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राज्यपाल तक पहुंचा देवी-देवता को बलि चढ़ाने का मामला
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अमर उजाला ब्यूरो
कुल्लू। जिला कुल्लू में उपमंडल बंजार की ग्राम पंचायत बलागाड़ में कुछ लोगों की ओर से देवता मार्कंडेय ऋषि और माता त्रिपुरा बाला सुंदरी के नाम पर बलि दिए जाने का मामला अब राज्यपाल के द्वार पहुंच गया है। मामले को लेकर शिकायतकर्ताओं का एक प्रतिनिधिमंडल मंगलवार को राज्यपाल आचार्य देवव्रत से शिमला में मिला। साथ ही बताया कि मामला दर्ज होने के बाद भी आरोपियों के खिलाफ कार्रवाई नहीं की जा रही है।
ग्रामीणों ने 1984 से बंद की हुई बलि प्रथा को कुछ लोगों की ओर से फिर से शुरू करने पर आपत्ति जताई। इसके साथ ही ग्रामीणों ने उपायुक्त को साक्ष्य भी सौंपे। वीडियो में साफ तौर पर दिखाया गया है कि माता को बलि चढ़ाई जाती है। देवता के हारियान दुर्गा चंद ने कहा कि बलागाड़ पंचायत में देवता मार्कंडेय ऋषि और माता त्रिपुरा बाला सुंदरी के हारियानों ने क्षेत्र में बलि प्रथा पर प्रतिबंध लगाया है। 19 अगस्त 2018 को कुछ शरारती तत्वों की ओर से गैर कानूनी तरीके से इस परंपरा को तोड़ा गया। इसके बाद पुलिस भी लायुंड गांव पर पहुंची। मामले में एफआईआर भी दर्ज हुई। सितंबर माह से दोनों देवताओं के नाम पर बलि प्रथा चल रही है। पूर्व जिला परिषद सदस्य कमलेश नेगी ने कहा कि जब सारे साक्ष्य प्रशासन व पुलिस को दिए गए हैं तो उसके बाद भी आरोपियों पर कोई कार्रवाई नहीं हुई। आखिर में उन्हें राज्यपाल से मिलकर गुहार लगानी पड़ी है। गांव के बुजुर्ग लोतम राम ने कहा कि देवता के आदेश और ग्रामीणों की आपसी सहमति के बाद बलि प्रथा को बंद किया गया था। लेकिन कुछ शरारती तत्वों ने अपने स्वार्थ के लिए बलि देनी शुरू कर दी है। उन्होंने कहा कि राज्यपाल ने इस संबंध में पुलिस अधीक्षक शालिनी अग्निहोत्री को दिशा-निर्देश दिए हैं। मामले को लेकर एक प्रतिनिधिमंडल बुधवार को शालिनी अग्निहोत्री से भी मिला। पुलिस अधीक्षक ने कहा कि मामले में नियमों के अनुसार कार्रवाई अमल में लाई जाएगी।
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कुल्लू। जिला कुल्लू में उपमंडल बंजार की ग्राम पंचायत बलागाड़ में कुछ लोगों की ओर से देवता मार्कंडेय ऋषि और माता त्रिपुरा बाला सुंदरी के नाम पर बलि दिए जाने का मामला अब राज्यपाल के द्वार पहुंच गया है। मामले को लेकर शिकायतकर्ताओं का एक प्रतिनिधिमंडल मंगलवार को राज्यपाल आचार्य देवव्रत से शिमला में मिला। साथ ही बताया कि मामला दर्ज होने के बाद भी आरोपियों के खिलाफ कार्रवाई नहीं की जा रही है।
ग्रामीणों ने 1984 से बंद की हुई बलि प्रथा को कुछ लोगों की ओर से फिर से शुरू करने पर आपत्ति जताई। इसके साथ ही ग्रामीणों ने उपायुक्त को साक्ष्य भी सौंपे। वीडियो में साफ तौर पर दिखाया गया है कि माता को बलि चढ़ाई जाती है। देवता के हारियान दुर्गा चंद ने कहा कि बलागाड़ पंचायत में देवता मार्कंडेय ऋषि और माता त्रिपुरा बाला सुंदरी के हारियानों ने क्षेत्र में बलि प्रथा पर प्रतिबंध लगाया है। 19 अगस्त 2018 को कुछ शरारती तत्वों की ओर से गैर कानूनी तरीके से इस परंपरा को तोड़ा गया। इसके बाद पुलिस भी लायुंड गांव पर पहुंची। मामले में एफआईआर भी दर्ज हुई। सितंबर माह से दोनों देवताओं के नाम पर बलि प्रथा चल रही है। पूर्व जिला परिषद सदस्य कमलेश नेगी ने कहा कि जब सारे साक्ष्य प्रशासन व पुलिस को दिए गए हैं तो उसके बाद भी आरोपियों पर कोई कार्रवाई नहीं हुई। आखिर में उन्हें राज्यपाल से मिलकर गुहार लगानी पड़ी है। गांव के बुजुर्ग लोतम राम ने कहा कि देवता के आदेश और ग्रामीणों की आपसी सहमति के बाद बलि प्रथा को बंद किया गया था। लेकिन कुछ शरारती तत्वों ने अपने स्वार्थ के लिए बलि देनी शुरू कर दी है। उन्होंने कहा कि राज्यपाल ने इस संबंध में पुलिस अधीक्षक शालिनी अग्निहोत्री को दिशा-निर्देश दिए हैं। मामले को लेकर एक प्रतिनिधिमंडल बुधवार को शालिनी अग्निहोत्री से भी मिला। पुलिस अधीक्षक ने कहा कि मामले में नियमों के अनुसार कार्रवाई अमल में लाई जाएगी।
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