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ेवता ने की अधिक ओलावृष्टि होने की भविष्यवाणी
Updated Thu, 01 Mar 2018 07:40 PM IST
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अधिक ओलावृष्टि होने की भविष्यवाणी
माहुंटी के फागली उत्सव में उमड़ा आस्था का सैलाब
तीरंदाजी में अजय ने पकड़ा पहला तीर
अमर उजाला ब्यूरो
खराहल (कुल्लू)। घाटी के आराध्य देवता माहुंटी नाग के मंदिर स्थित कोट में फागली उत्सव में वीरवार को आस्था का सैलाब उमड़ा। सैकड़ों की तादाद में कोट गांव में पहुंचकर श्रद्धालुओं ने शीश नवाया और सुख-समृद्धि का आशीर्वाद लिया। सबसे पहले पवित्र जल से देवता की पूजा-अर्चना पुजारी के द्वारा की गई। उसके बाद देवता को ढोल नगाड़ों और नरसिंगों की स्वर लहरियों के बीच देवता को सौह में लाया गया। जहां पर बर्फ के गोलों के साथ देव नृत्य किया गया। उसके पश्चात बर्फ के गोलों को देव खेल से चारों ओर फेंका गया।
बताया जा रहा है कि इस बार बारिश कहीं पर ज्यादा और कहीं पर कम होगी। दक्षिण दिशा ज्यादा बर्फ गिरने से ओलावृष्टि अधिक होगी। फसल भी कही कम और कहीं ज्यादा होने की भविष्यवाणी की गई है। इस पर्व में आकर्षण का केंद्र देवता के तीर पकडने के लिए युवाओं में जद्दोजहद रही। देव खेल में गूर विशेष धनुष से तीर को चारों दिशाओं में छोड़े। इस तीर को पकड़ने के लिए हारियानों में खूब जोर आजमाइश हुई। पहला तीर पकड़ने में तलोगी के अजय कुमार रहा।
देवता के कारदार लाल चंद ठाकुर ने बताया कि धनुष से तीर छूटते ही युवाओं में खूब गहमागहमी हुई। फागली पर्व पर इस परंपरा का सदियों से निर्वहन किया जाता है। खराहल घाटी के अलावा कुल्लू के दूरदराज इलाकों के लोग भी देवता की चाकरी सैकड़ों की संख्या में पहुंचे। देवलु खराहल घाटी के लंबरदार अशोक ठाकुर, चुनी लाल, सोभाराम और पूर्ण चंद के अनुसार इस बार होली भी फागली उत्सव के साथ देवलुओं ने मनाई। वहीं पहले देव रस्म का निर्वहन देव परंपरा के अनुसार किया गया। बाद में तमाम मेहमानों के लिए धाम को आयोजन किया गया।
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माहुंटी के फागली उत्सव में उमड़ा आस्था का सैलाब
तीरंदाजी में अजय ने पकड़ा पहला तीर
अमर उजाला ब्यूरो
खराहल (कुल्लू)। घाटी के आराध्य देवता माहुंटी नाग के मंदिर स्थित कोट में फागली उत्सव में वीरवार को आस्था का सैलाब उमड़ा। सैकड़ों की तादाद में कोट गांव में पहुंचकर श्रद्धालुओं ने शीश नवाया और सुख-समृद्धि का आशीर्वाद लिया। सबसे पहले पवित्र जल से देवता की पूजा-अर्चना पुजारी के द्वारा की गई। उसके बाद देवता को ढोल नगाड़ों और नरसिंगों की स्वर लहरियों के बीच देवता को सौह में लाया गया। जहां पर बर्फ के गोलों के साथ देव नृत्य किया गया। उसके पश्चात बर्फ के गोलों को देव खेल से चारों ओर फेंका गया।
बताया जा रहा है कि इस बार बारिश कहीं पर ज्यादा और कहीं पर कम होगी। दक्षिण दिशा ज्यादा बर्फ गिरने से ओलावृष्टि अधिक होगी। फसल भी कही कम और कहीं ज्यादा होने की भविष्यवाणी की गई है। इस पर्व में आकर्षण का केंद्र देवता के तीर पकडने के लिए युवाओं में जद्दोजहद रही। देव खेल में गूर विशेष धनुष से तीर को चारों दिशाओं में छोड़े। इस तीर को पकड़ने के लिए हारियानों में खूब जोर आजमाइश हुई। पहला तीर पकड़ने में तलोगी के अजय कुमार रहा।
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देवता के कारदार लाल चंद ठाकुर ने बताया कि धनुष से तीर छूटते ही युवाओं में खूब गहमागहमी हुई। फागली पर्व पर इस परंपरा का सदियों से निर्वहन किया जाता है। खराहल घाटी के अलावा कुल्लू के दूरदराज इलाकों के लोग भी देवता की चाकरी सैकड़ों की संख्या में पहुंचे। देवलु खराहल घाटी के लंबरदार अशोक ठाकुर, चुनी लाल, सोभाराम और पूर्ण चंद के अनुसार इस बार होली भी फागली उत्सव के साथ देवलुओं ने मनाई। वहीं पहले देव रस्म का निर्वहन देव परंपरा के अनुसार किया गया। बाद में तमाम मेहमानों के लिए धाम को आयोजन किया गया।
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