{"_id":"5c0d1aa1bdec2241641d469a","slug":"161544362657-kullu-news","type":"story","status":"publish","title_hn":"जलती मशालों के बीच ग्रामीणों ने किया नृत्य","category":{"title":"City & states","title_hn":"शहर और राज्य","slug":"city-and-states"}}
जलती मशालों के बीच ग्रामीणों ने किया नृत्य
Updated Sun, 09 Dec 2018 07:15 PM IST
विज्ञापन
खबरें लगातार पढ़ने के लिए अमर उजाला एप डाउनलोड करें
या
वेबसाइट पर पढ़ना जारी रखने के लिए वीडियो विज्ञापन देखें
अगर आपके पास प्रीमियम मेंबरशिप है तो
जलती मशालों के साथ नाचे, परिक्रमा की
बंजार के कई क्षेत्रों में बूढ़ी दिवाली की धूम, बुरी शक्तियों को भगाया दूर
अमर उजाला ब्यूरो
बंजार (कुल्लू)। उपमंडल बंजार में बूढ़ी दिवाली धूमधाम से मनाई गई। मार्गशीर्ष की अमावस्या की रात को उपमंडल के कई गांवों में पर्व की धूम रही और ग्रामीणों ने जलती मशालों के साथ नृत्य किया। साथ ही कई जगहों पर लोगों ने मशालों के साथ क्षेत्र की परिक्रमा की।
घाटी में चिपणी, चेत्थर, गुशैणी, शपनील, थाटा डाहर व शिल्ही में ग्रामीणों ने विशेष लकड़ी की मशाल के साथ ढोल-नगाड़ों की थाप पर नाचते हुए एक विशेष स्थान पर एकत्रित हुए। जहां सभी लोगों ने अपनी जलती मशालों को एक अग्निकुंड में डाला और उसके चारों और गाने गाकर जमकर झूमे। कई जगहों पर लोगों ने मशालों को जलाकर पूरे क्षेत्र की परिक्रमा की तथा भूत प्रेत व अन्य बुरी शक्तियों को दूर भगाया। रमेश, गोपाल, कार्तिक, सुमित पंडित, धनेश्वर, टेक सिंह, रमेश शर्मा तथा कमल किशोर का कहना है कि इस परंपरा का शास्त्रों में भी उल्लेख है। उन्होंने कहा कि दिवाली में उपमंडल के गांव में मेहमानबाजी का भी खूब दौर चला। उन्होंने कहा कि इस परंपरा का अगर निर्वहन नहीं किया गया तो देवी-देवता नाराज हो जाते हैं। ऐसे में पूरी घाटी में बूढ़ी दिवाली को सदियों से चल रही परंपरा के अनुसार मनाया जाता है।
विज्ञापन
बंजार के कई क्षेत्रों में बूढ़ी दिवाली की धूम, बुरी शक्तियों को भगाया दूर
अमर उजाला ब्यूरो
बंजार (कुल्लू)। उपमंडल बंजार में बूढ़ी दिवाली धूमधाम से मनाई गई। मार्गशीर्ष की अमावस्या की रात को उपमंडल के कई गांवों में पर्व की धूम रही और ग्रामीणों ने जलती मशालों के साथ नृत्य किया। साथ ही कई जगहों पर लोगों ने मशालों के साथ क्षेत्र की परिक्रमा की।
घाटी में चिपणी, चेत्थर, गुशैणी, शपनील, थाटा डाहर व शिल्ही में ग्रामीणों ने विशेष लकड़ी की मशाल के साथ ढोल-नगाड़ों की थाप पर नाचते हुए एक विशेष स्थान पर एकत्रित हुए। जहां सभी लोगों ने अपनी जलती मशालों को एक अग्निकुंड में डाला और उसके चारों और गाने गाकर जमकर झूमे। कई जगहों पर लोगों ने मशालों को जलाकर पूरे क्षेत्र की परिक्रमा की तथा भूत प्रेत व अन्य बुरी शक्तियों को दूर भगाया। रमेश, गोपाल, कार्तिक, सुमित पंडित, धनेश्वर, टेक सिंह, रमेश शर्मा तथा कमल किशोर का कहना है कि इस परंपरा का शास्त्रों में भी उल्लेख है। उन्होंने कहा कि दिवाली में उपमंडल के गांव में मेहमानबाजी का भी खूब दौर चला। उन्होंने कहा कि इस परंपरा का अगर निर्वहन नहीं किया गया तो देवी-देवता नाराज हो जाते हैं। ऐसे में पूरी घाटी में बूढ़ी दिवाली को सदियों से चल रही परंपरा के अनुसार मनाया जाता है।
विज्ञापन