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मटर की आधी फसल निगल गया सूखा, बैकफुट पर किसान
Updated Tue, 27 Mar 2018 05:47 PM IST
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सूखे से मटर की फसल प्रभावित
समय पर बारिश नहीं होने से पेश आई समस्या
जिला में 1200 हेक्टेयर भूमि पर होती है मटर
उमर उजाला ब्यूरो
कुल्लू/खराहल। सेब उत्पादन के अलावा कुल्लू जिला में कुछ वर्षों से नकदी फसल के रूप में मटर की खेती बडे़ पैमाने पर की जा रही है। हालांकि इस साल सर्दियों में समय पर बारिश और बर्फबारी नहीं होने से इसके उत्पादन में गिरावट के आसार बन गए हैं। बताया जा रहा है कि सर्दियों में पर्याप्त बारिश और बर्फबारी नहीं होने से मटर के पौधे आशा के अनुरूप विकसित नहीं हो पाए हैं। ऐसे में कई पौधे सूखे की चपेट में आने से सूख गए।
वर्तमान में जिला में 1200 हेक्टेयर भूमि पर मटर की खेती हो रही है। औसतन जिले में बीस हजार क्विंटल हरा मटर कुल्लू की विभिन्न मंडियों में पहुंचता है। इस बार सूखे से किसान बैकफुट पर हैं। इस संबंध में घाटी के किसान अमित, रामनाथ ठाकुर, जोग राज, कर्मचंद, वीर सिंह, ज्ञान ठाकुर, जयचंद, अनूप भंडारी, संजीव शर्मा और सतीश ठाकुर आदि के अनुसार सर्दियों में कम बारिश के चलते बिजाई में भी देरी हो गई। वहीं समय पर बारिश और बर्फबारी न होने से मटर पूरी तरह से अंकुरित नहीं हो सका। जिससे अब खेतों में फसल भरपूर विकसित नहीं हो पाई।
किसान सभा के उपाध्यक्ष देवराज नेगी के अनुसार समय पर बारिश न होने से मटर की फसल गत वर्ष से कम है। वहीं, रही सही कसर अब लावारिस पशुओं ने पूरी कर दी है। ऐसे गत साल की तुलना में मटर उत्पादन में कमी देखी जा रही है। अमूमन मार्च माह के अंतिम पखवाडे़ में सीजन शुरू हो जाता था, लेकिन देरी से बिजाई के कारण अभी फसल भरपूर तैयार नहीं हुई है। कृषि विभाग के उप निदेशक रतन भारद्वाज के अनुसार समय पर बारिश नहीं होने से फसल थोड़ी प्रभावित हुई है। हाल ही में हुई बारिश इसके लिए वरदान साबित होगी।
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समय पर बारिश नहीं होने से पेश आई समस्या
जिला में 1200 हेक्टेयर भूमि पर होती है मटर
उमर उजाला ब्यूरो
कुल्लू/खराहल। सेब उत्पादन के अलावा कुल्लू जिला में कुछ वर्षों से नकदी फसल के रूप में मटर की खेती बडे़ पैमाने पर की जा रही है। हालांकि इस साल सर्दियों में समय पर बारिश और बर्फबारी नहीं होने से इसके उत्पादन में गिरावट के आसार बन गए हैं। बताया जा रहा है कि सर्दियों में पर्याप्त बारिश और बर्फबारी नहीं होने से मटर के पौधे आशा के अनुरूप विकसित नहीं हो पाए हैं। ऐसे में कई पौधे सूखे की चपेट में आने से सूख गए।
वर्तमान में जिला में 1200 हेक्टेयर भूमि पर मटर की खेती हो रही है। औसतन जिले में बीस हजार क्विंटल हरा मटर कुल्लू की विभिन्न मंडियों में पहुंचता है। इस बार सूखे से किसान बैकफुट पर हैं। इस संबंध में घाटी के किसान अमित, रामनाथ ठाकुर, जोग राज, कर्मचंद, वीर सिंह, ज्ञान ठाकुर, जयचंद, अनूप भंडारी, संजीव शर्मा और सतीश ठाकुर आदि के अनुसार सर्दियों में कम बारिश के चलते बिजाई में भी देरी हो गई। वहीं समय पर बारिश और बर्फबारी न होने से मटर पूरी तरह से अंकुरित नहीं हो सका। जिससे अब खेतों में फसल भरपूर विकसित नहीं हो पाई।
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किसान सभा के उपाध्यक्ष देवराज नेगी के अनुसार समय पर बारिश न होने से मटर की फसल गत वर्ष से कम है। वहीं, रही सही कसर अब लावारिस पशुओं ने पूरी कर दी है। ऐसे गत साल की तुलना में मटर उत्पादन में कमी देखी जा रही है। अमूमन मार्च माह के अंतिम पखवाडे़ में सीजन शुरू हो जाता था, लेकिन देरी से बिजाई के कारण अभी फसल भरपूर तैयार नहीं हुई है। कृषि विभाग के उप निदेशक रतन भारद्वाज के अनुसार समय पर बारिश नहीं होने से फसल थोड़ी प्रभावित हुई है। हाल ही में हुई बारिश इसके लिए वरदान साबित होगी।
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