यूनियन की अध्यक्ष खीमी भंडारी कहती है कि सरकार न तो मानदेय बढ़ा रही है और न ही रेगुलर करने के लिए नीति बना रही है। केंद्र सरकार ने साढ़े तीन साल में एक रूपया भी नहीं बढ़ाया है। अपने हक के लिए 17 जनवरी को प्रदेश के मुख्यालय में आंगनबाड़ी कार्यकर्ता और हेल्पर प्रदर्शन करेंगी और उपायुक्त के माध्यम से मांग पत्र सरकार को भेजेंगी।
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प्रदेश आंगनबाड़ी कार्यकर्ता और हेल्पर यूनियन की अध्यक्ष खीमी भंडारी कहती है कि सरकार न तो मानदेय बढ़ा रही है और न ही रेगुलर करने के लिए नीति बना रही है। केंद्र सरकार ने साढ़े तीन साल में एक रूपया भी नहीं बढ़ाया है। अपने हक के लिए 17 जनवरी को प्रदेश के मुख्यालय में आंगनबाड़ी कार्यकर्ता और हेल्पर प्रदर्शन करेंगी और उपायुक्त के माध्यम से मांग पत्र सरकार को भेजेंगी।
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