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लादरचा में होता था अंतर्राष्ट्रीय स्तर का व्यापार
Updated Sun, 05 Aug 2018 10:02 PM IST
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अमर उजाला ब्यूरो
केलांग (लाहौल स्पीति)। चीन सीमा से सटे लादरचा में मनाए जाने वाले उत्सव का स्वरूप अब व्यापारिक से बदलकर सांस्कृतिक हो गया है। लादरचा मैदान कभी अंतर्राष्ट्रीय व्यापार का केंद्र होता था। यहां अंतर्राष्ट्रीय स्तर का व्यापार होता था। लादरचा मैदान चीन की अंतर्राष्ट्रीय सीमा से चंद किमी दूर चिचम गांव के पास स्थित है। 80 के दशक में इस उत्सव को लादरचा से स्थानांतरित कर काजा में आयोजित करने की परंपरा आरंभ हुई। उस दौर में लादरचा उत्सव करीब एक सप्ताह तक चलता था। इसमें तिब्बत, हिमाचल, उत्तराखंड और जम्मू-कश्मीर के व्यापारी पहुंचे थे। उत्सव का आगाज स्पीति के राजा को छोंग भेंट कर होता था।
एसडीएम काजा जीवन नेगी ने कहा कि लादरचा मैदान तीन अहम व्यापारिक मार्गों का संगम स्थल है। मैदान के पूर्व में किन्नौर-तिब्बत, उत्तर दिशा में परंगला दर्रा होकर लद्दाख और पश्चिमी की तरफ कुल्लू, लाहौल और जंस्कर का इलाका पड़ता है। वर्तमान में सरकार ने उत्सव को राज्य स्तरीय मेले का दर्जा प्रदान किया है। उत्सव में उत्तर भारत के विभिन्न इलाकों से सांस्कृतिक दल शिरकत करते हैं। वक्त के साथ अब इस उत्सव का स्वरूप भी बदल गया है। स्पीति घाटी के लादरचा उत्सव ने व्यापारिक की बजाय अब सांस्कृतिक स्वरूप ले लिया है। उत्सव की तैयारियों को लेकर स्थानीय पंचायतों, महिला और युवक मंडलों की मदद ली जा रही है। 17 से 19 अगस्त तक चलने वाले उत्सव में विभिन्न प्रतियोगिताओं का आयोजन किया जाएगा। नेगी ने कहा कि कार्यक्रम में हिस्सा लेने के लिए कलाकारों तथा सांस्कृतिक दलों के आवेदन मिलने शुरू हो गए हैं।
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केलांग (लाहौल स्पीति)। चीन सीमा से सटे लादरचा में मनाए जाने वाले उत्सव का स्वरूप अब व्यापारिक से बदलकर सांस्कृतिक हो गया है। लादरचा मैदान कभी अंतर्राष्ट्रीय व्यापार का केंद्र होता था। यहां अंतर्राष्ट्रीय स्तर का व्यापार होता था। लादरचा मैदान चीन की अंतर्राष्ट्रीय सीमा से चंद किमी दूर चिचम गांव के पास स्थित है। 80 के दशक में इस उत्सव को लादरचा से स्थानांतरित कर काजा में आयोजित करने की परंपरा आरंभ हुई। उस दौर में लादरचा उत्सव करीब एक सप्ताह तक चलता था। इसमें तिब्बत, हिमाचल, उत्तराखंड और जम्मू-कश्मीर के व्यापारी पहुंचे थे। उत्सव का आगाज स्पीति के राजा को छोंग भेंट कर होता था।
एसडीएम काजा जीवन नेगी ने कहा कि लादरचा मैदान तीन अहम व्यापारिक मार्गों का संगम स्थल है। मैदान के पूर्व में किन्नौर-तिब्बत, उत्तर दिशा में परंगला दर्रा होकर लद्दाख और पश्चिमी की तरफ कुल्लू, लाहौल और जंस्कर का इलाका पड़ता है। वर्तमान में सरकार ने उत्सव को राज्य स्तरीय मेले का दर्जा प्रदान किया है। उत्सव में उत्तर भारत के विभिन्न इलाकों से सांस्कृतिक दल शिरकत करते हैं। वक्त के साथ अब इस उत्सव का स्वरूप भी बदल गया है। स्पीति घाटी के लादरचा उत्सव ने व्यापारिक की बजाय अब सांस्कृतिक स्वरूप ले लिया है। उत्सव की तैयारियों को लेकर स्थानीय पंचायतों, महिला और युवक मंडलों की मदद ली जा रही है। 17 से 19 अगस्त तक चलने वाले उत्सव में विभिन्न प्रतियोगिताओं का आयोजन किया जाएगा। नेगी ने कहा कि कार्यक्रम में हिस्सा लेने के लिए कलाकारों तथा सांस्कृतिक दलों के आवेदन मिलने शुरू हो गए हैं।
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