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जीएचएनपी में प्लास्टिक बैग व बोतल ले जाने पर मनाही
Updated Thu, 05 Jul 2018 10:12 PM IST
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ग्रेट हिमालयन पार्क में प्लास्टिक बैग, बोतल ले जाने पर रोक
प्राकृतिक सुंदरता को बरकरार रखने के लिए लिया फैसला
ग्रेट हिमालयन नेशनल पार्क को मिल चुका है विश्व धरोहर का दर्जा
महेंद्र सिंह पालसरा
न्यूली (कुल्लू)। सैंज घाटी के तहत आने वाले विश्व धरोहर ग्रेट हिमालयन नेशनल पार्क (जीएचएनपी) में प्लास्टिक बैग और बोतल ले जाने पर रोक लग गई है। पार्क के प्राकृतिक सौंदर्य को बरकरार रखने के लिए यह निर्णय लिया गया है। अब कोई भी पर्यटक प्लास्टिक बैग या बोतल पार्क क्षेत्र में नहीं ले जा पाएगा। यदि कोई ऐसा करता है तो उसे अपने साथ बोतल और अन्य सामान वापस लाना होगा।
प्राकृतिक सौंदर्य से लबरेज पार्क में हर वर्ष हजारों देशी-विदेशी सैलानी और शोधार्थी पहुंचते हैं। ट्रैकिंग के शौकीन यहां अपना समय प्रकृति के बीच गुजारते हैं। पार्क में जड़ी-बूटियां और दुर्लभ पशु पक्षी पाए जाते हैं, लेकिन दिनोंदिन यहां बढ़ती संख्या से पर्यावरण को नुकसान पहुंचना शुरू हो गया है। पार्क क्षेत्र में खुले में प्लास्टिक पाया जा रहा है, जो कि चिंताजनक होता जा रहा है। इस पर कड़ा संज्ञान लेते हुए अब सैलानियों और ट्रैकरों को पार्क क्षेत्र में प्लास्टिक बोतल और बैग ले जाने पर रोक लगा दी है। शुरुआती दौर में यदि कोई पर्यटक अपने साथ प्लास्टिक बोतल या बैग ले जाना चाहता है तो उसे यह वापस भी लाने की शर्त रखी गई है। धीरे-धीरे ऐसे सामान पर पूर्ण प्रतिबंध लगाया जाएगा। पार्क के अधीन वाली सैंज, जीवा और तीर्थन रेंज में कई खूबसूरत स्थल आते हैं। रक्तिसर, ढेल, कचरेहड़ झील समेत अन्य कई धार्मिक और प्राकृतिक स्थल इस पार्क में हैं। पार्क की सुंदरता को कायम रखने के लिए स्थानीय महिला और युवक मंडलाें को भी जागरूक किया जाएगा। ग्रामीण आलम चंद, गिरधारी लाल, दुर्गादत्त, निमत राम, मीराबाई, हीरा लाल, चंद्र ठाकुर, प्रेम सिंह और ठाकुर दत्त ने कहा कि यह निर्णय निश्चित तौर पर प्राकृतिक सौंदर्यता को कायम रखेगा। इसमें सभी को सहयोग करना चाहिए। इधर, ग्रेट हिमालयन नेशनल पार्क के अरण्यपाल अजीत ठाकुर ने कहा कि पार्क में ट्रैकिंग और घूमने वाले पर्यटकों और अन्य को प्लास्टिक के दूसरे थैलों का इस्तेमाल करना चाहिए। कपड़ों के थैलों में ही सामान ले जाएं। जागरूकता के लिए बोर्ड समेत अन्य माध्यम अपनाए जा रहे हैं।
पार्क में पाई जाती हैं ये प्रजातियां
पार्क में वन्य प्राणियों की 31 प्रजातियों में काला भालू, भूरा भालू, कस्तूरी मृग, हिम तेंदुआ, घोरल, हिमालयन शीप, हिमालयन थार, हिमालयन विजल के अलावा मुर्गा प्रजाति और दुर्लभ पक्षियों की 205 नस्लों में जाजुराना, मोनाल, कोकलास, शाहिल, माटिंग, चिंड सीजेंड और 44 तितलियों की प्रजातियां भी पाई जाती हैं।
