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सूखे से पेयजल योजनाओं में सप्लाई हुई बेहद कम
Updated Wed, 07 Feb 2018 09:52 PM IST
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water crisis
- फोटो : amarujala
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कुल्लू। जिला में इस बार सर्दियों में बेहद कम बर्फबारी और बारिश होने से सिंचाई एवं जनस्वास्थ्य विभाग की मुश्किलें बढ़ गई हैं। अभी से ही कुल्लू के कई गांवों में पेयजल संकट छा गया है। ग्रामीणों को पीने के लिए पानी उपलब्ध नहीं हो पा रहा है। खराहल, मणिकर्ण, लगवैली और बंजार के घाटी की पेयजल योजनाओं में सप्लाई बेहद कम हो गई है। जिससे लोग अब अपनी शिकायत को लेकर उपायुक्त के पास पहुंचने लगे हैं।
सोमवार को तलोगी पंचायत और बाराहार क्षेत्र के लोग शिकायत लेकर उपायुक्त के पास पहुंचे थे। वहीं विभाग के फील्ड स्टाफ को भी पेयजल आपूर्ति बहाल रखने में खूब पसीना बहाना पड़ रहा है, लेकिन सप्लाई कम होने आपूर्ति बहाल रखने में मुश्किलें आ रही हैं। विभाग के कर्मचारियों के अनुसार सूखे के बाद पानी की शिकायतों इजाफा हुआ है। प्रतिदिन पानी की लेकर लोगों की शिकायतें बढ़ती जा रही हैं, लेकिन पानी कम होने से शिकायतों को उसी निपटाना मुश्किल हो रहा है। दूसरी ओर प्राकृतिक जल स्रोतों में भी जलस्तर करीब 50 फीसदी घट गया है। बावड़ियों और अन्य प्राकृतिक चश्मों में पानी कम होने से लोगों को यहां पर घंटों इंतजार के बाद पानी मिल रहा है।
इस संबंध में घाटी के श्याम चंद, जितेंद्र कुमार, लोकेश ठाकुर, बहादुर सिंह और पवन के अनुसार पेयजल योजनाओं के स्रोत सूखने की कगार पर पहुंच गए हैं। अगर फरवरी माह में भी बर्फबारी नहीं होती है तो गर्मियों के दिनों में पेयजल संकट का सामना करना पड़ेगा। वहीं इस संबंध में आईपीएच विभाग के अधिशाषी अभियंता केआर कुल्लवी ने कहा कि बर्फबारी नहीं होने से पेयजल स्रोतों से सप्लाई कम हो गई है। फील्ड स्टाफ को पेयजल आपूर्ति बहाल रखने के निर्देश दिए गए हैं। विभाग पेयजल आपूर्ति बहाल रखने की पूरी कोशिश कर रहा है।
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सोमवार को तलोगी पंचायत और बाराहार क्षेत्र के लोग शिकायत लेकर उपायुक्त के पास पहुंचे थे। वहीं विभाग के फील्ड स्टाफ को भी पेयजल आपूर्ति बहाल रखने में खूब पसीना बहाना पड़ रहा है, लेकिन सप्लाई कम होने आपूर्ति बहाल रखने में मुश्किलें आ रही हैं। विभाग के कर्मचारियों के अनुसार सूखे के बाद पानी की शिकायतों इजाफा हुआ है। प्रतिदिन पानी की लेकर लोगों की शिकायतें बढ़ती जा रही हैं, लेकिन पानी कम होने से शिकायतों को उसी निपटाना मुश्किल हो रहा है। दूसरी ओर प्राकृतिक जल स्रोतों में भी जलस्तर करीब 50 फीसदी घट गया है। बावड़ियों और अन्य प्राकृतिक चश्मों में पानी कम होने से लोगों को यहां पर घंटों इंतजार के बाद पानी मिल रहा है।
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इस संबंध में घाटी के श्याम चंद, जितेंद्र कुमार, लोकेश ठाकुर, बहादुर सिंह और पवन के अनुसार पेयजल योजनाओं के स्रोत सूखने की कगार पर पहुंच गए हैं। अगर फरवरी माह में भी बर्फबारी नहीं होती है तो गर्मियों के दिनों में पेयजल संकट का सामना करना पड़ेगा। वहीं इस संबंध में आईपीएच विभाग के अधिशाषी अभियंता केआर कुल्लवी ने कहा कि बर्फबारी नहीं होने से पेयजल स्रोतों से सप्लाई कम हो गई है। फील्ड स्टाफ को पेयजल आपूर्ति बहाल रखने के निर्देश दिए गए हैं। विभाग पेयजल आपूर्ति बहाल रखने की पूरी कोशिश कर रहा है।
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