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Kangra News: जर्मन तकनीक की मदद से भांग की खेती किसानों के लिए होगी लाभकारी
Sun, 26 Jan 2025 08:03 AM IST
शिमला ब्यूरो
संवाद न्यूज एजेंसी, कांगड़ा
संवाद न्यूज एजेंसी, कांगड़ा
Updated Sun, 26 Jan 2025 08:03 AM IST
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सर्व समाज जनहित मंच ने भांग को वैज्ञानिक रूप से वैध करने पर दी बधाई
बोले, भांग से कई बीमारियां ठीक होने की है पूरी संभावना
संवाद न्यूज एजेंसी
धर्मशाला। सर्व समाज जनहित मंच की विशेष बैठक में भुवनेश सूद ने सुक्खू सरकार को भांग को वैज्ञानिक रूप से वैध करने के लिए बधाई दी। उन्होंने कहा कि यह एक ऐतिहासिक फैसला है और केरल और हिमाचल दो ऐसे राज्य हैं, जहां पर मेडिसिनल प्लांट्स या औषधीय प्लांट्स की प्राकृतिक देन है।
भांग की खेती से हिमाचल के किसानों और सरकार को कई लाभ हो सकते हैं। इससे किसानों की आय में वृद्धि हो सकती है और सरकार को राजस्व में वृद्धि हो सकती है। इसके अलावा, भांग से बनने वाले उत्पादों जैसे कि कपड़े, दवाइयां, और कागज से रोजगार के अवसर भी पैदा हो सकते हैं। जर्मन तकनीक की मदद से भांग की खेती किसानों के लिए और भी लाभकारी हो सकती है। इससे भांग की गुणवत्ता में सुधार हो सकता है और उत्पादन में वृद्धि हो सकती है। इसके अलावा, जर्मन तकनीक से भांग की खेती में उपयोग होने वाले बीज और अन्य सामग्री की गुणवत्ता में भी सुधार हो सकता है। उन्होंने कहा कि भांग एक औषधीय पौधा है जिसमें कई प्रकार के यौगिक होते हैं जो विभिन्न बीमारियों के इलाज में मदद कर सकते हैं। यहां कुछ बीमारियां हैं जिनमें भांग से ठीक होने की संभावना है। भांग
मानसिक स्वास्थ्य संबंधी बीमारियां जैसे चिंता और तनाव, अवसाद, नींद की समस्याएं, पोस्ट-ट्रॉमेटिक स्ट्रेस डिसऑर्डर, सिज़ोफ्रेनिया, बाइपोलर डिसऑर्डर, एंग्जाइटी डिसऑर्डर, ओब्सेसिव-कंपल्सिव डिसऑर्डर, पैनिक अटैक, सोशल एंग्जाइटी डिसऑर्डर को कम करने में मदद कर सकती है। इसके अलावा शारीरिक स्वास्थ्य संबंधी बीमारियां में जैसे कैंसर, मल्टीपल स्केलेरोसिस, पार्किंसंस रोग, एचआईवी/एड्स, गठिया, माइग्रेन, पेट की समस्याएं, हृदय रोग, मधुमेह के लक्षणों को कम करने मदद कर सकते है।
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बोले, भांग से कई बीमारियां ठीक होने की है पूरी संभावना
संवाद न्यूज एजेंसी
धर्मशाला। सर्व समाज जनहित मंच की विशेष बैठक में भुवनेश सूद ने सुक्खू सरकार को भांग को वैज्ञानिक रूप से वैध करने के लिए बधाई दी। उन्होंने कहा कि यह एक ऐतिहासिक फैसला है और केरल और हिमाचल दो ऐसे राज्य हैं, जहां पर मेडिसिनल प्लांट्स या औषधीय प्लांट्स की प्राकृतिक देन है।
भांग की खेती से हिमाचल के किसानों और सरकार को कई लाभ हो सकते हैं। इससे किसानों की आय में वृद्धि हो सकती है और सरकार को राजस्व में वृद्धि हो सकती है। इसके अलावा, भांग से बनने वाले उत्पादों जैसे कि कपड़े, दवाइयां, और कागज से रोजगार के अवसर भी पैदा हो सकते हैं। जर्मन तकनीक की मदद से भांग की खेती किसानों के लिए और भी लाभकारी हो सकती है। इससे भांग की गुणवत्ता में सुधार हो सकता है और उत्पादन में वृद्धि हो सकती है। इसके अलावा, जर्मन तकनीक से भांग की खेती में उपयोग होने वाले बीज और अन्य सामग्री की गुणवत्ता में भी सुधार हो सकता है। उन्होंने कहा कि भांग एक औषधीय पौधा है जिसमें कई प्रकार के यौगिक होते हैं जो विभिन्न बीमारियों के इलाज में मदद कर सकते हैं। यहां कुछ बीमारियां हैं जिनमें भांग से ठीक होने की संभावना है। भांग
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मानसिक स्वास्थ्य संबंधी बीमारियां जैसे चिंता और तनाव, अवसाद, नींद की समस्याएं, पोस्ट-ट्रॉमेटिक स्ट्रेस डिसऑर्डर, सिज़ोफ्रेनिया, बाइपोलर डिसऑर्डर, एंग्जाइटी डिसऑर्डर, ओब्सेसिव-कंपल्सिव डिसऑर्डर, पैनिक अटैक, सोशल एंग्जाइटी डिसऑर्डर को कम करने में मदद कर सकती है। इसके अलावा शारीरिक स्वास्थ्य संबंधी बीमारियां में जैसे कैंसर, मल्टीपल स्केलेरोसिस, पार्किंसंस रोग, एचआईवी/एड्स, गठिया, माइग्रेन, पेट की समस्याएं, हृदय रोग, मधुमेह के लक्षणों को कम करने मदद कर सकते है।
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