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Kangra News: जब नहीं मिला किसी का सहारा तो ग्रामीण ने खुद उठा लिया फाबड़ा
Sun, 10 Nov 2024 07:21 AM IST
शिमला ब्यूरो
संवाद न्यूज एजेंसी, कांगड़ा
संवाद न्यूज एजेंसी, कांगड़ा
Updated Sun, 10 Nov 2024 07:21 AM IST
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जब नगर निगम की नहीं हिली चूहल तो खुद सुचारु कर दी कूहल
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अमर उजाला इंपैक्ट...
सकोह के ग्रामीणों ने खुद ही सुचारु कर दी सिंचाई कूहल, नगर निगम, प्रशासन और सरकार को दिखाया आइना
अमर उजाला में खबर छपने के बाद ग्रामीण खुद आए आगे
संवाद न्यूज एजेंसी
धर्मशाला। नगर निगम के वार्ड नंबर आठ और नौ सकोह के लोगों को जब किसी का सहारा नहीं मिला तो उन्होंने खुद काम कर सिंचाई कूहल को सुचारु कर नगर निगम, प्रशासन और सरकार को आईना दिखा दिया। शनिवार को ग्रामीणों ने एकत्रित होकर खनियारा से सकोह गांव के लिए जाने वाली कूहल को अपने स्तर पर ठीक कर दिया और कूहल में खेतों के सिंचाई के लिए पानी ले आए।
ग्रामीण सुबह से भी कूहल को ठीक करने के लिए जुट गए थे। कड़ी मेहनत के बाद ग्रामीण अपने कार्य से सफल रहे और सूख रही खेतों की सिंचाई के लिए पानी ले आए। शनिवार को अमर उजाला समाचार पत्र में सकोह वार्ड में सूखी कूहल की खबर के बाद ग्रामीणों ने खुद ही इसे ठीक करने का निर्णय लिया।
ग्रामीणों में नरेश भरवाल, सुभाष कुमार, रमेश अटवाल, अमरीक सिंह, जोनू, पंकज, रजिंद्र, रजनीश कुमार, संजीव धीमान, नरेश भाद्वाज, कुनाल, मोहिंद्र आदि ने बताया कि सालों से बंद कूहल को ठीक करने के लिए नगर निगम की ओर से कोई प्रयास नहीं किए गए। अंत में ग्रामीणों को ही खुद कूहल ठीक करनी पड़ी। टूटी कूहल को ठीक करने के लिए किसानों ने कूहल में बोरियों में मिट्टी भरकर रही।
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उन्होंने सरकार से मांग की है कि कूहलों का संरक्षण किया जाए, जिससे कि किसानों को परेशान न होना पड़े। ग्रामीणों ने कहा कि नगर निगम के अगले चुनावों में नेताओं को वार्ड में नहीं आने दिया जाएगा। जानकारी के अनुसार खनियारा से आने वाली कूहल पर चार हजार से अधिक किसान निर्भर हैं। यह कूहल हजारों कनाल भूमि की सिंचाई करती है, लेकिन अनदेखी के कारण कूहल सूख गई थी और किसानों के खेत बंजर हो रहे थे।
बाक्स:
नहीं आया कोई पार्षद
शनिवार सुबह से भारी संख्या में ग्रामीण कूहल को ठीक करने के लिए पहुंच, लेकिन वहां से दोनों पार्षदों में से एक भी मौके पर ग्रामीणों की सहायता के लिए नहीं पहुंचा। इस वजह से ग्रामीणों में दोनों पार्षदों और नगर निगम के खिलाफ रोष प्रकट किया। उन्होंने कहा कि गांव की समस्या के लिए अगर संबंधित वार्ड पार्षद आगे नहीं आएंगे तो फिर सरकार, प्रशासन या नगर निगम के अधिकारियों से क्या उम्मीद की जा सकती है।
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अमर उजाला इंपैक्ट...
सकोह के ग्रामीणों ने खुद ही सुचारु कर दी सिंचाई कूहल, नगर निगम, प्रशासन और सरकार को दिखाया आइना
अमर उजाला में खबर छपने के बाद ग्रामीण खुद आए आगे
संवाद न्यूज एजेंसी
धर्मशाला। नगर निगम के वार्ड नंबर आठ और नौ सकोह के लोगों को जब किसी का सहारा नहीं मिला तो उन्होंने खुद काम कर सिंचाई कूहल को सुचारु कर नगर निगम, प्रशासन और सरकार को आईना दिखा दिया। शनिवार को ग्रामीणों ने एकत्रित होकर खनियारा से सकोह गांव के लिए जाने वाली कूहल को अपने स्तर पर ठीक कर दिया और कूहल में खेतों के सिंचाई के लिए पानी ले आए।
ग्रामीण सुबह से भी कूहल को ठीक करने के लिए जुट गए थे। कड़ी मेहनत के बाद ग्रामीण अपने कार्य से सफल रहे और सूख रही खेतों की सिंचाई के लिए पानी ले आए। शनिवार को अमर उजाला समाचार पत्र में सकोह वार्ड में सूखी कूहल की खबर के बाद ग्रामीणों ने खुद ही इसे ठीक करने का निर्णय लिया।
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ग्रामीणों में नरेश भरवाल, सुभाष कुमार, रमेश अटवाल, अमरीक सिंह, जोनू, पंकज, रजिंद्र, रजनीश कुमार, संजीव धीमान, नरेश भाद्वाज, कुनाल, मोहिंद्र आदि ने बताया कि सालों से बंद कूहल को ठीक करने के लिए नगर निगम की ओर से कोई प्रयास नहीं किए गए। अंत में ग्रामीणों को ही खुद कूहल ठीक करनी पड़ी। टूटी कूहल को ठीक करने के लिए किसानों ने कूहल में बोरियों में मिट्टी भरकर रही।
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उन्होंने सरकार से मांग की है कि कूहलों का संरक्षण किया जाए, जिससे कि किसानों को परेशान न होना पड़े। ग्रामीणों ने कहा कि नगर निगम के अगले चुनावों में नेताओं को वार्ड में नहीं आने दिया जाएगा। जानकारी के अनुसार खनियारा से आने वाली कूहल पर चार हजार से अधिक किसान निर्भर हैं। यह कूहल हजारों कनाल भूमि की सिंचाई करती है, लेकिन अनदेखी के कारण कूहल सूख गई थी और किसानों के खेत बंजर हो रहे थे।
बाक्स:
नहीं आया कोई पार्षद
शनिवार सुबह से भारी संख्या में ग्रामीण कूहल को ठीक करने के लिए पहुंच, लेकिन वहां से दोनों पार्षदों में से एक भी मौके पर ग्रामीणों की सहायता के लिए नहीं पहुंचा। इस वजह से ग्रामीणों में दोनों पार्षदों और नगर निगम के खिलाफ रोष प्रकट किया। उन्होंने कहा कि गांव की समस्या के लिए अगर संबंधित वार्ड पार्षद आगे नहीं आएंगे तो फिर सरकार, प्रशासन या नगर निगम के अधिकारियों से क्या उम्मीद की जा सकती है।