{"_id":"5a61fd614f1c1b9f268b54aa","slug":"71516371297-kullu-news","type":"story","status":"publish","title_hn":"कुल्लू में एक हजार करोड़ के सेब पर छाया संकट","category":{"title":"City & states","title_hn":"शहर और राज्य","slug":"city-and-states"}}
कुल्लू में एक हजार करोड़ के सेब पर छाया संकट
Updated Fri, 19 Jan 2018 09:38 PM IST
विज्ञापन
apple shimla
- फोटो : amarujala
कुल्लू। चार महीनों से मौसम की बेरुखी और नमी नहीं होने से सेब उत्पादक जिला कुल्लू में करीब एक हजार करोड़ के सेब कारोबार पर संकट छा गया है। सेब बगीचों में नमी न होने से सेब के पौधे भी सूखने लगे हैं। महीनों से रूठे मौसम से बागवानों का दोहरी मार झेलनी पड़ रही है। एक ओर आगामी सेब फसल पर संकट छाने का डर तो दूसरी तरफ सेब के पेड़ों को कई तरह की बीमारियों ने जकड़ लिया है।
जनवरी माह खत्म होने को है और बागवान अभी तक सेब के तौलिये नहीं बना पाए हैं। नए बगीचा लगाने के लिए भी मौसम बाधा बन गया है। मौसम की बेरूखी से बागवानी विशेषज्ञ भी चिंतित हो गए हैं। जिला कुल्लू में करीब 70 हजार परिवार बागवानी से जुड़े हैं और लगभग 27 हजार हेक्टेयर भूमि में सेब के बगीचे लगाए गए हैं, लेकिन सेब के लिए जरूरी चिलिंग आवर्स, तौलिया बनाने, खाद व गोबर डालने तथा नए सेब बगीचे लगाने का समय निकलता जा रहा है। घाटी में पड़े भारी सूखे बागवानी महकमा अलर्ट हो गया है और सरकार के आदेशों के बाद अधिकारी फील्ड में डट गए हैं और बागवानों को जागरूक किया जा रहा है।
बागवान कमल ठाकुर, योगेश वर्मा, अमर ठाकर, दुनी चंद, सोहन लाल, उगम राम ठाकुर, चमन लाल, दया राम तथा हीरा लाल और जगदीश चंद के अनुसार बर्फबारी और बारिश नहीं होने से बागवानी को खतरा हो गया है। बगीचों में नमी नहीं होने से तमाम कार्य ठप पड़े हैं। कई जगह तो तीन से आठ साल पौधे सूखने लगे हैं। इस संबंध में बागवानी उद्यान विभाग कुल्लू के उपनिदेशक डॉ राजकुमार शर्मा ने कहा कि इस बार सूखे से बागवानी के नुकसान का आकलन करना अभी मुश्किल है। सेब बगीचों में पतझड़ है। सेब में तौलिए बनाने के साथ नया बगीचा लगाना अभी नुकसानदेह है। उन्होंने जिला के सभी अधिकारियों को अलर्ट कर बागवानों को जागरूक करने को कहा गया है।
विज्ञापन
11 दिसंबर को हुई थी बारिश और बर्फबारी
कुल्लू। जिला कुल्लू में 15 सितंबर से अभी तक सर्दी का मौसम सूखा ही निकल गया है। 11 से 13 दिसंबर 2017 को हुई बारिश व बर्फबारी से बागवानी को कोई खास फायदा नहीं मिल पाया है। इन दौरान हुई बर्फबारी पहाड़ों तक सीमित रही। बागवानी के लिए बर्फबारी का होना जरूरी है। जिससे न केवल चिलिंग आवर्स पूरे होते हैं बल्कि कई बीमारियां भी खत्म हो जाती हैं।
शुष्क मौसम से वूली एफिड और सूली का कहर
बदले मौसम से सेब के पेड़ वूली एफिड और सूली कीट की चपेट में आ गए हैं। वूली एफिड कीट सेब की टहनियों का रस चूस रहा है तो सूली कीटों के कहर से सेब के पौध की जड़ों को अंदर की अंदर खोखला किया जा रहा है। ऐसे में उपरोक्त बीमारियों से सेब के पेड़ सूखने लगे हैं।
विज्ञापन
जनवरी माह खत्म होने को है और बागवान अभी तक सेब के तौलिये नहीं बना पाए हैं। नए बगीचा लगाने के लिए भी मौसम बाधा बन गया है। मौसम की बेरूखी से बागवानी विशेषज्ञ भी चिंतित हो गए हैं। जिला कुल्लू में करीब 70 हजार परिवार बागवानी से जुड़े हैं और लगभग 27 हजार हेक्टेयर भूमि में सेब के बगीचे लगाए गए हैं, लेकिन सेब के लिए जरूरी चिलिंग आवर्स, तौलिया बनाने, खाद व गोबर डालने तथा नए सेब बगीचे लगाने का समय निकलता जा रहा है। घाटी में पड़े भारी सूखे बागवानी महकमा अलर्ट हो गया है और सरकार के आदेशों के बाद अधिकारी फील्ड में डट गए हैं और बागवानों को जागरूक किया जा रहा है।
विज्ञापन
बागवान कमल ठाकुर, योगेश वर्मा, अमर ठाकर, दुनी चंद, सोहन लाल, उगम राम ठाकुर, चमन लाल, दया राम तथा हीरा लाल और जगदीश चंद के अनुसार बर्फबारी और बारिश नहीं होने से बागवानी को खतरा हो गया है। बगीचों में नमी नहीं होने से तमाम कार्य ठप पड़े हैं। कई जगह तो तीन से आठ साल पौधे सूखने लगे हैं। इस संबंध में बागवानी उद्यान विभाग कुल्लू के उपनिदेशक डॉ राजकुमार शर्मा ने कहा कि इस बार सूखे से बागवानी के नुकसान का आकलन करना अभी मुश्किल है। सेब बगीचों में पतझड़ है। सेब में तौलिए बनाने के साथ नया बगीचा लगाना अभी नुकसानदेह है। उन्होंने जिला के सभी अधिकारियों को अलर्ट कर बागवानों को जागरूक करने को कहा गया है।
विज्ञापन
11 दिसंबर को हुई थी बारिश और बर्फबारी
कुल्लू। जिला कुल्लू में 15 सितंबर से अभी तक सर्दी का मौसम सूखा ही निकल गया है। 11 से 13 दिसंबर 2017 को हुई बारिश व बर्फबारी से बागवानी को कोई खास फायदा नहीं मिल पाया है। इन दौरान हुई बर्फबारी पहाड़ों तक सीमित रही। बागवानी के लिए बर्फबारी का होना जरूरी है। जिससे न केवल चिलिंग आवर्स पूरे होते हैं बल्कि कई बीमारियां भी खत्म हो जाती हैं।
शुष्क मौसम से वूली एफिड और सूली का कहर
बदले मौसम से सेब के पेड़ वूली एफिड और सूली कीट की चपेट में आ गए हैं। वूली एफिड कीट सेब की टहनियों का रस चूस रहा है तो सूली कीटों के कहर से सेब के पौध की जड़ों को अंदर की अंदर खोखला किया जा रहा है। ऐसे में उपरोक्त बीमारियों से सेब के पेड़ सूखने लगे हैं।