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25 वर्षो में कुल्लू में सवा चार सौ मकान हुए स्वाह
Updated Thu, 07 Dec 2017 05:53 PM IST
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25 वर्षों में कुल्लू में सवा चार सौ मकान राख
कई देवी और देवताओं के मंदिर भी चढ़े अग्नि के भेंट
आग की घटनाओं को लेकर फिर भी लोग नहीं सचेत
घर के समीप घास का कोठे और शार्ट सर्किट बन रहे वजह
अमीं चंद भंडारी
खराहल (कुल्लू)। जिला कुल्लू में 25 वर्षों में आग की घटनाओं में लगभग सवा चार सौ मकान जलकर राख हो चुके हैं। इसके बावजूद भी लोग घरों में घास और लकड़ी स्टोर कर रहे हैं। इतना ही घर के समीप घास के कोठों को भी लगाने से लोग गुरेज नहीं कर रहे हैं। साथ ही बिजली बोर्ड की जीर्ण अवस्था में तारों को भी आग लगने का एक मुख्य कारण माना जा रहा है।
अधिकतर आग की घटनाओं में बिजली के शार्ट सर्किट ही मुख्य वजह मानी जाती है। इसके बावजूद बिजली बोर्ड इन खामियों को दुरुस्त नहीं कर पाता है। जिला कुल्लू में आग ने पिछले अढ़ाई दशक से सैकड़ों घरों को स्वाह कर दिया है। वर्ष 1992 में बंजार में पहली बड़ी आगजनी की घटना में दस मकान जल कर राख के ढेर में तबदील हो गए थे। 2005 में मणिकर्ण के शिल्हा में आग लगी। जिसने 30 घरों को स्वाह कर दिया। साल 2007 में मोहणी में भयंकर अग्निकांड में 48 मकान तथा इसके बाद सबसे बड़ी आगजनी की घटना मलाणा में 2008 हुई। जिसमें 148 घरों को स्वाह कर दिया था।
इस अग्निकांड में देवता जमलू का मंदिर भी जल गया था। वर्ष 2011 में भुंतर बाजार में चार दुकानें, साल 2014 में शांघड में चार मकान, वर्ष 2015 में कोटला अग्निकांड में 81 मकान, वर्ष 2016 पंचायत गाहर के गांव गाहर में नौ मकान, बटाहर सरसई में तीन घर जबकि दो दिन पूर्व भटकराल नौ मकान आग से स्वाह हो गए। वहीं कौश नारायण, गंर्गाचार्य, जमलू ब्रहमा मंदिर, जमदग्रि, शंगचूल महादेव और बड़ा छमांहू का मंदिर भी आग की भेंट चढ़ा था। जिला अग्निशमन अधिकारी दुर्गादास ठाकुर ने कहा कि समय-समय पर लोगों को आग की घटनाओं के प्रति सचेत किया जाता है।
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कई देवी और देवताओं के मंदिर भी चढ़े अग्नि के भेंट
आग की घटनाओं को लेकर फिर भी लोग नहीं सचेत
घर के समीप घास का कोठे और शार्ट सर्किट बन रहे वजह
अमीं चंद भंडारी
खराहल (कुल्लू)। जिला कुल्लू में 25 वर्षों में आग की घटनाओं में लगभग सवा चार सौ मकान जलकर राख हो चुके हैं। इसके बावजूद भी लोग घरों में घास और लकड़ी स्टोर कर रहे हैं। इतना ही घर के समीप घास के कोठों को भी लगाने से लोग गुरेज नहीं कर रहे हैं। साथ ही बिजली बोर्ड की जीर्ण अवस्था में तारों को भी आग लगने का एक मुख्य कारण माना जा रहा है।
अधिकतर आग की घटनाओं में बिजली के शार्ट सर्किट ही मुख्य वजह मानी जाती है। इसके बावजूद बिजली बोर्ड इन खामियों को दुरुस्त नहीं कर पाता है। जिला कुल्लू में आग ने पिछले अढ़ाई दशक से सैकड़ों घरों को स्वाह कर दिया है। वर्ष 1992 में बंजार में पहली बड़ी आगजनी की घटना में दस मकान जल कर राख के ढेर में तबदील हो गए थे। 2005 में मणिकर्ण के शिल्हा में आग लगी। जिसने 30 घरों को स्वाह कर दिया। साल 2007 में मोहणी में भयंकर अग्निकांड में 48 मकान तथा इसके बाद सबसे बड़ी आगजनी की घटना मलाणा में 2008 हुई। जिसमें 148 घरों को स्वाह कर दिया था।
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इस अग्निकांड में देवता जमलू का मंदिर भी जल गया था। वर्ष 2011 में भुंतर बाजार में चार दुकानें, साल 2014 में शांघड में चार मकान, वर्ष 2015 में कोटला अग्निकांड में 81 मकान, वर्ष 2016 पंचायत गाहर के गांव गाहर में नौ मकान, बटाहर सरसई में तीन घर जबकि दो दिन पूर्व भटकराल नौ मकान आग से स्वाह हो गए। वहीं कौश नारायण, गंर्गाचार्य, जमलू ब्रहमा मंदिर, जमदग्रि, शंगचूल महादेव और बड़ा छमांहू का मंदिर भी आग की भेंट चढ़ा था। जिला अग्निशमन अधिकारी दुर्गादास ठाकुर ने कहा कि समय-समय पर लोगों को आग की घटनाओं के प्रति सचेत किया जाता है।
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