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आरती के लिए पांच घंटे तक कड़ाके में खड़े रहे लोग
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अारती कार्यक्रम
- फोटो : अमर उजाला ब्यूरो
कुल्लू। पर्यावरण संरक्षण को लेकर आयोजित ब्यास आरती में कड़ाके की ठंड के बावजूद लोग करीब पांच घंटे तक खड़े रहे। ब्यास आरती के लिए लोगों का मंगलवार दोपहर साढ़े 12 से पहले ही यहां पहुंचना शुरू हो गया था। लेकिन देर शाम साढ़े पांच बजे के बाद ब्यास आरती की प्रक्रिया शुरू हुई। ब्यास आरती में महिलाओं की भागीदारी 70 फीसदी से अधिक रही।
कार्यक्रम में कई बच्चे भी शामिल थे। आरती के इंतजार में सैकड़ों लोग ब्यास की पूजा-अर्चना व आरती से पहले ही अपने घरों के लिए रवाना हो गए थे और उन्हें मजबूरन ब्यास की आरती से पहले ही दीयों का प्रवाहित करना पड़ा। ब्यास आरती के लिए जगह कम होने से जहां हजारों लोग इसको देखने से वंचित हुए, वहीं सैकड़ों लोग दीयों को ब्यास में प्रवाहित ही नहीं कर सके।
मुख्यमंत्री के नाम से बुलाए गए थे लोग
कुल्लू। ब्यास आरती में आए ग्रामीण लोगों ने उन्हें मुख्यमंत्री के नाम से बुलाने का आरोप लगाया है। कई लोगों ने कहा कि उन्हें ब्यास आरती में मुख्यमंत्री जयराम ठाकुर के आने की बात कही गई। सीता राम, मणी देवी, निर्मला तथा हेत राम ने कहा कि लोगों को मुख्यमंत्री के आने के नाम से ब्यास आरती में लाया गया। लेकिन जब आयोजन स्थल मौहल पहुंचे तो उन्हें पता चला कि मुख्यमंत्री नहीं आ रहे हैं।
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कार्यक्रम में कई बच्चे भी शामिल थे। आरती के इंतजार में सैकड़ों लोग ब्यास की पूजा-अर्चना व आरती से पहले ही अपने घरों के लिए रवाना हो गए थे और उन्हें मजबूरन ब्यास की आरती से पहले ही दीयों का प्रवाहित करना पड़ा। ब्यास आरती के लिए जगह कम होने से जहां हजारों लोग इसको देखने से वंचित हुए, वहीं सैकड़ों लोग दीयों को ब्यास में प्रवाहित ही नहीं कर सके।
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मुख्यमंत्री के नाम से बुलाए गए थे लोग
कुल्लू। ब्यास आरती में आए ग्रामीण लोगों ने उन्हें मुख्यमंत्री के नाम से बुलाने का आरोप लगाया है। कई लोगों ने कहा कि उन्हें ब्यास आरती में मुख्यमंत्री जयराम ठाकुर के आने की बात कही गई। सीता राम, मणी देवी, निर्मला तथा हेत राम ने कहा कि लोगों को मुख्यमंत्री के आने के नाम से ब्यास आरती में लाया गया। लेकिन जब आयोजन स्थल मौहल पहुंचे तो उन्हें पता चला कि मुख्यमंत्री नहीं आ रहे हैं।
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