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भुंतर क्षेत्र के निजी स्कूल को एक लाख रुपये हर्जाना
Updated Mon, 16 Apr 2018 10:08 PM IST
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भुंतर के निजी स्कूल को एक लाख हर्जाना
छात्रा को प्रताड़ित करने, रोल नंबर रोकने पर उपभोक्ता फोरम कुल्लू ने की कार्रवाई
अमर उजाला ब्यूरो
कुल्लू।
जिला उपभोक्ता फोरम कुल्लू ने भुंतर क्षेत्र के एक निजी स्कूल और स्कूल प्रधानाचार्य को एक लाख रुपये हर्जाना भरने के आदेश दिए हैं। इसके अतिरिक्त 49 हजार रुपये फीस नौ प्रतिशत ब्याज दर के साथ और मुकदमे की फीस दस हजार रुपये चुकता करने के आदेश दिए हैं। यह आदेश फोरम ने गत 27 मार्च को दिए हैं।
स्कूल प्रबंधन और प्रधानाचार्य पर छात्रा को प्रताड़ित करने का आरोप था। छात्रा के दादा ने फोरम में शिकायत की थी कि शैक्षणिक सत्र 2015-16 में उनकी पौत्री भुंतर क्षेत्र के एक निजी स्कूल में जमा दो साइंस संकाय की छात्रा रही है। लेकिन स्कूल प्रबंधन की तरफ से उसका वार्षिक परीक्षा का रोल नंबर रोक दिया, जिस पर वह अंग्रेजी विषय का पेपर देने में असफल रही। बाद में पुलिस, जिला प्रशासन व शिक्षा विभाग के हस्तक्षेप से रोल नंबर मिला और उसने अन्य पेपर पुलिस सुरक्षा में दिए। बाद में परीक्षा परिणाम में वह अंग्रेजी विषय में अनुपस्थित पाई गई। वहीं अन्य पेपरों में वह अच्छे नंबरों से पास हुई। हालांकि बाद में अंग्रेजी विषय का पेपर भी छात्रा ने उत्तीर्ण कर लिया। इधर, स्कूल प्रबंधन का तर्क है कि छात्रा की 75 प्रतिशत हाजिरी पूरी नहीं हो पाई थी, जिस वजह से रोल नंबर रोका गया। स्कूल अब राज्य उपभोक्ता फोरम का दरवाजा खटखटाएगा।
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छात्रा को प्रताड़ित करने, रोल नंबर रोकने पर उपभोक्ता फोरम कुल्लू ने की कार्रवाई
अमर उजाला ब्यूरो
कुल्लू।
जिला उपभोक्ता फोरम कुल्लू ने भुंतर क्षेत्र के एक निजी स्कूल और स्कूल प्रधानाचार्य को एक लाख रुपये हर्जाना भरने के आदेश दिए हैं। इसके अतिरिक्त 49 हजार रुपये फीस नौ प्रतिशत ब्याज दर के साथ और मुकदमे की फीस दस हजार रुपये चुकता करने के आदेश दिए हैं। यह आदेश फोरम ने गत 27 मार्च को दिए हैं।
स्कूल प्रबंधन और प्रधानाचार्य पर छात्रा को प्रताड़ित करने का आरोप था। छात्रा के दादा ने फोरम में शिकायत की थी कि शैक्षणिक सत्र 2015-16 में उनकी पौत्री भुंतर क्षेत्र के एक निजी स्कूल में जमा दो साइंस संकाय की छात्रा रही है। लेकिन स्कूल प्रबंधन की तरफ से उसका वार्षिक परीक्षा का रोल नंबर रोक दिया, जिस पर वह अंग्रेजी विषय का पेपर देने में असफल रही। बाद में पुलिस, जिला प्रशासन व शिक्षा विभाग के हस्तक्षेप से रोल नंबर मिला और उसने अन्य पेपर पुलिस सुरक्षा में दिए। बाद में परीक्षा परिणाम में वह अंग्रेजी विषय में अनुपस्थित पाई गई। वहीं अन्य पेपरों में वह अच्छे नंबरों से पास हुई। हालांकि बाद में अंग्रेजी विषय का पेपर भी छात्रा ने उत्तीर्ण कर लिया। इधर, स्कूल प्रबंधन का तर्क है कि छात्रा की 75 प्रतिशत हाजिरी पूरी नहीं हो पाई थी, जिस वजह से रोल नंबर रोका गया। स्कूल अब राज्य उपभोक्ता फोरम का दरवाजा खटखटाएगा।
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