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प्राकृतिक सुंदरता को बरकरार रखने के लिए लिया फैसला
ग्रेट हिमालयन नेशनल पार्क को मिल चुका है विश्व धरोहर का दर्जा
महेंद्र सिंह पालसरा
न्यूली (कुल्लू)। सैंज घाटी के तहत आने वाले विश्व धरोहर ग्रेट हिमालयन नेशनल पार्क (जीएचएनपी) में प्लास्टिक बैग और बोतल ले जाने पर रोक लग गई है। पार्क के प्राकृतिक सौंदर्य को बरकरार रखने के लिए यह निर्णय लिया गया है। अब कोई भी पर्यटक प्लास्टिक बैग या बोतल पार्क क्षेत्र में नहीं ले जा पाएगा। यदि कोई ऐसा करता है तो उसे अपने साथ बोतल और अन्य सामान वापस लाना होगा।
प्राकृतिक सौंदर्य से लबरेज पार्क में हर वर्ष हजारों देशी-विदेशी सैलानी और शोधार्थी पहुंचते हैं। ट्रैकिंग के शौकीन यहां अपना समय प्रकृति के बीच गुजारते हैं। पार्क में जड़ी-बूटियां और दुर्लभ पशु पक्षी पाए जाते हैं, लेकिन दिनोंदिन यहां बढ़ती संख्या से पर्यावरण को नुकसान पहुंचना शुरू हो गया है। पार्क क्षेत्र में खुले में प्लास्टिक पाया जा रहा है, जो कि चिंताजनक होता जा रहा है। इस पर कड़ा संज्ञान लेते हुए अब सैलानियों और ट्रैकरों को पार्क क्षेत्र में प्लास्टिक बोतल और बैग ले जाने पर रोक लगा दी है। शुरुआती दौर में यदि कोई पर्यटक अपने साथ प्लास्टिक बोतल या बैग ले जाना चाहता है तो उसे यह वापस भी लाने की शर्त रखी गई है। धीरे-धीरे ऐसे सामान पर पूर्ण प्रतिबंध लगाया जाएगा। पार्क के अधीन वाली सैंज, जीवा और तीर्थन रेंज में कई खूबसूरत स्थल आते हैं। रक्तिसर, ढेल, कचरेहड़ झील समेत अन्य कई धार्मिक और प्राकृतिक स्थल इस पार्क में हैं। पार्क की सुंदरता को कायम रखने के लिए स्थानीय महिला और युवक मंडलाें को भी जागरूक किया जाएगा। ग्रामीण आलम चंद, गिरधारी लाल, दुर्गादत्त, निमत राम, मीराबाई, हीरा लाल, चंद्र ठाकुर, प्रेम सिंह और ठाकुर दत्त ने कहा कि यह निर्णय निश्चित तौर पर प्राकृतिक सौंदर्यता को कायम रखेगा। इसमें सभी को सहयोग करना चाहिए। इधर, ग्रेट हिमालयन नेशनल पार्क के अरण्यपाल अजीत ठाकुर ने कहा कि पार्क में ट्रैकिंग और घूमने वाले पर्यटकों और अन्य को प्लास्टिक के दूसरे थैलों का इस्तेमाल करना चाहिए। कपड़ों के थैलों में ही सामान ले जाएं। जागरूकता के लिए बोर्ड समेत अन्य माध्यम अपनाए जा रहे हैं।
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पार्क में पाई जाती हैं ये प्रजातियां
पार्क में वन्य प्राणियों की 31 प्रजातियों में काला भालू, भूरा भालू, कस्तूरी मृग, हिम तेंदुआ, घोरल, हिमालयन शीप, हिमालयन थार, हिमालयन विजल के अलावा मुर्गा प्रजाति और दुर्लभ पक्षियों की 205 नस्लों में जाजुराना, मोनाल, कोकलास, शाहिल, माटिंग, चिंड सीजेंड और 44 तितलियों की प्रजातियां भी पाई जाती हैं।
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