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सेब के लिए ग्राफ्टिंग से नई किस्में करें ईजाद

Wed, 06 Mar 2019 07:10 PM IST
Shimla	 Bureau शिमला ब्यूरो
Updated Wed, 06 Mar 2019 07:10 PM IST
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सेब के लिए ग्राफ्टिंग से नई किस्में करें ईजाद
सेब के लिए ग्राफ्टिंग से नई किस्में करें ईजाद
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बागवानी विशेषज्ञों ने बागवानों को दी सलाह, बगीचों में वायरस रहित लगाएं कलमें
अमर उजाला ब्यूरो
कुल्लू/खराहल। बगीचों में पुरानी वैरायटी को बदलने के लिए बागवान ग्राफ्टिंग से नई किस्में ईजाद करें। बागवान उम्दा किस्मों की कलमें लगाकर पैदावार को और बढ़ा सकते हैं। बागवानों के लिए जहां मार्केटिंग को ध्यान में रखते हुए नई किस्मों का चुनाव करना अति आवश्यक है, वहीं ऊंचाई के हिसाब से ही नई किस्मों को लगाना चाहिए।
सेब बागवानी में पौधों में कलम करने के लिए कई तकनीक उपयोग में लाई जा रही है। टंग ग्राफ्टिंग, कलेफट, ब्रिज ग्राफ्टिंग टी बुडिंग और चिप बुडिंग से कलम की जा सकती है। विशेषज्ञों का कहना है कि पांच से सात साल के पौधों पर कलमें अधिक तेजी से विकसित हो जाती हैं और तीन साल के भीतर ही फल लगना भी शुरू हो जाते हैं। घाटी के प्रगतिशील बागवानों ने पुरानी किस्मों को ग्राफ्टिंग के जरिए नई और उम्दा किस्मों को तैयार किया जा रहा है। बागवान ज्ञान ठाकुर, अमित ठाकुर, कैलाश ठाकुर, देवराज नेगी, अखिल ठाकुर और चमन आदि का कहना है कि वे इस कार्य को पिछले चार सालों कर रहे हैं। उन्होंने कहा कि कई पुरानी किस्मों में रंग न आने की समस्या थी। ऐसे में बेहतर किस्मों को इन पौधों पर लगाया जा रहा है।
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ये हैं सेब की किस्में
कई बागवान स्पर वैरायटी को भी तरजीह दे रहे हैं। सेब में सुपर चीफ, आरगेन स्पर, विलोक्सन, जैरामाइन और स्कारलेट, वाशिगंटन आदि प्रजाति को अपने बगीचों में इन दिनों लगाने में व्यस्त है।
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ये हैं नाशपाती, प्लम की किस्में
नाशपाती में रेडवाटलेट, मैक्सवाटलेट, पैखम, कनोल रेड कैनकॉर्ड आदि किस्मों को तैयार कर रहे हैं। प्लम में प्रून, ब्लैक अंबर, सेटारोजा, मैरीपोजा आदि को बगीचों में ग्राफ्टिंग से तैयार कर रहे हैं।

बागवानों को वायरस रहित कलमें ही बगीचों में लगानी चाहिए। कलमों की डंडियां प्रमाणित नर्सरी या विभाग के शोध केंद्रों से ही जांच कर लेनी चाहिए।
-राकेश गोयल, उप निदेशक, बागवानी विभाग
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