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बगीचों में तौलिए बनाने में जुटे बागवान
Updated Sun, 09 Dec 2018 07:15 PM IST
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अमर उजाला ब्यूरो
पतलीकूहल (कुल्लू)। घाटी की आर्थिकी की रीढ़ माने जाने वाले सेब की उम्दा फसल के लिए बागवानों ने तैयारियां शुरू कर दी हैं। पतझड़ के इस मौसम में सेब के पेड़ों से करीब सभी पत्ते झड़ चुके हैं। लिहाजा पेड़ों के सुप्त अवस्था में जाते ही इनकी प्रूनिंग कर टहनियों की कांट-छांट शुरू कर दी गई है। इतना ही नहीं सेब के पौधों की जड़ों के दायरे में तौलिए बनाने की प्रक्रिया भी आरंभ हो गई है।
कई पुराने पड़ों के सूखने के चलते उन्हें काटा जा रहा है। इनके स्थान पर नए पेड़ लगाए जा रहे हैं। इसके लिए नर्सरी से सेब के पेड़ लेने की होड़ मची हुई है। कई पेड़ों पर कैंकर जैसे रोग पनप रहे हैं। इन हिस्सों को ठीक कर इसमें चौपाटिया पेस्ट लगाया जा रहा है। स्थानीय बागवान सोहन लाल, गेहर चंद, प्रेम चंद, राजेंद्र, राजीव, गांथूराम, तीर्थ राम, मुकेश, नीलचंद और पंछीराम ने कहा कि इस बार कई वर्षों के बाद नवंबर माह में बर्फबारी के चलते घाटी का तापमान सेब के अनुकूल बना हुआ है। आगे भी इसी तरह से ऋतुचक्र सामान्य रहता है तो सेब की बंपर फसल होने की उम्मीद रहेगी। बागवानी अनुसंधान केंद्र बजौरा में तैनात डॉ. जयंत ने कहा कि सेब की अच्छी फसल के लिए तौलिए बनाना और प्रूनिंग करना उतना ही जरूरी है, जितना कीटनाशकों और फंफूदनाशक दवाओं का छिड़काव करना। लिहाजा सही समय पर इन कार्यों को पूरा करने से बेहतर परिणाम हो सकते हैं।
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पतलीकूहल (कुल्लू)। घाटी की आर्थिकी की रीढ़ माने जाने वाले सेब की उम्दा फसल के लिए बागवानों ने तैयारियां शुरू कर दी हैं। पतझड़ के इस मौसम में सेब के पेड़ों से करीब सभी पत्ते झड़ चुके हैं। लिहाजा पेड़ों के सुप्त अवस्था में जाते ही इनकी प्रूनिंग कर टहनियों की कांट-छांट शुरू कर दी गई है। इतना ही नहीं सेब के पौधों की जड़ों के दायरे में तौलिए बनाने की प्रक्रिया भी आरंभ हो गई है।
कई पुराने पड़ों के सूखने के चलते उन्हें काटा जा रहा है। इनके स्थान पर नए पेड़ लगाए जा रहे हैं। इसके लिए नर्सरी से सेब के पेड़ लेने की होड़ मची हुई है। कई पेड़ों पर कैंकर जैसे रोग पनप रहे हैं। इन हिस्सों को ठीक कर इसमें चौपाटिया पेस्ट लगाया जा रहा है। स्थानीय बागवान सोहन लाल, गेहर चंद, प्रेम चंद, राजेंद्र, राजीव, गांथूराम, तीर्थ राम, मुकेश, नीलचंद और पंछीराम ने कहा कि इस बार कई वर्षों के बाद नवंबर माह में बर्फबारी के चलते घाटी का तापमान सेब के अनुकूल बना हुआ है। आगे भी इसी तरह से ऋतुचक्र सामान्य रहता है तो सेब की बंपर फसल होने की उम्मीद रहेगी। बागवानी अनुसंधान केंद्र बजौरा में तैनात डॉ. जयंत ने कहा कि सेब की अच्छी फसल के लिए तौलिए बनाना और प्रूनिंग करना उतना ही जरूरी है, जितना कीटनाशकों और फंफूदनाशक दवाओं का छिड़काव करना। लिहाजा सही समय पर इन कार्यों को पूरा करने से बेहतर परिणाम हो सकते हैं।
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