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क्षेत्रीय अस्पताल को पांच माह बाद मिला गायनी विशेषज्ञ
Updated Thu, 21 Dec 2017 09:33 PM IST
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doctor and patient
- फोटो : amarujala
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कुल्लू। क्षेत्रीय अस्पताल कुल्लू में पांच माह के बाद अब महिला मरीजों को राहत मिलेगी। स्वास्थ्य विभाग ने डेपुटेशन पर मंडी अस्पताल के विशेषज्ञ चिकित्सक डॉ अनिल कुमार को एक हफ्ते के डेपुटेशन पर भेजा है। चिकित्सक ने कुल्लू अस्पताल में अपनी सेवाएं देनी शुरू कर दी हैं। ऐसे में अब मरीजों को परेशानी से राहत मिल रही है।
अभी तक अस्पताल में गायनी विशेषज्ञों के पदा रिक्त होने से गर्भवती महिलाओं को कुल्लू अस्पताल से मंडी के लिए रेफर किया जाता रहा है। यहां तैनात दोनों गायनी विशेषज्ञों की यहां से तबादला होने से मरीजों को परेशानी का सामना करना पड़ रहा है। हालांकि स्वास्थ्य विभाग द्वारा भेजा गया चिकित्सक भी 23 दिसंबर तक ही अपनी सेवाएं देगा और मरीजों फिर से उपचार के लिए या तो मंडी जाना पड़ेगा या फिर निजी अस्पतालों का रुख करना पड़ेगा।
स्थानीय रमेश चंद, दिले राम, अनिल शर्मा, राजेश कुमार, दीपा, उमा, सीमा तथा निर्मला ठाकुर के अनुसार डेपुटेशन के आधार पर मरीजों को कोई फायदा नहीं होने वाला है। 300 बेड के कुल्लू अस्पताल में न केवल जिला कुल्लू के मरीज उपचार करवाने के लिए आते हैं बल्कि लाहौल, पांगी के साथ मंडी जिला के द्रंग और बालीचौकी क्षेत्र के लोग कुल्लू में ही उपचार को आते हैं। ऐसे में सरकार और स्वास्थ्य विभाग को डेपुटेशन के बजाए कोई स्थायी हल निकालना चाहिए।
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वहीं इस संबंध में क्षेत्रीय अस्पताल कुल्लू के चिकित्सा अधीक्षक कुल्लू डॉ केएस मल्होत्रा ने कहा कि मरीजों को आ रही समस्या को देखते हुए स्वास्थ्य विभाग ने मंडी अस्पताल के विशेषज्ञ डॉ अनिल कुमार अब क्षेत्रीय अस्पताल कुल्लू में बतौर डेपुटेशन के आधार पर अपनी सेवाएं दे रहे हैं।
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अभी तक अस्पताल में गायनी विशेषज्ञों के पदा रिक्त होने से गर्भवती महिलाओं को कुल्लू अस्पताल से मंडी के लिए रेफर किया जाता रहा है। यहां तैनात दोनों गायनी विशेषज्ञों की यहां से तबादला होने से मरीजों को परेशानी का सामना करना पड़ रहा है। हालांकि स्वास्थ्य विभाग द्वारा भेजा गया चिकित्सक भी 23 दिसंबर तक ही अपनी सेवाएं देगा और मरीजों फिर से उपचार के लिए या तो मंडी जाना पड़ेगा या फिर निजी अस्पतालों का रुख करना पड़ेगा।
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स्थानीय रमेश चंद, दिले राम, अनिल शर्मा, राजेश कुमार, दीपा, उमा, सीमा तथा निर्मला ठाकुर के अनुसार डेपुटेशन के आधार पर मरीजों को कोई फायदा नहीं होने वाला है। 300 बेड के कुल्लू अस्पताल में न केवल जिला कुल्लू के मरीज उपचार करवाने के लिए आते हैं बल्कि लाहौल, पांगी के साथ मंडी जिला के द्रंग और बालीचौकी क्षेत्र के लोग कुल्लू में ही उपचार को आते हैं। ऐसे में सरकार और स्वास्थ्य विभाग को डेपुटेशन के बजाए कोई स्थायी हल निकालना चाहिए।
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वहीं इस संबंध में क्षेत्रीय अस्पताल कुल्लू के चिकित्सा अधीक्षक कुल्लू डॉ केएस मल्होत्रा ने कहा कि मरीजों को आ रही समस्या को देखते हुए स्वास्थ्य विभाग ने मंडी अस्पताल के विशेषज्ञ डॉ अनिल कुमार अब क्षेत्रीय अस्पताल कुल्लू में बतौर डेपुटेशन के आधार पर अपनी सेवाएं दे रहे हैं।