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Himachal News : कीरतपुर-नेरचौक फोरलेन तीन साल बाद भी चालकों के लिए असुरक्षित, बरसात में वनवे करना पड़ रहा सफर
Sun, 31 Aug 2025 12:58 PM IST
अंकेश डोगरा
सरोज पाठक, संवाद न्यूज एजेंसी, बिलासपुर
सरोज पाठक, संवाद न्यूज एजेंसी, बिलासपुर
Published by: अंकेश डोगरा
Updated Sun, 31 Aug 2025 12:58 PM IST
सार
यातायात शुरू होने के तीन साल बाद भी कीरतपुर से नेरचौक तक का फोरलेन सफर के लिए सुरक्षित नहीं हो पाया है। मैहला, थापना, समलेटू में हर बार बरसात में यातायात वनवे करना पड़ता है। पढ़ें पूरी खबर...
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समलेटू में हुए भूस्खलन की चपेट में आया एक ट्रक।
- फोटो : अमर उजाला नेटवर्क
विस्तार
तेज रफ्तार और सुरक्षित सफर के लिए बनाए गए फोरलेन पर सफर जान को जोखिम साबित हो रहा है। यातायात शुरू होने के तीन साल बाद भी कीरतपुर से नेरचौक तक का फोरलेन सफर के लिए सुरक्षित नहीं हो पाया है। हर बरसात में कई जगह पहाड़ों से भूस्खलन से वाहनों की गति थम जाती है। पहाड़ों की अवैज्ञानिक कटिंग से लोगों के लिए यह हाईवे वाहन चालकों के लिए मुसीबत का सबब बन चुका है। अगस्त 2023 में इस फोरलेन को ट्रायल पर खोलने के बाद इसे सुचारु किया गया। हालांकि हर बरसात में मैहला, समलेटू, थापना, दड़याना, पनोह और बलोह टोल प्लाजा के पास बड़े पैमाने पर भूस्खलन होता है। भूस्खलन के चलते मंडी भराड़ी में करीब आठ घर गिरने की जद में हैं।
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मैहला, थापना, समलेटू में हर बार बरसात में यातायात वनवे करना पड़ता है। यहां भूस्खलन से एक मौत भी हो चुकी है। विशेषज्ञों का कहना है कि मौजा मैहला के डडनाल जंगल में मूल अलाइनमेंट को बदलकर पहाड़ों की 90 डिग्री की कटिंग की गई। इससे बरसात में जानलेवा स्थितियां बनती हैं। वाहन चालक पिछले तीन साल से यहां वन-वे व्यवस्था के कारण परेशान हैं। इस हाईवे के निर्माण से निकले मलबे को कलवर्ट और पुलियों के आगे डंप कर दिया है। पुलों के दाएं-बाएं और नीचे मलबे के अंबार लगे हैं।
हाईवे के दोनों ओर जल निकासी की नालियों तक में मलबा भरा है। कई स्थानों पर तो नालियां बनाई ही नहीं गईं। मानसून का पानी उपजाऊ भूमि और घासनियों में घुस रहा है और लगातार नुकसान पहुंचा रहा है। रिटेनिंग वाल और ब्रेस्ट वाल न होने से लगातार कई जगह भूस्खलन हो रहा है। लोग सवाल उठा रहे हैं कि सरकार टैक्स और टोल फीस तो पूरी वसूलती है लेकिन हाईवे पर 60 किलोमीटर प्रति घंटे से ऊपर गाड़ी चलाना मुमकिन नहीं जबकि लोकल सड़कों पर भी यही स्पीड लिमिट है। ऐसे में हाईवे का कोई फायदा नहीं है। बताते चलें कि इस फोरलेन को 4200 करोड़ रुपये की लागत से कीरतपुर से नेरचौक तक 77 किलोमीटर में बनाया गया है।
हाईवे के दोनों ओर जल निकासी की नालियों तक में मलबा भरा है। कई स्थानों पर तो नालियां बनाई ही नहीं गईं। मानसून का पानी उपजाऊ भूमि और घासनियों में घुस रहा है और लगातार नुकसान पहुंचा रहा है। रिटेनिंग वाल और ब्रेस्ट वाल न होने से लगातार कई जगह भूस्खलन हो रहा है। लोग सवाल उठा रहे हैं कि सरकार टैक्स और टोल फीस तो पूरी वसूलती है लेकिन हाईवे पर 60 किलोमीटर प्रति घंटे से ऊपर गाड़ी चलाना मुमकिन नहीं जबकि लोकल सड़कों पर भी यही स्पीड लिमिट है। ऐसे में हाईवे का कोई फायदा नहीं है। बताते चलें कि इस फोरलेन को 4200 करोड़ रुपये की लागत से कीरतपुर से नेरचौक तक 77 किलोमीटर में बनाया गया है।
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भारी ब्लास्टिंग, अवैध डंपिंग और बेइंतहा माइनिंग ने खोखले किए पहाड़ इस फोरलेन के निर्माण के लिए पहाड़ों का 90 डिग्री पर बेतरतीब कटान, भारी ब्लास्टिंग, अवैध डंपिंग, बेइंतहा माइनिंग ने पहाड़ों को खोखला किया ही, नदी-नालों के रास्ते भी बंद कर दिए हैं। इसके निर्माण में पहाड़ों से निकाली गई लाखों टन मिट्टी बिलासपुर, मंडी, कुल्लू जिले के नदी-नालों और झील के किनारे डंप कर दिया। इसीका परिणाम है कि हर बरसात में इस फोरलेन पर मनाली तक तबाही हो रही है। मदन लाल शर्मा, महासचिव, फोरलेन विस्थापित एवं प्रभावित समिति - गौरव शर्मा, जिला परिषद सदस्य, बामटा वार्ड
एनएचएआई को दिशानिर्देश दिए हैं कि फोरलेन पर हो रहे भूस्खलन को रोकने का स्थायी समाधान करें। मंडी-भराड़ी में घरों को सुरक्षित करने के लिए डंगा लगाने के लिए कहा गया है।- राहुल कुमार, उपायुक्त, बिलासपुर
एनएचएआई फोरलेन पर बिलासपुर के मैहला में पहाड़ को काटकर 25 मीटर अंदर जा रहे हैं ताकि भूस्खलन न हो। इसी तर्ज पर बाकी भूस्खलन वाली लोकेशन पर भी काम किया जाएगा। इसके पूरा होने के बाद भूस्खलन का स्थायी सामधान होगा। - वरुण चारी, परियोजना निदेशक, कीरतपुर-मनाली फोरलेन