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झमाझम बारिश सेब के लिए बनी संजीवनी
Updated Tue, 18 Jul 2017 09:59 PM IST
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खराहल (कुल्लू)। बारिश की रिमरिझ फुहारें नकदी फसल सेब के लिए संजीवनी लेकर आ रही है। कुल्लू घाटी का मौसम इन दिनों सेब पर पूरी तरह से मेहरबान है। मौसम का रुख देखकर बागवानों के चेहरों पर खुशी नजर आ रही है। बागवानों के अनुसार घाटी में हो रही बारिश सेब के रंग के लिए फायदेमंद होगी। वहीं इसकी गुणवत्ता में अप्रत्याशित बढ़ोतरी होगी।
दो दिनों से लगातार हो रही बारिश सेब सहित खरीफ फसल के लिए लाभदायक मानी जा रही है। बागवान ओम प्रकाश, दिले राम, अमर ठाकुर, अनिल कुमार, अमित कुमार, सुनील, दलीप सिंह तथा आलम चंद का कहना है कि थोड़े-थोड़े अंतराल के बाद बारिश जारी रहती है तो सेब का रंग उम्दा होगा। इस वक्त सेब में रंग आने की प्रक्रिया शुरू हो गई, लेकिन आकार अभी छोटा ही है। कुल्लू के सेब वाले इलाकों में बारिश होने से बागवानों के चेहरों पर रौनक आ गई है। कुल्लू जिला में इस बार ओलावृष्टि और अंधड़ के कारण 60 फीसदी फसल को नुकसान हुआ है। वहीं, कई क्षेत्रों में स्कैब रोग का कहर से भी फसल को नुकसान हुआ है। ऐसे में जिले में 40 लाख पेटी होने का अनुमान है। जोकि पिछले पांच सालों में सबसे कम है।
क्या कहते हैं विशेषज्ञ
बागवानी अनुसंधान केंद्र सेउबाग के प्रभारी डॉ. किशोर खोसला कहते हैं कि बारिश से सेब का रस व मिठास में बढ़ोतरी के साथ रंग चोखा होगा, लेकिन स्कैब बीमारी की संभावना भी बढ़ सकती है। लिहाजा, बागवानों को मौसम के खुलते ही बगीचों में अपने शैड्यूल के अनुसार स्प्रे करनी चाहिए।
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जिला बागवानी उपनिदेशक राजकुमार शर्मा के अनुसार विभाग के पास स्कैब की राकथाम के लिए तमाम दवाइयां उपलब्ध हैैं और बागवानों को विभाग की सलाह के मुताबिक स्प्रे करनी चाहिए।
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दो दिनों से लगातार हो रही बारिश सेब सहित खरीफ फसल के लिए लाभदायक मानी जा रही है। बागवान ओम प्रकाश, दिले राम, अमर ठाकुर, अनिल कुमार, अमित कुमार, सुनील, दलीप सिंह तथा आलम चंद का कहना है कि थोड़े-थोड़े अंतराल के बाद बारिश जारी रहती है तो सेब का रंग उम्दा होगा। इस वक्त सेब में रंग आने की प्रक्रिया शुरू हो गई, लेकिन आकार अभी छोटा ही है। कुल्लू के सेब वाले इलाकों में बारिश होने से बागवानों के चेहरों पर रौनक आ गई है। कुल्लू जिला में इस बार ओलावृष्टि और अंधड़ के कारण 60 फीसदी फसल को नुकसान हुआ है। वहीं, कई क्षेत्रों में स्कैब रोग का कहर से भी फसल को नुकसान हुआ है। ऐसे में जिले में 40 लाख पेटी होने का अनुमान है। जोकि पिछले पांच सालों में सबसे कम है।
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क्या कहते हैं विशेषज्ञ
बागवानी अनुसंधान केंद्र सेउबाग के प्रभारी डॉ. किशोर खोसला कहते हैं कि बारिश से सेब का रस व मिठास में बढ़ोतरी के साथ रंग चोखा होगा, लेकिन स्कैब बीमारी की संभावना भी बढ़ सकती है। लिहाजा, बागवानों को मौसम के खुलते ही बगीचों में अपने शैड्यूल के अनुसार स्प्रे करनी चाहिए।
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जिला बागवानी उपनिदेशक राजकुमार शर्मा के अनुसार विभाग के पास स्कैब की राकथाम के लिए तमाम दवाइयां उपलब्ध हैैं और बागवानों को विभाग की सलाह के मुताबिक स्प्रे करनी चाहिए।