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मनाली में 17 सालों से टीसीपी का दंश झेल रहे ग्रामीण क्षेत्रों के लोग

Thu, 11 Apr 2019 10:03 PM IST
Shimla	 Bureau शिमला ब्यूरो
Updated Thu, 11 Apr 2019 10:03 PM IST
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मनाली में 17 सालों से टीसीपी का दंश झेल रहे ग्रामीण क्षेत्रों के लोग
मनाली (कुल्लू)। पर्यटन नगरी मनाली में ग्रामीण क्षेत्रों को टाउन एंड कंट्री प्लानिंग विभाग के अंतर्गत लाए हुए 17 सालों का समय हो गया है, लेकिन टीसीपी के नियम ग्रामीण क्षेत्रों में लोगों के लिए गले की फांस बने हुए हैं। ग्रामीण क्षेत्र के लोगों को अपनी ही जमीन पर भवन और गोशाला बनाने के लिए विभागों के कई चक्कर काटने पड़ते हैं। काफी जद्दोजहद के बाद आखिर में टाउन एंड कंट्री प्लानिंग के पास जब फाइल पहुंचती है, तो टीसीपी से भवन का नक्शा पास करवाना किसी टेढ़ी खीर से कम नहीं होता है।
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यहां के बाशिंदों का कहना है कि भाजपा और कांग्रेस की सरकारों ने भी इस मसले को गंभीरता से नहीं लिया है। 17 साल बाद भी मनाली ग्रामीण क्षेत्र के लोगों की समस्या का हल नहीं हो पाई है। इसको लेकर मनाली शहर के साथ लगते ग्रामीण क्षेत्रों में रोष है। इस बार लोकसभा चुनाव में यह मुद्दा बनेगा। यहां की जनता भाजपा और कांग्रेस के प्रत्याशियों से इस मुद्दे पर जवाब मांगेगी। गौरतलब है कि पलचान, बुरूआ, शनाग, वशिष्ठ, प्रीणी, नसोगी, शलीण, जगतसुख और मनाली पंचायतों के दर्जनों गांवों को वर्ष 2002 में टीसीपी के दायरे में शामिल लाया गया था। टीसीपी की शर्तों के चलते कई लोग मकानों में बिजली और पानी के कनेक्शन तक नहीं ले पाए हैं। लोगों के मुताबिक भाजपा और कांग्रेस सरकारों का इस समस्या को लेकर रवैया नकारात्मक ही रहा है। ग्रामीण क्षेत्रों को टीसीपी से बाहर करने को लेकर कई बार मुख्यमंत्री और मंत्रियों के समक्ष समस्या को उठाया गया और लिखित तौर पर भी आग्रह किया गया लेकिन हर बार उन्हें आश्वासन के सिवा आज तक कुछ नहीं मिला है। टीसीपी की शर्तों के चलते ग्रामीण क्षेत्रों में लोग परेशान हैं।
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क्या कहते हैं लोग
मनाली होटलियर ऐसोसिएशन के प्रधान एवं वशिष्ठ गांव निवासी अनूप राम ठाकुर ने कहा कि पहाड़ों में लोगों के पास जमीन कम है। भौगोलिक परिस्थिति के चलते विभाग के नियम पूरी तरह जमीन पर नहीं उतर रहे हैं। मनाली गांव निवासी गौतम नाथ ठाकुर ने कहा कि टीसीपी जब ग्रामीण क्षेत्रों में सड़क, फुटपाथ, सीवरेज, बिजली, स्वच्छ जल, नालियां, स्ट्रीट लाइट, पार्किंग जैसी मूलभूत सुविधा नहीं दे रहा है तो यहां टीसीपी लागू करना सही नहीं है। बुुरूआ गांव निवासी भूमी देव ठाकुर ने कहा कि मनाली और उझी घाटी के गांवों पर जबरन टाउन एंड कंट्री प्लानिंग लागू किया जाना यहां की ग्रामीण जनता से अन्याय है। प्रदेश कांग्रेस महासचिव धर्मवीर धामी ने कहा कि विभाग किसी प्रकार से ग्रामीण क्षेत्रों में सुविधा नहीं दे रहा है और न विभाग के पास योजना है। ग्रामीण क्षेत्रों को टीसीपी से बाहर किया जाना चाहिए।
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वन, परिवहन और युवा सेवाएं मंत्री गोविंद सिंह ठाकुर ने कहा कि सरकार की ओर से एक हाई पावर कमेटी गठित की गई है। मेरिट तथा डीमेरिट के आधार पर ग्रामीण क्षेत्रों को बाहर किया जाएगा।
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