पांच साल में नहीं बढ़ा देवी-देवताओं का दूरी भत्ता
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अंतरराष्ट्रीय दशहरा उत्सव में भाग लेने वाले देवी देवताओं को नजराने के अलावा उन्हें दूरी भत्ता भी दिया जाता है, हालांकि बीते चार-पांच सालों में देवी देवताओं के दूरी भत्ते में एक रुपये की भी वृद्धि नहीं हो पाई है। दशहरा में भाग लेने के लिए देवी देवता दूर-दूर से शिरकत करते हैं। इसमें सबसे अधिक दूर जिला के बाह्य सराज निरमंड क्षेत्र के देवी-देवता 200 किलोमीटर का लंबा पैदल सफर कर दशहरा की शान बढ़ाते हैं। इन देवताओं को कुल्लू पहुंचे में करीब एक हफ्ते का समय लगता है और रास्ते में करीब पांच से छह पड़ावों में उनका रात्रि ठहराव होता है। निरमंड के अलावा आनी के देवी-देवता भी 150 किलोमीटर की दूरी तय कर 10281 फुट ऊंचे जलोड़ी दर्रा को पार कर ढालपुर में विराजमान होते हैं।
बंजार घाटी की तीन कोठी सराज, दुर्गम क्षेत्र सैंज घाटी के अलावा ऊझी घाटी के कई सैकड़ों देवी-देवता मीलों दूर से दशहरा में अपनी भागीदारी सुनिश्चित करते हैं। दशहरा में आने वाले देवी-देवताओं को जहां नजराना मिलता है, वहीं बीते चार-पांच सालों से प्रदेश सरकार ने देवी देवताओं को दूरी भत्ते का भी प्रावधान किया है, लेकिन इस अवधि में दूरी भत्ता एक रूपये भी नहीं बढ़ाया गया। ऐसे में देवी देवताओं के कारकूनों, हरियानों व देवलुओं को रास्ते में ठहराव व खाने की व्यवस्था को पूरा करने में आर्थिक संकट का सामना करना पड़ता है। दूरी भत्ता नहीं बढ़ने से देव समाज के लोगों में दशहरा उत्सव समिति के प्रति भारी नाराजगी है।
जिला देवी-देवता कारदार संघ के अध्यक्ष दोत राम ठाकुर ने कहा कि 200 किलोमीटर से देवी-देवता दशहरा में आते हैं, परंतु उनके दूरी भत्ते को नहीं बढ़ाया गया है। देवी देवताओं को दिए जाने वाले नजराने की देवताओं के दमरी भत्ते का भी हर साल बढ़ाया जाना चाहिए। दशहरा में जितने अधिक देवी देवता आएंगे दशहरा का महत्व उतना अधिक बढ़ेगा। दूरी भत्ते को लेकर मुख्यमंत्री वीरभद्र सिंह से भी दशहरा उत्सव के दौरान मांग की जाएगी। दशहरा उत्सव में जिला कुल्लू के हर कोने से देवी देवता भाग लेते हैं। दशहरा में आने वाले देवी देवताओं को उनकी दूरी के हिसाब से दूरी भत्ता तय किया गया है। इसमें 200 किमी दूर से आने वाले निरमंड के देवी देवताओं को सबसे अधिक चार हजार, आनी के देवताओं को तीन, बंजार व सैंज के देवी देवता को दो तथा मनाली व जिला मुख्यालय के आसपास के देवताओं को एक हजार रुपये दूरी भत्ता मिलता है।