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सुरक्षित नहीं कुल्लू-मनाली-लेह सड़क पर सफर
Updated Sun, 13 Aug 2017 09:40 PM IST
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कुल्लू। मंडी के जोगिंद्रनगर में पहाड़ी दरकने से यात्रियों से भरी दो बसों के मलबे में दबने की घटना से लोग रात को सफर करने से कतराने लगे हैं। एनएच-21 के पंडोह से औट के बीच बार-बार पहाड़ी दरकती रहती है। इससे लोगों में दहशत का माहौल है। ऐसे में घाटी के लोग कुल्लू से मंडी की ओर जाने से कतराने लगे हैं। जिला कुल्लू में भी कई सड़कें रात्रि सफर के लिए खतरनाक हैं। कुल्लू-मनाली-लेह मार्ग वाया रोहतांग दर्रा पर सफर करना यात्रियों के लिए आसान नहीं है। कुल्लू-मनाली एनएच-21 स्थित पतलीकूहल के 15 मील के पास बरसात के दिनों पहाड़ी से पत्थरों का गिरना जारी रहता है। जबकि, मनाली-केलांग-लेह की ओर जाना भी किसी खतरे से खाली नहीं है। यहां नेहरू कुंड, राहनीनाला, राहलाफाल, ब्यासनाला, मुलिंगढांक, राक्षीढांक, बारालाचा तथा
तंगलंगला में पहाड़ी दरकने की आशंका बनी रहती है। जुलाई में नेहरू कुंड, राहनानाला तथा बारालाचा में बार-बार पहाड़ी दकरने से कई दिनों तक आवाजाही प्रभावित रही। राहनीनाला में पहाड़ी दरकने से जिला प्रशासन ने दो से तीन दिन तक रोहतांग की ओर जाने वाले वाहनों पर रोक लगा दी थी। इसके अलावा 97 किलोमीटर लंबा औट-लुहरी-सैंज एनएच-305 वाहनों की आवाजाही के लिए अति संवेदनशील है। बाह्य सराज को जोडने वाले इस रोड पर बड़ानाला से लेकर जलोड़ी दर्रा, माशनूनाला और कोटनाला पर बरसात के दिनों पहाड़ी दरकने का खतरा हर समय बना रहता है। दो माह पूर्व बड़ानाला की पहाड़ी दकरने से एनएच पर कई घटों तक वाहनों की आवाजाही को ब्रेक लगी थी। भुंतर से धार्मिक नगरी मणिकर्ण को जोड़ने वाले 35 किलोमीटर मार्ग पर रात के समय सफर करना हादसे को न्योता देना है। यहां पर पहाड़ों को काट कर सड़क बनाई गई है। दशक पूर्व मणिकर्ण के पास दिन दहाड़े पहाड़ी के चट्टानों के आने से एक निजी बस चपेट में आई थी, जिसमें विदेशी सैलानियों सहित कई लोगों की दर्दनाक मौत हो गई थी।
मनाली के लिए होती है दो दर्जन बसों की आवाजाही
रात के समय पर्यटन नगरी मनाली से जाने तथा आने वाली बसों की संख्या करीब दो दर्जन के आसपास है। एनएच-21 स्थित 15 मील के पास बरसात में पहाड़ी के पत्थरों का गिरने का दौर लगातार जारी रहता है। इसके अलावा कुल्लू से आनी के लिए निगम की बस दोपहर करीब दो बजे ढालपुर से जाती है जो अंधेरा होने पर जलोड़ी दर्रा होकर गुजरती है। भुंतर-मणिकर्ण तथा मनाली-केलांग-लेह के बीच रात्रि बस सेवा नहीं है।
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तंगलंगला में पहाड़ी दरकने की आशंका बनी रहती है। जुलाई में नेहरू कुंड, राहनानाला तथा बारालाचा में बार-बार पहाड़ी दकरने से कई दिनों तक आवाजाही प्रभावित रही। राहनीनाला में पहाड़ी दरकने से जिला प्रशासन ने दो से तीन दिन तक रोहतांग की ओर जाने वाले वाहनों पर रोक लगा दी थी। इसके अलावा 97 किलोमीटर लंबा औट-लुहरी-सैंज एनएच-305 वाहनों की आवाजाही के लिए अति संवेदनशील है। बाह्य सराज को जोडने वाले इस रोड पर बड़ानाला से लेकर जलोड़ी दर्रा, माशनूनाला और कोटनाला पर बरसात के दिनों पहाड़ी दरकने का खतरा हर समय बना रहता है। दो माह पूर्व बड़ानाला की पहाड़ी दकरने से एनएच पर कई घटों तक वाहनों की आवाजाही को ब्रेक लगी थी। भुंतर से धार्मिक नगरी मणिकर्ण को जोड़ने वाले 35 किलोमीटर मार्ग पर रात के समय सफर करना हादसे को न्योता देना है। यहां पर पहाड़ों को काट कर सड़क बनाई गई है। दशक पूर्व मणिकर्ण के पास दिन दहाड़े पहाड़ी के चट्टानों के आने से एक निजी बस चपेट में आई थी, जिसमें विदेशी सैलानियों सहित कई लोगों की दर्दनाक मौत हो गई थी।
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मनाली के लिए होती है दो दर्जन बसों की आवाजाही
रात के समय पर्यटन नगरी मनाली से जाने तथा आने वाली बसों की संख्या करीब दो दर्जन के आसपास है। एनएच-21 स्थित 15 मील के पास बरसात में पहाड़ी के पत्थरों का गिरने का दौर लगातार जारी रहता है। इसके अलावा कुल्लू से आनी के लिए निगम की बस दोपहर करीब दो बजे ढालपुर से जाती है जो अंधेरा होने पर जलोड़ी दर्रा होकर गुजरती है। भुंतर-मणिकर्ण तथा मनाली-केलांग-लेह के बीच रात्रि बस सेवा नहीं है।
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